Ambedkar Jayanti 2026: बहादुरगंज में उमड़ा जनसैलाब, धूमधाम से निकली बाबा साहेब की भव्य झांकी
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Ambedkar Jayanti 2026: बहादुरगंज में उमड़ा जनसैलाब, धूमधाम से निकली बाबा साहेब की भव्य झांकी
बहादुरगंज (गाजीपुर)। भारतीय संविधान के शिल्पकार और भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती आज गाजीपुर के बहादुरगंज सहित ग्रामीण क्षेत्रों में अभूतपूर्व उत्साह और धूमधाम के साथ मनाई गई। इस अवसर पर नगर की सड़कों पर नीले सैलाब का नजारा देखने को मिला, जहाँ हजारों की संख्या में महिलाओं, पुरुषों और युवाओं ने बाबा साहेब के जयघोष के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली। नगर के विभिन्न हिस्सों से आई झांकियों ने उत्सव के माहौल को और भी गरिमामय बना दिया।
बाबा साहेब की जयंती पर श्रद्धा और उल्लास का संगम गाजीपुर के हर कोने में साफ नजर आया।

नगर क्षेत्र के भ्रमण के दौरान नगया शिउरा और फरीदनपुर से आए लोगों का उत्साह देखते ही बनता था। सैकड़ों की संख्या में शामिल जनसमूह ने बाबा साहेब की प्रतिमा और उनके जीवन दर्शन को दर्शाती झांकियों के साथ पूरे नगर में भ्रमण किया। इसके अलावा ग्राम सभा बांका, सातनपुर, पुरानीगंज, सलामतपुर, सनेहुवा, देवली और रामगढ़ जैसे ग्रामीण अंचलों में भी जयंती समारोह आयोजित किए गए। गांधी मेमोरियल इंटर कॉलेज स्थित डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के लिए सुबह से ही लोगों का तांता लगा रहा।
समाज के हर वर्ग की भागीदारी ने अंबेडकर जयंती को एक व्यापक जन-उत्सव के रूप में तब्दील कर दिया।
डॉ. भीमराव अंबेडकर का जीवन संघर्ष और चुनौतियों की एक महागाथा है। 14 अप्रैल 1891 को जन्मे बाबा साहेब ने उस दौर में शिक्षा प्राप्त की, जब दलितों और वंचितों के लिए स्कूल की दहलीज लांघना भी नामुमकिन था। उन्होंने छुआछूत और सामाजिक भेदभाव जैसी कुरीतियों का न केवल सामना किया, बल्कि अपनी विद्वत्ता के दम पर उन्हें चुनौती भी दी। कोलंबिया विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से उच्च शिक्षा प्राप्त कर वे आधुनिक भारत के सबसे शिक्षित नायकों में से एक बने।
कठिन संघर्षों के बीच बाबा साहेब की अटूट संकल्प शक्ति आज भी करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
आजाद भारत की पहली अंतरिम सरकार में बाबा साहेब ने कानून मंत्री के रूप में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। उन्होंने न केवल दुनिया के सबसे बड़े लिखित संविधान का निर्माण किया, बल्कि महिलाओं और श्रमिकों के अधिकारों के लिए भी क्रांतिकारी कानून बनाए। हिंदू कोड बिल के माध्यम से उन्होंने महिलाओं को संपत्ति और स्वावलंबन का अधिकार दिलाने की पुरजोर वकालत की। उनके लिए लोकतंत्र का अर्थ केवल वोट देना नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक समानता प्राप्त करना था।
देश के पहले कानून मंत्री के रूप में अंबेडकर जी ने आधुनिक और न्यायपूर्ण भारत की सुदृढ़ आधारशिला रखी।
बाबा साहेब ने अपने समाज को सदैव ‘शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो’ का कालजयी संदेश दिया। उनका मानना था कि शिक्षा ही वह एकमात्र अस्त्र है, जिससे गुलामी की बेड़ियाँ काटी जा सकती हैं। आज गाजीपुर के विभिन्न कार्यक्रमों में वक्ताओं ने उनके इसी संदेश को दोहराते हुए समाज में शिक्षा के प्रसार और आपसी भाईचारे पर बल दिया। जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित गोष्ठियों में युवाओं को बाबा साहेब के पदचिह्नों पर चलकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का संकल्प दिलाया गया।
शिक्षित और संगठित समाज का उनका स्वप्न आज भी सामाजिक न्याय की लड़ाई का मुख्य आधार स्तंभ है।
बहादुरगंज में देर शाम तक सांस्कृतिक कार्यक्रमों और विचार गोष्ठियों का दौर चलता रहा। सुरक्षा की दृष्टि से स्थानीय प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद नजर आया। बाबा साहेब की जयंती ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि उनके विचार समय की सीमाओं से परे हैं और आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने दशकों पहले थे। लोगों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर और बाबा साहेब के विचारों को आत्मसात करने का प्रण लेकर इस उत्सव का समापन किया।
बाबा साहेब के विचार आज भी समतामूलक समाज के निर्माण के लिए सबसे प्रभावी मार्गदर्शक हैं।
धूमधाम के साथ मनाई गई डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर की जयंती
बहादुरगंज गाज़ीपुर۔ डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की जयंती दिवस पर नगर व ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े ही धूमधाम के साथ मनाई गई। जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं एवं पुरुषों ने हिस्सा लिया और पूरे नगर में गाजे बाजे और डीजे के साथ भव्य झांकी निकाली गई। पुरानीगंज में सर्व प्रथम बाबा जी के रथ का फीता स्थानीय पुलिस चौकी प्रभारी बहादुरगंज पुष्पेषचंद दुबे ने फीता काटकर और बाबा जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करके एवं केक काटकर किया। तत्पश्चात स्थानीय लोगों में से महिलाओं एवं पुरुषों ने बारी बारी से पुष्पांजलि अर्पित करके किया।
वहीं पर सौहार्द साथी जफर अकील ने उपस्थित जन समूह को संविधान की प्रस्तावना का पाठ का वाचन किया जिसे सभी लोगों ने दोहराया तथा बाबा साहब के बताए हुए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया गया और कहा गया कि यही बाबा साहब के सच्ची श्रद्धांजलि होगी कि हम लोग उनके बताए हुए मार्ग पर चलने की कोशिश करें। तत्पश्चात यह जुलूस रवाना हुआ और नगर के पुरानीगंज से चलकर डकीनगंज, छावनी, पठान टोली, नगर पंचायत,पुलिस चौकी, पुरानी बाजार,दक्खिन मोहल्ला होते हुए सदर बाजार, गन फैक्टरी, नई सब्जी मंडी होते हुए यूनियन बैंक ऑफ इंडिया बस स्टैण्ड चंडिका स्थान,स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से चलकर अंबेडकर तिराहे जाकर एक सभा के रूप में परिवर्तित हो गया।
जिसमें युवाओं एवं युवतियों तथा महिलाओं ने जमकर थिरके लगाए और रास्ते भर बाबा साहब अमर रहें, बाबा तेरा मिशन अधूरा हम सब मिलकर करेंगे पूरा, हम बहुजन हमार बाबा रतनवा जैसे गगन भेदी नारे लगाए एवं डीजे की धुन पर थिरकते हुए अपने अपने स्थानों पुरानीगंज ,रसूलपुर तथा सिउरा से निकल कर गांधी मेमोरियल इंटर कॉलेज बहादुरगंज तिराहे के पास स्थित अम्बेडकर जी की प्रतिमा पर जाकर एक सभा के रूप में परिवर्तित हो गया जिसमें कि वक्ताओं ने बाबा जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उनके मूल्यों पर चलने का संकल्प लिया।
वहीं पर व्यापार मण्डल बहादुरगंज द्वारा स्टाल लगाकर लोगों को जल जलपान कराया गया। इस अवसर पर जवाहिर लाल ग्राम प्रधान रसूलपुर, सन्तोष कुमार, केशव प्रसाद, राम बड़ाई मास्टर, नरसिंह कुमार, महेंद्र कुमार, लोचन राम, नरसिंह भारती, शक्ति जायसवाल, जफर अकील, राजेश वर्मा, जगजीत बर्नवाल, संतोष बर्नवाल, धनंजय कुमार, सत्यम सोनकर, नकुल मद्धेशिया,गुड्डू कुमार इत्यादि लोग उपस्थित रहे।
संवाददाता: अकील अहमद (बहादुरगंज, गाजीपुर, उत्तर प्रदेश)
