मायावती का बड़ा ऐलान: मध्य प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ में ‘अंबेडकरवादी मूवमेंट’ होगा तेज; विरोधियों के ‘लुभावने वादों’ से सावधान रहने की अपील
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मायावती का बड़ा ऐलान: मध्य प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ में ‘अंबेडकरवादी मूवमेंट’ होगा तेज; विरोधियों के ‘लुभावने वादों’ से सावधान रहने की अपील
लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री बहन कुमारी मायावती ने आज लखनऊ में तीन राज्यों—मध्य प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़—की स्टेट यूनिट के साथ एक बेहद महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। इस बैठक में मायावती जी ने पार्टी संगठन की मजबूती, जनाधार बढ़ाने और आगामी चुनावी चुनौतियों को लेकर न केवल रणनीति साझा की, बल्कि विरोधियों पर भी तीखा हमला बोला।
‘सत्ता की मास्टर चाबी’ ही बहुजनों का उद्धार: मायावती
बैठक को संबोधित करते हुए मायावती जी ने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा दिए गए संवैधानिक अधिकारों को जमीन पर लागू करने के लिए बहुजन समाज को ‘सत्ता की मास्टर चाबी’ खुद अपने हाथों में लेनी होगी। उन्होंने जोर देकर कहा, “जातिवादी शोषण और गरीब-विरोधी शासन से मुक्ति पाने का एकमात्र रास्ता शासक वर्ग बनना है।” उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से मान्यवर श्री कांशीराम जी के अधूरे मिशन को पूरा करने के लिए पूरी जी-जान से जुटने का आह्वान किया।
विरोधी पार्टियों के ‘छलावे’ और प्रलोभनों से रहें दूर
आगामी चुनाव के मद्देनजर मायावती जी ने मध्य प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ के मतदाताओं, विशेषकर दलित, ओबीसी और मुस्लिम समाज को सतर्क किया। उन्होंने कहा:
- चुनावी प्रलोभन: चुनाव से ठीक पहले सत्ताधारी दल कई तरह के प्रलोभन देते हैं। इनसे बचना जरूरी है ताकि आने वाले 5 साल ‘अच्छे दिन’ के बजाय ‘बुरे दिन’ न साबित हों।
- कथनी और करनी में अंतर: उन्होंने विपक्षी पार्टियों पर निशाना साधते हुए कहा कि इनके वादों और जमीनी हकीकत में भारी विरोधाभास होता है। इनकी नीयत और नीति में खोट के कारण ही आज देश की हालत बद से बदतर होती जा रही है।
यूपी का उदाहरण: ‘कानून द्वारा कानून का राज’
मायावती जी ने उत्तर प्रदेश में अपने चार बार के कार्यकाल का उदाहरण देते हुए कहा कि बीएसपी ने ‘सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की नीति पर चलते हुए हर समाज को सुरक्षा और सम्मान की संवैधानिक गारंटी दी। उन्होंने मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करने और दलितों-पिछड़ों को आरक्षण के हक दिलाने में बीएसपी की ऐतिहासिक भूमिका को भी याद दिलाया।
“जब-जब बीएसपी मजबूत हुई है, तब-तब दलितों, आदिवासियों, ओबीसी और अल्पसंख्यकों का भरपूर भला हुआ है।” — मायावती
सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग पर जताई चिंता
मायावती जी ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान सत्ताधारी पार्टियाँ साम, दाम, दंड, भेद जैसे हथकंडे अपनाकर दलित और पिछड़ों को सत्ता से दूर रखना चाहती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर ‘बहुजन समाज’ के राजनीतिक उदय को रोकने की साजिश रची जा रही है।
आगामी कार्यक्रम: 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती का भव्य आयोजन
प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए कि:
- स्थापना दिवस और जयंती: आगामी 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती और बीएसपी के स्थापना दिवस को पूरी मिशनरी भावना के साथ मनाया जाए।
- संगठन विस्तार: गांव-गांव जाकर जनाधार को बढ़ाने और पार्टी के मिशन से लोगों को जोड़ने की प्रक्रिया तेज की जाए।
