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​UP School Chalo Abhiyan 2026: ‘आधी रोटी खाएंगे, स्कूल जरूर जाएंगे’, सीएम योगी ने किया स्कूल चलो अभियान का आगाज

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UP School Chalo Abhiyan 2026: ‘आधी रोटी खाएंगे, स्कूल जरूर जाएंगे’, सीएम योगी ने किया स्कूल चलो अभियान का आगाज

लखनऊ | उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा को मजबूत करने और शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज राजधानी लखनऊ से ‘स्कूल चलो अभियान 2026’ के प्रथम चरण का भव्य शुभारंभ किया। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का कोई भी बच्चा शिक्षा के अधिकार से वंचित न रहे।

दो चरणों में चलेगा महाभियान

​शिक्षा विभाग द्वारा जारी कार्ययोजना के अनुसार, इस साल यह अभियान दो विशेष चरणों में संचालित किया जाएगा:​प्रथम चरण: 1 अप्रैल से 15 अप्रैल तक।​द्वितीय चरण: 1 जुलाई से 15 जुलाई तक।

डोर-टू-डोर सर्वे और नामांकन की रणनीति

​मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश हैं कि इस अभियान को केवल कागजों तक सीमित न रखकर धरातल पर उतारा जाए। इसके लिए शिक्षकों और शिक्षा मित्रों की विशेष टीमें बनाई गई हैं।​सर्वे: अध्यापक अपने विद्यालय के आसपास के क्षेत्रों में घर-घर जाकर परिवारों का सर्वे करेंगे।​चिन्हीकरण: सर्वे के दौरान ऐसे बच्चों की सूची तैयार की जाएगी जो स्कूल जाने की उम्र के हैं लेकिन अभी भी बाहर हैं।​दस्तावेजों में ढील: सरकार ने प्रवेश प्रक्रिया को बेहद सरल बना दिया है। यदि किसी बच्चे के पास जन्म प्रमाण पत्र या आधार कार्ड नहीं है, तो अभिभावकों द्वारा दी गई मौखिक या लिखित सूचना के आधार पर ही स्कूल में तुरंत प्रवेश दिया जाएगा।

आयु के अनुसार नामांकन का खाका

​अभियान के तहत अलग-अलग आयु वर्ग के लिए लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं:​आंगनबाड़ी/बाल वाटिका: 3 वर्ष की आयु पूर्ण करने वाले सभी बच्चों का नामांकन।कक्षा 1: 6 वर्ष की आयु पूर्ण करने वाले समस्त बच्चों का प्रवेश।​ड्रॉप आउट बच्चों पर फोकस: 7 से 14 वर्ष के ऐसे बच्चे जो बीच में ही पढ़ाई छोड़ चुके हैं, उन्हें चिह्नित कर दोबारा मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा।​शत-प्रतिशत ट्रांजिशन: सरकार का विशेष जोर इस बात पर है कि जो बच्चे कक्षा 5, 8 और 10 पास कर चुके हैं, उनका अगली बड़ी कक्षा (6, 9 और 11) में अनिवार्य रूप से दाखिला हो।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिशा-निर्देश

​मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अभियान की शुरुआत करते हुए कहा कि, “शिक्षा वह नींव है जिस पर समृद्ध प्रदेश का निर्माण होता है। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि एक भी बच्चा स्कूल से बाहर न रहे।” उन्होंने ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ के तहत स्कूलों की बदलती तस्वीर का जिक्र करते हुए कहा कि अब सरकारी स्कूल निजी स्कूलों को टक्कर दे रहे हैं। सीएम ने ‘स्वच्छ पेयजल’, ‘स्मार्ट क्लास’ और ‘निःशुल्क यूनिफॉर्म’ जैसी सुविधाओं को हर बच्चे तक पहुंचाने का निर्देश दिया।

शिक्षा मंत्री का बयान

​प्रदेश के शिक्षा मंत्री ने कहा कि इस वर्ष हमने तकनीक और पारदर्शिता पर जोर दिया है। उन्होंने बताया कि शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अभिभावकों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करें और उन्हें सरकारी स्कूलों में मिलने वाली सुविधाओं (डीबीटी के माध्यम से पैसे, मिड-डे मील आदि) के बारे में विस्तार से जानकारी दें।

बजट और वित्तीय व्यवस्था

​अभियान को गति देने के लिए सरकार ने विशेष बजट आवंटित किया है:​जनपद स्तर: प्रत्येक जिले को गतिविधियों के आयोजन हेतु ₹5 लाख।​ब्लॉक स्तर: प्रत्येक विकासखंड को ₹10,000।​विद्यालय स्तर: प्रत्येक स्कूल को ₹2,500 की तत्काल धनराशि उपलब्ध कराई गई है।

लक्ष्य और प्रदेश की स्थिति

​उत्तर प्रदेश में लगभग 1.32 लाख से अधिक परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। सरकार का लक्ष्य इस वर्ष लाखों नए बच्चों को स्कूल की चौखट तक लाना है, ताकि प्रदेश की साक्षरता दर और ‘ड्रॉप आउट’ दर में ऐतिहासिक सुधार देखा जा सके।

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