प्रयागराज: रामनवमी पर त्रिवेणी संगम में उमड़ा आस्था का सैलाब; विश्व शांति के लिए तट पर गूँजा ‘महामृत्युंजय’ और ‘रामनवमी यज्ञ’
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प्रयागराज: रामनवमी पर त्रिवेणी संगम में उमड़ा आस्था का सैलाब; विश्व शांति के लिए तट पर गूँजा ‘महामृत्युंजय’ और ‘रामनवमी यज्ञ’
प्रयागराज | न्यूज़ डेस्क दिनांक: 27 मार्च, 2026
मुख्य आकर्षण:
- ब्रह्ममुहूर्त से ही लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई संगम में आस्था की डुबकी।
- वैश्विक युद्ध के खतरों के बीच शांति के लिए आयोजित हुआ विशेष रामनवमी यज्ञ।
- ऋषि भारद्वाज की धरती पर प्रभु राम और मां त्रिवेणी का लिया आशीर्वाद।
प्रयागराज। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के जन्मोत्सव ‘रामनवमी’ के पावन अवसर पर आज तीर्थराज प्रयाग में भक्ति, शक्ति और अध्यात्म का अद्भुत संगम देखने को मिला। संगम की रेती पर सुबह के चार बजे (ब्रह्ममुहूर्त) से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के कोने-कोने से आए भक्त गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती की पावन जलधारा में डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं।
विश्व शांति के लिए विशेष अनुष्ठान: युद्ध के संकट से मुक्ति की कामना
आज जब पूरी दुनिया तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने पर खड़ी है और विभिन्न देशों के बीच तनाव चरम पर है, तब संगम की इस पवित्र धरती से शांति का संदेश दिया गया। संगम तट पर विद्वान आचार्यों के सानिध्य में एक विशाल ‘रामनवमी यज्ञ’ का आयोजन किया गया।
यज्ञ में आहुति दे रहे संतों और श्रद्धालुओं का कहना है कि वर्तमान में मानवता पर आए संकट और अशांति के बादलों को छांटने के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा की आवश्यकता है। मां त्रिवेणी से प्रार्थना की गई है कि वैश्विक संघर्ष समाप्त हों और दुनिया में ‘राम राज्य’ की तरह शांति व सद्भाव स्थापित हो।
धार्मिक मान्यता: पापों का नाश और मोक्ष की प्राप्ति
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, रामनवमी के दिन तीर्थराज प्रयाग में स्नान करने का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। कहा जाता है कि इस दिन संगम के जल में डुबकी लगाने से व्यक्ति के कायिक, वाचिक और मानसिक पाप धुल जाते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि आज के दिन सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना मां त्रिवेणी अवश्य पूर्ण करती हैं।
पंडित विनोदाचार्य ने बताया, “प्रयागराज का रामनवमी से गहरा नाता है। वनवास के दौरान प्रभु श्रीराम ने यहीं ऋषि भारद्वाज के आश्रम में विश्राम किया था। इसलिए, आज यहां स्नान करने से न केवल पितरों का तर्पण होता है, बल्कि भगवान राम की विशेष कृपा भी प्राप्त होती है।”
श्रद्धालुओं का अनुभव: आस्था का वॉक-थ्रू
संगम तट पर चारों ओर ‘जय श्री राम’ और ‘हर-हर गंगे’ के उद्घोष सुनाई दे रहे हैं। प्रशासन द्वारा बनाए गए विभिन्न घाटों पर सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच भक्त भजन-कीर्तन करते नजर आ रहे हैं।
वाराणसी से आए श्रद्धालु मनोज ने बताया, “यहाँ आकर एक अलौकिक शांति की अनुभूति होती है। हमने अपने परिवार के साथ स्नान किया और देश की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की।” वहीं, गोरेलाल मिश्र ने कहा, “आज का दिन आत्म-शुद्धि का है। दुनिया में बहुत अशांति है, इसलिए हमने आज विशेष रूप से विश्व कल्याण के लिए मां गंगा से प्रार्थना की है।”
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रयागराज मेला प्रशासन और पुलिस विभाग पूरी तरह सतर्क है। जल पुलिस, गोताखोरों की टीम और एसडीआरएफ (SDRF) को तैनात किया गया है। पूरे मेला क्षेत्र की निगरानी ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी के जरिए की जा रही है। जगह-जगह चिकित्सा शिविर और पेयजल की व्यवस्था भी की गई है ताकि दूर-दराज से आए भक्तों को कोई असुविधा न हो।
रामनवमी पर प्रयागराज का यह दृश्य न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह संकट के समय में मानवता की एकता और आध्यात्मिक शक्ति का भी परिचायक है। शाम को होने वाली विशेष ‘गंगा आरती’ के साथ आज के इस महापर्व का समापन होगा, जिसमें हजारों दीपकों की रोशनी से संगम तट जगमगा उठेगा।
