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गोपीनाथ पीजी कॉलेज में अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस पर भव्य योग शिविर का आयोजन: छात्र-छात्राओं ने लिया ‘स्वस्थ जीवन’ का संकल्प

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गोपीनाथ पीजी कॉलेज में अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस पर भव्य योग शिविर का आयोजन: छात्र-छात्राओं ने लिया ‘स्वस्थ जीवन’ का संकल्प

देवली/बहादुरगंज (गाजीपुर)।

अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के पावन अवसर पर देवली स्थित गोपीनाथ पीजी कॉलेज के प्रांगण में एक भव्य और गरिमामयी योग शिविर का आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापकों, गैर-शिक्षण कर्मचारियों सहित भारी संख्या में छात्र-छात्राओं ने अत्यंत उत्साह और ऊर्जा के साथ प्रतिभाग किया। पूरे कॉलेज परिसर में योग को लेकर अद्भुत जागरूकता, सकारात्मकता और उत्साह का माहौल देखने को मिला।

​शिविर का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को योग के प्रति जागरूक करना और इसे उनकी दैनिक जीवनशैली का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित करना था।

​सामूहिक योगाभ्यास और प्राणायाम का सत्र

​कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार और सामूहिक योगाभ्यास के साथ हुई। योग प्रशिक्षकों के कुशल मार्गदर्शन में उपस्थित जनसमूह ने व्यवस्थित रूप से विभिन्न आसनों का अभ्यास किया। सत्र के दौरान प्रतिभागियों ने शरीर को लचीला और मजबूत बनाने वाले प्रमुख आसन जैसे:​ताड़ासन और वृक्षासन (एकाग्रता और संतुलन के लिए)​भुजंगासन और वज्रासन (रीढ़ की हड्डी और पाचन क्रिया के लिए)​पद्मासन तथा सूर्य नमस्कार (सर्वांगीण शारीरिक व मानसिक विकास के लिए)

​आसनों के सफल अभ्यास के उपरांत श्वसन तंत्र को सुदृढ़ करने के लिए प्राणायाम का सत्र आयोजित किया गया। इसमें प्रतिभागियों को अनुलोम-विलोम, कपालभाति एवं भ्रामरी जैसी महत्वपूर्ण प्राणायाम तकनीकों का सघन अभ्यास कराया गया। योग प्रशिक्षकों ने प्रत्येक क्रिया के वैज्ञानिक और स्वास्थ्य लाभों को रेखांकित करते हुए बताया कि नियमित योगाभ्यास शरीर को निरोगी रखने, मन को शांत करने तथा जीवन को अनुशासित व ऊर्जावान बनाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

​विचार गोष्ठी: “योग जीवन को संतुलित बनाने की दिव्य पद्धति”

​योगाभ्यास सत्र के समापन के बाद महाविद्यालय के सभागार में एक प्रेरणादायक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न वक्ताओं ने योग के दार्शनिक, वैज्ञानिक और व्यावहारिक पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। वक्ताओं ने एक सुर में कहा कि योग भारत की अनादि और प्राचीन सांस्कृतिक विरासत है, जिसकी महत्ता को स्वीकार करते हुए आज संपूर्ण विश्व इसे अपना रहा है। योग मात्र एक शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह आत्मा को परमात्मा से जोड़ने और जीवन को सकारात्मक व संतुलित बनाने की एक प्रभावी विधा है। आधुनिक युग में नियमित योग से मानसिक तनाव, अवसाद, चिंता तथा कई असाध्य शारीरिक विकारों से स्थाई मुक्ति पाई जा सकती है।

​संरक्षक राकेश तिवारी का संबोधन

​महाविद्यालय के संरक्षक राकेश तिवारी ने युवाओं को प्रेरित करते हुए अपने मुख्य संबोधन में कहा:आज की इस अत्यंत भागदौड़ भरी, प्रतिस्पर्धी और तनावपूर्ण जीवनशैली में योग की प्रासंगिकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। यदि हमारा युवा वर्ग नियमित रूप से योग को अपनी दिनचर्या का अनिवार्य हिस्सा बना ले, तो वे न केवल अनेक आधुनिक बीमारियों से सुरक्षित रहेंगे, बल्कि एक उत्कृष्ट स्वास्थ्य और प्रखर बौद्धिक क्षमता भी प्राप्त कर सकेंगे।”

 

​उन्होंने विद्यार्थियों से न सिर्फ स्वयं प्रतिदिन योग करने का आह्वान किया, बल्कि समाज के अन्य लोगों को भी इसके प्रति जागरूक करने की अपील की।

​ग्राम प्रधान ने जताया आभार

​इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित स्थानीय ग्राम प्रधान हीरा मणि चौहान ने कहा कि योग विश्व पटल पर भारत की एक विशिष्ट पहचान है। यह हमारे दूरदर्शी ऋषि-मुनियों द्वारा मानवता को दी गई एक अमूल्य और कल्याणकारी देन है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि योग के माध्यम से ही एक स्वस्थ, रोगमुक्त समाज और अंततः एक सशक्त व आत्मनिर्भर राष्ट्र का निर्माण संभव है।

​संकल्प के साथ समापन एवं गरिमामयी उपस्थिति

​योग शिविर के अंतिम चरण में परिसर में उपस्थित सभी प्राध्यापकों, अतिथियों और विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से जीवनभर नियमित योग करने, व्यसनों से दूर रहने तथा एक स्वस्थ, अनुशासित एवं संतुलित जीवनशैली अपनाने का अटूट संकल्प लिया। महाविद्यालय प्रबंधन ने इस सफल आयोजन को विद्यार्थियों में स्वास्थ्य चेतना और मानसिक दृढ़ता बढ़ाने की दिशा में एक बेहद सराहनीय और प्रेरणादायक कदम बताया।

​इस भव्य और सफल आयोजन को संपन्न कराने में महाविद्यालय के वरिष्ठ शिक्षाविदों और गणमान्य जनों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही, जिनमें प्रमुख रूप से:

डॉ. अधीश श्रीवास्तव, डॉ. वेद प्रकाश तिवारी, डॉ. अंजना तिवारी, नवनीत सिंह, चन्द्रकेश दूबे, रणजीत यादव, मुनव्वर अली, अनिल राव, सईदुज़्ज़फर सहित समस्त शिक्षक संघ, शिक्षणेत्तर कर्मचारी, एनसीसी व एनएसएस के स्वयंसेवक तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शामिल रहे।

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