शक्ति उपासना और नव चेतना का पर्व: मुख्यमंत्री का प्रदेश को संदेश
1 min read


शक्ति उपासना और नव चेतना का पर्व: मुख्यमंत्री का प्रदेश को संदेश
भारतीय संस्कृति में चैत्र नवरात्रि और नव संवत्सर का आगमन केवल ऋतु परिवर्तन का संकेत नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिक जागरण, सामाजिक समरसता और नारी शक्ति के सम्मान का उद्घोष है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने इस पावन अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए जिन बिंदुओं को रेखांकित किया है, वे हमारे समाज की नैतिक और सांस्कृतिक नींव को और सुदृढ़ करते हैं।
नारी शक्ति: सामर्थ्य और सम्मान का प्रतीक
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में चैत्र नवरात्रि को नारी शक्ति के महत्व से जोड़ा है। हिंदू धर्म में नवरात्रि का पर्व साक्षात् शक्ति की उपासना है। श्री धामी ने स्पष्ट किया कि कन्या पूजन जैसी परंपराएं केवल कर्मकांड नहीं हैं, बल्कि यह समाज को यह याद दिलाने का माध्यम हैं कि राष्ट्र के निर्माण में महिलाओं का सामर्थ्य कितना महत्वपूर्ण है।
”नवरात्रि का पर्व समाज में नारी के महत्व और सामर्थ्य को दर्शाता है। कन्या पूजन उसी शक्ति के प्रति हमारी कृतज्ञता का प्रतीक है।”
मुख्यमंत्री की यह अपील कि सभी को नारियों के सम्मान का संकल्प लेना चाहिए, आज के परिप्रेक्ष्य में अत्यंत प्रासंगिक है। जब तक समाज में महिलाओं को उचित सम्मान और सुरक्षा नहीं मिलेगी, तब तक सर्वांगीण विकास की परिकल्पना अधूरी है।
सांस्कृतिक और धार्मिक महत्ता
पौराणिक ग्रंथों के हवाले से मुख्यमंत्री ने चैत्र नवरात्रि को आत्मशुद्धि और सद् प्रवृत्ति का आधार बताया। देवभूमि उत्तराखंड, जो स्वयं शक्तिपीठों और सिद्धपीठों की भूमि है, वहां इन नौ दिनों का महत्व और भी बढ़ जाता है।
- नकारात्मकता का अंत: मां दुर्गा की पूजा का मुख्य उद्देश्य अंतर्मन की बुराइयों और समाज की नकारात्मक ऊर्जा का विनाश करना है।
- सकारात्मक ऊर्जा का संचार: अनुष्ठानों के माध्यम से वातावरण में एक नई ऊर्जा का प्रवाह होता है, जो जनमानस को मानसिक शांति और दृढ़ता प्रदान करता है।
- सांस्कृतिक आयोजन: प्रदेश के प्रमुख देवी मंदिरों और शक्तिपीठों में होने वाले धार्मिक कार्यक्रम हमारी समृद्ध विरासत को जीवित रखते हैं।
संकल्प से सिद्धि की ओर
भारतीय सनातन परंपरा में ‘संकल्प’ का विशेष स्थान है। मुख्यमंत्री धामी ने इस बात पर जोर दिया कि शक्ति की यह आराधना केवल व्यक्तिगत लाभ तक सीमित न रहकर रचनात्मक और सृजनात्मक कार्यों की प्रेरणा बने।
नव संवत्सर, जो कि हिंदू नव वर्ष का प्रारंभ है, हमें पुराने को पीछे छोड़ नवीन उत्साह के साथ आगे बढ़ने का अवसर देता है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों का आह्वान किया है कि वे इस अवसर पर देश और समाज की सेवा का संकल्प लें। यह समय केवल उत्सव मनाने का नहीं, बल्कि अपनी ऊर्जा को राष्ट्र निर्माण की दिशा में मोड़ने का है।
सुख और समृद्धि की कामना
मुख्यमंत्री का यह संदेश लोक-कल्याण की भावना से ओतप्रोत है। उन्होंने कामना की है कि यह नव संवत्सर प्रदेश के प्रत्येक नागरिक के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आए। शक्ति के अनुष्ठान का यह पर्व हमें अनुशासन, धैर्य और कर्तव्यपरायणता की सीख देता है।
देवभूमि की पावन धरती पर जब मंत्रों का उद्घोष होता है और शक्ति की आराधना की जाती है, तो वह संपूर्ण राष्ट्र के लिए मंगलकारी होती है। मुख्यमंत्री के इन शब्दों ने न केवल त्यौहार की शोभा बढ़ाई है, बल्कि नागरिकों को अपनी जड़ों से जुड़े रहने और एक बेहतर समाज बनाने के लिए प्रेरित भी किया है।
