यूपी पुलिस को जल्द मिलेगा पूर्णकालिक DGP: गृह विभाग ने UPSC को भेजा प्रस्ताव, रेणुका मिश्रा और राजीव कृष्ण के नामों की चर्चा तेज
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यूपी पुलिस को जल्द मिलेगा पूर्णकालिक DGP: गृह विभाग ने UPSC को भेजा प्रस्ताव, रेणुका मिश्रा और राजीव कृष्ण के नामों की चर्चा तेज
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पुलिस महकमे से इस वक्त की सबसे बड़ी प्रशासनिक खबर सामने आ रही है। पिछले करीब चार वर्षों से कार्यवाहक डीजीपी के भरोसे चल रहे देश के सबसे बड़े पुलिस बल को अब जल्द ही अपना पूर्णकालिक पुलिस महानिदेशक (DGP) मिलने जा रहा है। उत्तर प्रदेश शासन के गृह विभाग ने नए डीजीपी की तैनाती के लिए औपचारिक प्रस्ताव संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को भेज दिया है।
2022 के बाद खत्म होगा ‘कार्यवाहक’ का दौर
उत्तर प्रदेश में साल 2022 के बाद से कोई भी अधिकारी पूर्णकालिक डीजीपी के पद पर तैनात नहीं रहा है। मुकुल गोयल के हटने के बाद से लगातार कार्यवाहक डीजीपी के जरिए ही व्यवस्था संचालित की जा रही थी। अब शासन द्वारा यूपीएससी को पैनल भेजे जाने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि अगले कुछ दिनों में यूपी पुलिस को अपना स्थाई मुखिया मिल जाएगा।
तीन दर्जन वरिष्ठ IPS अधिकारियों के नाम रेस में
सूत्रों के अनुसार, शासन द्वारा भेजे गए इस प्रस्ताव में उन अधिकारियों को शामिल किया गया है जिन्होंने 30 वर्ष की पुलिस सेवा पूरी कर ली है। इस सूची में 1990 से 1996 बैच तक के लगभग तीन दर्जन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नाम शामिल हैं। यूपीएससी इन नामों में से वरिष्ठता, सेवा रिकॉर्ड और शेष कार्यकाल के आधार पर तीन अधिकारियों का एक पैनल तैयार कर राज्य सरकार को वापस भेजेगा, जिसमें से एक नाम पर अंतिम मुहर लगेगी।
वरिष्ठता सूची और प्रमुख दावेदार
वर्तमान में वरिष्ठता क्रम के आधार पर कई बड़े नाम चर्चा में हैं:
- रेणुका मिश्रा (1990 बैच): वरिष्ठता सूची में सबसे ऊपर आईपीएस रेणुका मिश्रा का नाम है। वे वर्तमान में डीजी पद पर कार्यरत हैं और उनकी दावेदारी काफी मजबूत मानी जा रही है।
- आलोक शर्मा (1991 बैच): सूची में दूसरे स्थान पर आलोक शर्मा हैं। हालांकि, वे वर्तमान में केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर SPG (Special Protection Group) के निदेशक के पद पर तैनात हैं।
- पीयूष आनंद (1991 बैच): तीसरे स्थान पर पीयूष आनंद का नाम है, जो वर्तमान में केंद्र में DG NDRF के महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
- राजीव कृष्ण (1991 बैच): चौथे स्थान पर राजीव कृष्ण का नाम है। प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि वरिष्ठता और अनुभव के आधार पर राजीव कृष्ण के नाम पर ही अगले पूर्णकालिक डीजीपी के रूप में मुहर लग सकती है।
चुनौतियां और चयन की प्रक्रिया
सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों (प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ मामला) के अनुसार, डीजीपी के पद पर चयन के लिए कम से कम 6 महीने का कार्यकाल शेष होना अनिवार्य है। साथ ही, अधिकारी का सेवा रिकॉर्ड बेदाग होना चाहिए। यूपीएससी की बैठक के बाद जो तीन नाम फाइनल होंगे, उनमें से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अंतिम चयन करेंगे।
यूपी जैसे बड़े और चुनौतीपूर्ण राज्य में कानून-व्यवस्था को और सुदृढ़ करना नए डीजीपी की पहली प्राथमिकता होगी। आगामी चुनाव और सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर एक स्थाई डीजीपी की नियुक्ति पुलिस बल के मनोबल और कार्यप्रणाली के लिए अत्यंत आवश्यक मानी जा रही है।
प्रशासनिक स्थिरता की ओर कदम
गृह विभाग के इस कदम से स्पष्ट है कि सरकार अब पुलिस प्रशासन में ‘एडहॉक’ या अस्थायी व्यवस्था को समाप्त कर पूर्णकालिक नेतृत्व देना चाहती है। अगले एक सप्ताह के भीतर दिल्ली में होने वाली यूपीएससी की बैठक में इन नामों पर गहन विचार-विमर्श होने की संभावना है।
