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उत्तराखंड विधानसभा का 28अप्रैल को  विशेष सत्र: बिना विधायी कार्य के होगा सत्र सियासी हलचल तेज, विपक्ष का कैसे होगा रुख?

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उत्तराखंड विधानसभा का 28अप्रैल को  विशेष सत्र: बिना विधायी कार्य के होगा सत्र सियासी हलचल तेज, विपक्ष का कैसे होगा रुख?

देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट आने वाली है। शासन ने आगामी 28 अप्रैल 2026 (मंगलवार) को पांचवीं विधानसभा का एक दिवसीय ‘विशेष सत्र’ आहूत करने का निर्णय लिया है। प्रमुख सचिव सहदेव सिंह द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के बाद सचिवालय से लेकर विधानसभा भवन तक तैयारियां तेज कर दी गई हैं। हालांकि, इस सत्र की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें किसी भी प्रकार का ‘विधायी कार्य’ प्रस्तावित नहीं है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या यह सत्र केवल संवैधानिक औपचारिकताओं या किसी विशेष चर्चा तक सीमित रहेगा?

सत्ता पक्ष की रणनीति और आदेश के मायने

​प्रमुख सचिव की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सत्र के दौरान कोई नया विधेयक या विधायी कार्य सदन पटल पर नहीं रखा जाएगा। शासन ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे सत्र के सुचारू संचालन के लिए तत्काल नोडल अधिकारी नामित करें। इन अधिकारियों को सुबह 9:30 बजे से ही विधायी एवं संसदीय कार्य अनुभाग के साथ समन्वय बनाए रखने को कहा गया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सरकार महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषयों पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर सकती है, लेकिन विधायी कार्यों की अनुपस्थिति सत्र के उद्देश्य को लेकर सस्पेंस बढ़ा रही है।

विपक्ष की तैयारी और नेता प्रतिपक्ष के तेवर

​विधानसभा सत्र का इतिहास रहा है कि सदन के भीतर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक होती रही है। इस एक दिवसीय सत्र में सबकी निगाहें नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य पर टिकी हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भले ही सरकार ने विधायी कार्य शून्य रखा हो, लेकिन विपक्ष इसे हाथ से जाने नहीं देगा। यशपाल आर्य अपने विधायकों के साथ सदन में किन मुद्दों को लेकर सरकार को घेरेंगे, यह देखना दिलचस्प होगा।

​विशेष रूप से महिला आरक्षण, प्रदेश की कानून व्यवस्था और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर विपक्ष सरकार के सामने अपना कड़ा पक्ष रख सकता है। उत्तराखंड के संसदीय इतिहास में विपक्ष अक्सर जनहित के मुद्दों पर हंगामा करता रहा है, ऐसे में इस विशेष सत्र में भी शांतिपूर्ण सहयोग की उम्मीद कम ही नजर आ रही है।

महिला आरक्षण और अन्य संभावित मुद्दे

​माना जा रहा है कि यह विशेष सत्र महिला आरक्षण के मसले पर केंद्रित हो सकता है। जिस तरह से पिछले कुछ समय से इस मुद्दे पर चर्चाएं तेज हुई हैं, सरकार सदन के माध्यम से प्रदेश की जनता को कोई बड़ा संदेश देने की कोशिश कर सकती है। हालांकि, जब तक सदन की कार्यवाही शुरू नहीं होती, तब तक रणनीतियों का खुलासा होना मुश्किल है।

चुनौतीपूर्ण होगा सत्र का संचालन

​एक तरफ सरकार इसे केवल एक औपचारिक कार्यवाही की तरह देख रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इसे सरकार की नाकामियों को उजागर करने के अवसर के रूप में देख रहा है। यदि विपक्ष सदन में शोर-शराबा करता है या कार्यवाही में बाधा डालता है, तो एक दिन के इस सत्र का उद्देश्य प्रभावित हो सकता है। सदन के भीतर सत्ता पक्ष की तैयारी कितनी पुख्ता है और वह विपक्ष के हमलों का जवाब कैसे देता है, यह मुख्यमंत्री और संसदीय कार्य मंत्री के कौशल पर निर्भर करेगा।

​कुल मिलाकर, 28 अप्रैल को देहरादून स्थित विधानसभा भवन में होने वाला यह एक दिवसीय सत्र उत्तराखंड की भावी राजनीति की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है। क्या यह सत्र बिना किसी हंगामे के संपन्न होगा या विपक्ष के कड़े रुख के कारण प्रदेश को एक और ‘हंगामेदार’ सत्र देखने को मिलेगा, इसका फैसला मंगलवार को ही होगा।

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