देहरादून नारी निकेतन में संवासिनी की आत्महत्या के बाद एक्शन में मंत्री रेखा आर्या, प्रदेशभर में नियुक्त होंगे मनोचिकित्सक
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देहरादून नारी निकेतन में संवासिनी की आत्महत्या के बाद एक्शन में मंत्री रेखा आर्या, प्रदेशभर में नियुक्त होंगे मनोचिकित्सक
देहरादून (उत्तराखंड): राजधानी देहरादून के केदारपुर स्थित नारी निकेतन में एक संवासिनी द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटना ने शासन-प्रशासन को हिलाकर रख दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश की महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने स्वयं मोर्चा संभाला है। सोमवार को उन्होंने घटनास्थल का औचक निरीक्षण किया और अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए।
घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण और पूछताछ
मंत्री रेखा आर्या ने केदारपुर स्थित नारी निकेतन पहुंचकर उस स्थान का निरीक्षण किया जहाँ संवासिनी का शव मिला था। इस दौरान उन्होंने नारी निकेतन की अधीक्षिका, वहां तैनात कर्मचारियों और सबसे पहले शव बरामद करने वाली महिला चौकीदार से घंटों पूछताछ की।
निरीक्षण के मुख्य बिंदु:सीसीटीवी कवरेज: मंत्री ने पूरे परिसर को सीसीटीवी कैमरों से आच्छादित करने और उनकी लाइव मॉनिटरिंग के निर्देश दिए।जवाबदेही: उन्होंने स्पष्ट किया कि रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रखा जाए ताकि किसी भी संदेहास्पद गतिविधि की जांच हो सके।
बड़ी पहल: नारी निकेतनों में होगी मनोचिकित्सकों की तैनाती
निरीक्षण के दौरान मंत्री ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए विभागीय सचिव और निदेशक को महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मानसिक रूप से अस्वस्थ संवासिनियों की समुचित देखभाल के लिए प्रदेश के सभी नारी निकेतनों में स्थायी मनोचिकित्सकों (Psychiatrists) की नियुक्ति की जाएगी।”नारी निकेतन में रहने वाली संवासिनियों के मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल हमारी प्राथमिकता है। मैंने विभागीय सचिव को निर्देश दिए हैं कि इस संबंध में एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर आगामी कैबिनेट बैठक में रखा जाए।” – रेखा आर्या, कैबिनेट मंत्री
दोषियों पर गिरेगी गाज: एसएसपी को निर्देश
मंत्री ने मौके से ही एसएसपी देहरादून को फोन कर पुलिस जांच की वर्तमान स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने जांच में तेजी लाने और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर निष्पक्ष कार्रवाई करने को कहा। रेखा आर्या ने चेतावनी दी कि यदि जांच में नारी निकेतन का कोई भी अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया गया, तो उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय
मंत्री ने निर्देशित किया कि संवासिनियों के उपचार के लिए स्वास्थ्य विभाग को सीधे तौर पर नारी निकेतन के साथ जोड़ा जाए। इसके तहत नियमित मेडिकल चेकअप और काउंसलिंग सत्र आयोजित किए जाएंगे ताकि भविष्य में अवसाद या अन्य मानसिक तनाव के कारण ऐसी आत्मघाती घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
क्यों जरूरी है यह कदम?
नारी निकेतन जैसी संस्थाओं में रहने वाली महिलाएं अक्सर गंभीर मानसिक आघात (Trauma) से गुजर चुकी होती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल छत और भोजन देना पर्याप्त नहीं है; उनकी मानसिक स्थिति को समझने के लिए विशेषज्ञों की उपस्थिति अनिवार्य है। रेखा आर्या का यह निर्णय अगर धरातल पर उतरता है, तो यह उत्तराखंड की समाज कल्याण व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव लाएगा।
