गाजीपुर: अज्ञात कारणों से लगी भीषण आग; मड़ई के साथ जलकर राख हुई गरीब की गृहस्थी, पीड़ित परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
1 min read


गाजीपुर: अज्ञात कारणों से लगी भीषण आग; मड़ई के साथ जलकर राख हुई गरीब की गृहस्थी, पीड़ित परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
बहादुरगंज (गाज़ीपुर)।
बहादुरगंज नगर पंचायत के वार्ड नंबर 7 (नदी उस पार) इलाके में गुरुवार की देर रात एक बेहद दर्दनाक और हृदयविदारक घटना सामने आई है। यहाँ एक अत्यंत गरीब परिवार की मड़ई (झोपड़ी) में अज्ञात कारणों से अचानक भीषण आग लग गई। इस अग्निकांड में झोपड़ी के भीतर रखा हजारों रुपये का घरेलू सामान, राशन और अन्य सामग्री पल भर में जलकर पूरी तरह राख हो गई। घटना के बाद से पीड़ित परिवार में कोहराम मचा हुआ है, वहीं आधी रात को लगी इस आग के कारण पूरे गांव और आसपास के क्षेत्र में अफरा-तफरी व दहशत का माहौल बन गया।
आधी रात को काल बनकर उठीं आग की लपटें
प्राप्त विवरण के अनुसार, वार्ड नंबर 7 नदी उस पार के निवासी रामजी साहनी (पुत्र स्वर्गीय शिवनाथ साहनी) रोज़ की तरह गुरुवार की रात अपने परिवार के साथ सो रहे थे। रात के करीब 12:00 बजे अचानक उनकी मड़ई से धुएं के साथ आग की ऊंची-ऊंची लपटें उठने लगीं। इससे पहले कि सो रहा परिवार कुछ समझ पाता, सूखी घास-फूस से बनी मड़ई ने पूरी तरह से विकराल रूप धारण कर लिया।
आग की भयानकता को देखकर जब सो रहे परिजनों की आंख खुली, तो उन्होंने बदहवास होकर चीख-पुकार और शोर मचाना शुरू किया। मध्यरात्रि के सन्नाटे में चीख-पुकार सुनकर बड़ी संख्या में ग्रामीण और पड़ोसी लाठी-डंडे और टॉर्च लेकर मौके पर दौड़ पड़े।
ग्रामीणों ने दिखाया साहस; टुल्लू पंप और हैंडपंप से पाया काबू
मड़ई को धू-धू कर जलता देख ग्रामीणों ने बिना समय गंवाए अपने स्तर पर राहत और बचाव कार्य शुरू किया। ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए आसपास के घरों में लगे टुल्लू पंप चालू किए और बाल्टियों के जरिए नल व हैंडपंप से पानी लाकर आग पर डालना शुरू किया।
आग इतनी भयावह थी कि उसकी लपटों के सामने पानी बेअसर साबित हो रहा था। लेकिन ग्रामीणों के अटूट साहस और काफी देर तक की गई भारी मशक्कत के बाद आखिरकार आग पर काबू पा लिया गया। हालांकि, जब तक आग पूरी तरह ठंडी होती, तब तक रामजी साहनी का सब कुछ जलकर स्वाहा हो चुका था।
अनाज से लेकर कपड़े तक खाक; बेटी की शादी की बढ़ी चिंता
इस अग्निकांड ने पीड़ित परिवार को दाने-दाने का मोहताज कर दिया है। मड़ई के भीतर रखा लगभग 8 से 9 क्विंटल गेहूं, भूसा, आटा, उपले, पहनने के कपड़े, बर्तन और दैनिक उपयोग की सभी आवश्यक सामग्रियां पूरी तरह जलकर नष्ट हो गईं।पीड़ित का छलका दर्द:आंखों में आंसू लिए पीड़ित रामजी साहनी ने बताया कि वह मजदूरी और छोटी-मोटी खेती करके किसी तरह अपने बड़े परिवार का पेट पालते हैं। उनके परिवार में पत्नी राधिका देवी के अलावा तीन बेटे (सूरज, नीरज, धीरज) और दो बेटियां (ज्योति और जूही) हैं। बड़ी बेटी ज्योति का विवाह तो हो चुका है, लेकिन छोटी बेटी जूही अभी अविवाहित है। रामजी ने रुआंसे गले से कहा कि इस आग ने न सिर्फ उनके मुंह का निवाला छीना है, बल्कि बेटी के हाथ पीले करने के उनके अरमानों और तैयारियों को भी झुलसा दिया है।
प्रशासन से मुआवजे की गुहार; क्षेत्र में शोक की लहर
इस दर्दनाक हादसे के बाद पूरे बहादुरगंज क्षेत्र में शोक की लहर है। स्थानीय संभ्रांत नागरिकों और ग्रामीणों ने पीड़ित परिवार के घर पहुंचकर उन्हें ढांढस बंधाया और अपनी ओर से हरसंभव सामाजिक व आर्थिक सहयोग का आश्वासन दिया है।
ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन और उपजिलाधिकारी (SDM) से पुरजोर मांग की है कि इस अत्यंत गरीब और भूमिहीन परिवार की दयनीय स्थिति को देखते हुए तत्काल मौका-मुआयना (राजस्व टीम द्वारा) कराया जाए। उन्होंने मांग की है कि पीड़ित रामजी साहनी को जल्द से जल्द उचित सरकारी मुआवजा, मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान और फौरी राहत के तौर पर राशन व कपड़े उपलब्ध कराए जाएं, ताकि यह बेघर हुआ परिवार फिर से अपनी जिंदगी की नई शुरुआत कर सके। घटना की आधिकारिक सूचना स्थानीय पुलिस और राजस्व प्रशासन को दे दी गई है।
