लखनऊ की हवा हुई ‘जहरीली’: दुनिया के 58वें सबसे प्रदूषित शहर में शुमार हुई नवाबों की नगरी, IQAir की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता
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राजेश कुमार की जयपुर से खास रिपोर्ट


लखनऊ की हवा हुई ‘जहरीली’: दुनिया के 58वें सबसे प्रदूषित शहर में शुमार हुई नवाबों की नगरी, IQAir की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, जिसे अपनी तहजीब और हरियाली के लिए जाना जाता था, आज प्रदूषण के एक खतरनाक जाल में फंसती नजर आ रही है। हाल ही में जारी IQAir की वैश्विक रिपोर्ट ने शहरवासियों और प्रशासन की नींद उड़ा दी है। इस रिपोर्ट के अनुसार, लखनऊ अब दुनिया का 58वां सबसे प्रदूषित शहर बन गया है, जो पर्यावरण के प्रति हमारी लापरवाही का एक बड़ा चेतावनी संकेत है।
रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़े
IQAir की यह रिपोर्ट दुनिया भर के 143 देशों के 9,446 शहरों के आंकड़ों पर आधारित है, जिसे 40 हजार से ज्यादा मॉनिटरिंग स्टेशनों के डेटा का विश्लेषण कर तैयार किया गया है। रिपोर्ट के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं: लखनऊ की वैश्विक स्थिति: दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में लखनऊ 58वें स्थान पर है।भारत में रैंकिंग: देश के 259 प्रमुख शहरों में लखनऊ की रैंक 34वीं है।उत्तर प्रदेश का हाल: यूपी के कुल 11 शहर इस वैश्विक प्रदूषण सूची में शामिल हैं, जो राज्य के लिए एक गंभीर चुनौती है।भारत की स्थिति: दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में भारत के 64 शहर शामिल हैं, जो दर्शाते हैं कि दक्षिण एशिया में प्रदूषण का स्तर किस कदर बढ़ रहा है।
ग्लोबल क्लाइमेट सोसाइटी की चिंता और अपील
तेजी से बढ़ते प्रदूषण और इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए ग्लोबल क्लाइमेट सोसाइटी (Global Climate Society) ने गहरी चिंता व्यक्त की है। संस्था के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश कुमार ने कहा कि सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयास सराहनीय हो सकते हैं, लेकिन उन्हें और अधिक गंभीरता और गति के साथ आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।यह रिपोर्ट केवल आंकड़े नहीं है, बल्कि हमारे पर्यावरण की बिगड़ती सेहत का ‘एक्स-रे’ है। इससे पता चलता है कि हम प्रदूषण की किस गंभीर दिशा में बढ़ रहे हैं। अब समय आ गया है कि हम केवल चर्चा न करें, बल्कि धरातल पर कड़े कदम उठाएं।”

ग्लोबल क्लाइमेट सोसाइटी ने आम जनता से भी अपील की है कि वे अपनी सहभागिता बढ़ाएं। पेड़ लगाना, कूड़ा न जलाना और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करना अब विकल्प नहीं, बल्कि जरूरत बन गया है।
क्यों बढ़ रहा है लखनऊ में प्रदूषण?
विशेषज्ञों के अनुसार, लखनऊ में प्रदूषण बढ़ने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:अनियंत्रित निर्माण कार्य: शहर में चल रहे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से उड़ने वाली धूल (Dust Pollution)।वाहनों का दबाव: शहर की सड़कों पर तेजी से बढ़ती गाड़ियों की संख्या और पुराना ट्रांसपोर्ट सिस्टम।कचरा प्रबंधन: कचरे को खुले में जलाने और प्लास्टिक के बढ़ते उपयोग से हवा की गुणवत्ता (AQI) खराब हो रही है।ग्रीन कवर की कमी: कंक्रीट के जंगलों के विस्तार के कारण शहर के फेफड़े यानी ‘ग्रीन बेल्ट’ कम हो रहे हैं।
क्या हैं स्वास्थ्य पर इसके प्रभाव?
हवा में मौजूद हानिकारक तत्व, विशेषकर PM 2.5 का स्तर बढ़ने से फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों, अस्थमा, हृदय रोग और बच्चों के मानसिक विकास पर बुरा असर पड़ रहा है। लखनऊ के अस्पतालों में सांस के मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।
फिलहाल स्थिति चिंताजनक है, लेकिन सुधार की गुंजाइश अभी भी बाकी है। सरकार को जहां औद्योगिक उत्सर्जन और निर्माण कार्यों पर कड़े नियम लागू करने होंगे, वहीं आम जनता को भी अपनी जीवनशैली में बदलाव करना होगा।
