किसानों के द्वार तक सरकार: अशोक यादव ने उत्तराखंड में संवाद और सहयोग की रखी रूपरेखा
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किसानों के द्वार तक सरकार: अशोक यादव ने उत्तराखंड में संवाद और सहयोग की रखी रूपरेखा
देहरादून, 09 अप्रैल 2026: राष्ट्रीय लोकदल के कद्दावर नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व पर्यटन एवं राजस्व मंत्री अशोक यादव इन दिनों उत्तराखंड के प्रवास पर हैं। देहरादून में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका यह दौरा विशुद्ध रूप से किसानों और सरकार के बीच एक मजबूत सेतु बनाने के उद्देश्य से है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी के निर्देशों पर वे उत्तराखंड में किसानों की आवाज को और अधिक प्रभावी बनाने आए हैं।
1. ‘किसान अदालत’ और पुराने रिश्तों का स्मरण
अशोक यादव ने उत्तराखंड से अपने भावनात्मक और ऐतिहासिक संबंधों को याद करते हुए बताया कि अविभाजित उत्तर प्रदेश के समय उन्होंने “किसान अदालत” जैसी क्रांतिकारी पहल की शुरुआत पुरानी टिहरी से की थी।उद्देश्य: प्रशासन को सीधे किसानों के दरवाजे तक ले जाना ताकि उनकी समस्याओं का मौके पर निस्तारण हो सके।प्रभाव: इस मॉडल को न केवल राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली, बल्कि सुदूर दक्षिण के राज्य केरल ने भी इस व्यवस्था को अपने यहाँ लागू किया।तकनीकी सुधार: उन्होंने याद दिलाया कि उत्तर प्रदेश में भू-लेखों (खतौनी) के कंप्यूटरीकरण की शुरुआत उन्हीं के कार्यकाल में हुई थी, जिसका लाभ आज उत्तराखंड के करोड़ों लोग भी उठा रहे हैं।
2. पलायन रोकने का एकमात्र मार्ग: कृषि विकास
पहाड़ की सबसे बड़ी समस्या ‘पलायन’ पर चिंता व्यक्त करते हुए अशोक यादव ने कहा कि जब तक गांवों में कृषि आधारित स्थायी आय सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक पलायन को थामना एक चुनौती बना रहेगा।चुनौती: उन्होंने पहाड़ों में चकबंदी की जटिलता का उल्लेख किया और कहा कि मैदानी क्षेत्रों की तुलना में पर्वतीय क्षेत्रों में इसे लागू करना कठिन है, लेकिन संसाधनों के सही प्रबंधन से इसे संभव बनाया जा सकता है।दृष्टिकोण: यदि किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी, तो राज्य का समग्र विकास स्वतः ही गति पकड़ लेगा।
3. मुख्यमंत्री धामी की सराहना
उत्तराखंड के नेतृत्व पर चर्चा करते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि सीएम धामी एक बेहद सामान्य पृष्ठभूमि से आते हैं, यही कारण है कि वे एक सहज और सरल नेता के रूप में जनता के बीच लोकप्रिय हैं। उनके व्यक्तित्व की यही सादगी राज्य के विकास में सहायक सिद्ध हो रही है।
4. विपक्ष पर कड़ा प्रहार और 2027 का पूर्वानुमान
राजनीतिक सवालों का जवाब देते हुए अशोक यादव ने विपक्षी दलों, विशेषकर सपा और बसपा पर तीखा हमला बोला।परिवारवाद बनाम संस्कार: उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव और मायावती की पार्टियाँ ‘परिवार की पार्टियाँ’ हैं, न कि ‘संस्कारों की’।भविष्यवाणी: उन्होंने दावा किया कि 2027 के चुनाव में इन दलों का कोई वजूद नहीं रहेगा। जनता इन्हें पूरी तरह नकार देगी।पुनः सत्ता का संकल्प: अशोक यादव ने विश्वास जताया कि 2027 के आम चुनाव में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड, दोनों ही राज्यों में वर्तमान सरकारें अपने जनहितैषी कार्यों के दम पर पुनः सत्ता में वापसी करेंगी।
अशोक यादव का यह दौरा केवल एक राजनीतिक प्रवास नहीं, बल्कि उत्तराखंड में कृषि आधारित विकास को नई दिशा देने की एक गंभीर पहल माना जा रहा है। उनके अनुभव और किसानों के बीच उनकी पकड़ आने वाले समय में राज्य की ग्रामीण राजनीति में नए समीकरण पैदा कर सकती है।
प्रस्तुति: ब्यूरो डेस्क
