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सीमांत गांव माणा बना आत्मनिर्भरता का नया अध्याय: मुख्यमंत्री धामी ने लिया विकास कार्यों का जायजा

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सीमांत गांव माणा बना आत्मनिर्भरता का नया अध्याय: मुख्यमंत्री धामी ने लिया विकास कार्यों का जायजा

चमोली (माणा): उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी बुधवार को भारत के प्रथम सीमांत गांव माणा पहुंचे। यहां उन्होंने न केवल विकास कार्यों का बारीकी से निरीक्षण किया, बल्कि स्थानीय जनता और चारधाम यात्रा पर आए श्रद्धालुओं से आत्मीय संवाद भी किया। मुख्यमंत्री का यह दौरा माणा गांव के लिए ऐतिहासिक रहा, क्योंकि आज यह गांव शत-प्रतिशत ‘लखपति दीदी’ गांव बनकर पूरे प्रदेश के लिए आत्मनिर्भरता का एक जीवंत मॉडल बन चुका है।

माणा: देश का प्रथम ‘लखपति दीदी’ गांव

​मुख्यमंत्री ने माणा गांव की उन 82 महिलाओं से मुलाकात की, जो स्वयं सहायता समूहों (SHG) के माध्यम से अपनी किस्मत बदल चुकी हैं। ग्राम पंचायत माणा में वर्तमान में 12 स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं।​संगठन की शक्ति: यहां ‘घुंघटी महिला ग्राम संगठन’ और ‘योगबंदी क्लस्टर स्तरीय संगठन’ के माध्यम से महिलाएं संगठित हैं।​शत-प्रतिशत सफलता: इस गांव की सभी 82 महिलाएं ‘लखपति दीदी’ की श्रेणी में आ चुकी हैं, जो यह दर्शाता है कि सरकारी योजनाओं का सही क्रियान्वयन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई दे सकता है।​विविध आजीविका: महिलाएं ऊनी वस्त्र, हैंडलूम, हैंडीक्राफ्ट, फर्नीचर, मसाले, पापड़ और भोजनालय जैसे कार्यों के जरिए अपनी आय बढ़ा रही हैं। इसके साथ ही मशरूम उत्पादन, मत्स्य पालन और होमस्टे के माध्यम से वे पर्यटकों को उत्तराखंडी संस्कृति का अनुभव भी करा रही हैं।

वाइब्रेंट विलेज: ‘अंतिम’ से ‘प्रथम’ की यात्रा

​मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन की सराहना करते हुए कहा कि पहले जिन गांवों को ‘अंतिम गांव’ मानकर उपेक्षित छोड़ दिया जाता था, आज उन्हें ‘प्रथम गांव’ मानकर विकसित किया जा रहा है।​”वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत सीमांत क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पानी और रोजगार की सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। माणा का विकास इस बात का प्रमाण है कि सीमांत क्षेत्रों में पलायन रुक रहा है और आजीविका के नए द्वार खुल रहे हैं।” – पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

 

पर्यटकों से अपील: ‘स्थानीय उत्पादों को दें प्राथमिकता’

​मुख्यमंत्री ने चारधाम यात्रा पर आ रहे श्रद्धालुओं से विशेष अपील की। उन्होंने कहा कि श्रद्धालु जब भी सीमांत क्षेत्रों में आएं, तो स्थानीय महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पादों की खरीदारी जरूर करें। इससे न केवल क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि उत्तराखंड के पारंपरिक हस्तशिल्प और उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी। सरस मॉल और स्थानीय स्टालों के माध्यम से इन उत्पादों की बिक्री को सरकार लगातार बढ़ावा दे रही है।

पर्यावरण संरक्षण: हरित और सुरक्षित यात्रा का संकल्प

​बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा गति पकड़ रही है। ऐसे में मुख्यमंत्री ने पर्यावरण के प्रति अपनी चिंता जाहिर करते हुए श्रद्धालुओं से इसे ‘प्लास्टिक मुक्त और स्वच्छ’ यात्रा बनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि हिमालय की पारिस्थितिकी को बचाना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। यात्रा को सुरक्षित और सुखद बनाने के लिए सरकार हर संभव प्रयास कर रही है, लेकिन इसमें जनभागीदारी भी अनिवार्य है।

परंपराओं का सम्मान

​मुख्यमंत्री के आगमन पर माणा की महिलाओं ने पारंपरिक मांगलगीत गाकर और स्थानीय उपहार भेंट कर उनका भव्य स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने इस आत्मीयता के लिए ग्रामीणों का आभार प्रकट किया और कहा कि उत्तराखंड की संस्कृति ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है।

माणा गांव आज महिला सशक्तिकरण और समावेशी विकास का उत्कृष्ट उदाहरण है। सरकारी योजनाओं और स्थानीय महिलाओं के परिश्रम ने माणा को केवल एक पर्यटन स्थल ही नहीं, बल्कि ‘आत्मनिर्भर उत्तराखंड’ के संकल्प का केंद्र बना दिया है। मुख्यमंत्री का यह दौरा सीमांत क्षेत्रों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को और अधिक सुदृढ़ करता है।

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