उत्तराखंड: राजकीय आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सा सेवा संघ ने खोला मोर्चा; आज से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार और धरना-प्रदर्शन शुरू
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उत्तराखंड: राजकीय आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सा सेवा संघ ने खोला मोर्चा; आज से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार और धरना-प्रदर्शन शुरू
देहरादून। उत्तराखंड में आयुष विभाग के अंतर्गत कार्यरत चिकित्साधिकारियों की लंबे समय से लंबित मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई न होने से नाराज राजकीय आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सा सेवा संघ, उत्तराखंड ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संघ ने शासन और निदेशालय स्तर पर अपनाए जा रहे “उपेक्षापूर्ण और निराशाजनक रवैये” के विरोध में चरणबद्ध आंदोलन का एलान किया था, जिसके अंतिम चरण में आज यानी 15 जून 2026 से पूरे प्रदेश में पूर्ण कार्य बहिष्कार और आयुष निदेशालय, देहरादून में अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया गया है।
संघ के प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. नीरज कोहली और प्रांतीय महासचिव डॉ. हरदेव सिंह रावत द्वारा हस्ताक्षरित इस मांग पत्र को शासन के सचिव (आयुष एवं आयुष शिक्षा विभाग) और अपर सचिव/निदेशक को भेजा गया है। चिकित्साधिकारियों का कहना है कि बार-बार पत्राचार और बैठकों के बावजूद विभाग द्वारा कोई संतोषजनक निर्णय नहीं लिया गया, जिससे पूरे कैडर में भारी असंतोष और आक्रोश व्याप्त है।
चिकित्साधिकारियों की 7 प्रमुख मांगें:
चिकित्सकों के संगठन ने शासन के सामने मुख्य रूप से निम्नलिखित सात मांगें रखी हैं:स्थायी एवं प्रभावी निदेशक की नियुक्ति: चिकित्सा संवर्ग में स्थायी निदेशक न होने के कारण प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं। संघ की मांग है कि विभाग में अविलंब स्थायी निदेशक की नियुक्ति की जाए।ACR समयबद्ध पूर्ण कर ACP/MACP लाभ देना: वर्ष 2013 और 2015 बैच के चिकित्साधिकारियों की 10 वर्ष की सेवा पूरी होने के बाद भी वार्षिक गोपनीय प्रविष्टियां (ACR) समय से पूरी न होने के कारण उन्हें वित्तीय लाभ नहीं मिल पा रहा है।DACP लाभ लागू करना: वर्ष 2022 में राज्य कैबिनेट द्वारा स्वीकृत होने के बावजूद आज तक डायनेमिक एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (DACP) का शासनादेश जारी नहीं हुआ है, जिससे डॉक्टरों को आर्थिक नुकसान हो रहा है।विभागीय ढांचे का पुनर्गठन व पदोन्नति: अन्य विभागों की तुलना में आयुर्वेद एवं यूनानी संवर्ग में पदोन्नति के अवसर बेहद सीमित हैं, इसलिए विभागीय ढांचे का पुनर्गठन कर पदोन्नति के पर्याप्त अवसर सुनिश्चित किए जाएं।अध्ययन अवकाश की अवधि 3 वर्ष करना: पीजी (MD/MS) पाठ्यक्रमों के लिए भारतीय चिकित्सा परिषद के नियमानुसार 3 वर्ष का अध्ययन अवकाश मिलता है, लेकिन विभाग केवल 2 वर्ष की अनुमति देता है। बाकी समय के लिए डॉक्टरों को आधे वेतन पर रहने को मजबूर किया जाता है, जिसे बदलकर पूर्ण वेतन सहित 3 वर्ष किया जाए।
- वर्ष 2024 बैच का स्थायीकरण: फरवरी 2026 में 2 वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद भी इस बैच के डॉक्टरों का स्थायीकरण अभी तक लंबित है, जिसे तत्काल प्रभाव से किया जाए।
- ऑनलाइन व बायोमेट्रिक उपस्थिति का विरोध: दुर्गम और पर्वतीय क्षेत्रों में खराब इंटरनेट कनेक्टिविटी के कारण मोबाइल ऐप आधारित और आधार बायोमेट्रिक उपस्थिति व्यावहारिक रूप से बेहद कठिन है। संघ का कहना है कि इसे वेतन आहरण से जोड़ना और तकनीकी गड़बड़ी पर चेतावनी पत्र जारी करना डॉक्टरों का मानसिक उत्पीड़न है, जिसे तुरंत रोका जाए।
चरणबद्ध आंदोलन का कार्यक्रम:
संघ ने अपनी मांगों को मनवाने के लिए 8 जून से ही आंदोलन शुरू कर दिया था, जो अब उग्र रूप ले चुका है:8 से 10 जून: डॉक्टरों ने काली पट्टी बांधकर और सांकेतिक विरोध दर्ज करते हुए ओपीडी का संचालन किया।11 और 12 जून: आधे दिन (हाफ डे) ओपीडी का संचालन बंद कर विरोध जताया गया।13 जून: पूरे प्रदेश में पूर्ण ओपीडी बहिष्कार कर जिला मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन किया गया।15 जून (आज से): पूरे प्रदेश के राजकीय आयुर्वेद और यूनानी अस्पतालों में पूर्ण कार्य बहिष्कार प्रारंभ कर दिया गया है। इसके साथ ही देहरादून स्थित निदेशालय पर डॉक्टर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं।संघ की चेतावनी: > संघ के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी न्यायोचित मांगों पर शासन ने तत्काल सकारात्मक और समयबद्ध निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और विभागीय प्रशासन की होगी। इस आंदोलन की प्रतिलिपि महामहिम राज्यपाल, मुख्यमंत्री, आयुष मंत्री और जिलाधिकारियों को भी सूचनार्थ भेज दी गई है।
