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बदरीनाथ धाम का ‘वेस्ट टू वेल्थ’ मॉडल: स्वच्छता के साथ समृद्धि की नई मिसाल

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बदरीनाथ धाम का ‘वेस्ट टू वेल्थ’ मॉडल: स्वच्छता के साथ समृद्धि की नई मिसाल

​सोहन सिंह चमोली (उत्तराखंड)। देवभूमि के प्रमुख धामों में से एक, भगवान बदरीविशाल की नगरी न केवल आध्यात्मिक शांति का केंद्र बन रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक आत्मनिर्भरता का भी एक उत्कृष्ट उदाहरण पेश कर रही है। चमोली जिला प्रशासन और नगर पंचायत बदरीनाथ ने ‘प्लास्टिक कचरे’ को आय के साधन में बदलकर एक ऐसा मॉडल विकसित किया है, जिसकी चर्चा अब पूरे प्रदेश में हो रही है।

एक सप्ताह में 84 हजार की रिकॉर्ड आय

​चारधाम यात्रा 2026 के सफल संचालन के बीच, नगर पंचायत बदरीनाथ ने कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यात्रा शुरू होने के मात्र एक सप्ताह के भीतर धाम से 8 टन अजैविक (प्लास्टिक) कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया गया। इस प्रक्रिया से नगर पंचायत को 84 हजार रुपये से अधिक की आय प्राप्त हुई है। यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बीते वर्ष कुल 230 टन कचरे का प्रबंधन किया गया था, और इस बार शुरुआती रुझान ही भविष्य की बड़ी सफलता की ओर इशारा कर रहे हैं।

वैज्ञानिक निस्तारण: जैविक से खाद, प्लास्टिक से ब्लॉक

​धाम की स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए नगर पंचायत ने त्रि-स्तरीय रणनीति अपनाई है:​जैविक कचरा प्रबंधन: पर्यावरण मित्रों के माध्यम से एकत्रित जैविक कचरे को अलग कर उससे उच्च गुणवत्ता वाली खाद तैयार की जा रही है।​प्लास्टिक कचरे का कायाकल्प: एकत्र किए गए प्लास्टिक और अजैविक कचरे को सीधे फेंकने के बजाय उसे आधुनिक मशीनों के जरिए ‘ब्लॉक’ (कंप्रेस्ड ब्रिक्स) में बदला जा रहा है।​विपणन और आय: इन तैयार ब्लॉक्स को औद्योगिक इकाइयों और पुनर्चक्रण (Recycling) केंद्रों को बेचा जा रहा है, जिससे पंचायत के कोष में निरंतर वृद्धि हो रही है।

स्वच्छता के साथ संसाधनों का विकास

​नगर पंचायत द्वारा अर्जित इस आय का उपयोग धाम के बुनियादी ढांचे को सुधारने में किया जा रहा है। अर्जित धनराशि से पर्यावरण मित्रों के लिए बेहतर सुविधाएं, नए स्वच्छता उपकरणों की खरीद और शौचालयों के रखरखाव जैसे आवश्यक कार्य किए जा रहे हैं। नगर पंचायत बदरीनाथ न केवल पैदल मार्गों और सड़कों की सफाई पर ध्यान दे रही है, बल्कि वैज्ञानिक समाधानों के जरिए हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने का कार्य भी कर रही है।

प्रेरणा बना बदरीनाथ मॉडल

​बदरीनाथ का यह स्वच्छता मॉडल अब जनपद चमोली की अन्य नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के लिए मार्गदर्शक बन गया है। शासन-प्रशासन का मानना है कि यदि धार्मिक स्थलों पर कचरे को केवल ‘गंदगी’ न मानकर उसे ‘संसाधन’ के रूप में देखा जाए, तो इससे स्थानीय निकायों की वित्तीय स्थिति मजबूत हो सकती है और पर्यावरण को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा।

प्रशासन की अपील

​जिला प्रशासन और सूचना विभाग ने तीर्थयात्रियों से भी अपील की है कि वे धाम की गरिमा और स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग करें। कचरे को डस्टबिन में ही डालें और जैविक-अजैविक कूड़े को अलग करने में पर्यावरण मित्रों की सहायता करें।

बदरीनाथ धाम की यह पहल प्रधानमंत्री के ‘स्वच्छ भारत अभियान’ और उत्तराखंड सरकार के ‘स्वच्छ उत्तराखंड’ संकल्प को धरातल पर उतार रही है। यह मॉडल साबित करता है कि इच्छाशक्ति हो तो कूड़े के ढेर को भी सोने की खान में बदला जा सकता है।

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