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नई दिल्ली में संस्कृत शिक्षा के वैश्विक विस्तार और तकनीकी आधुनिकीकरण पर महामंथन: उत्तराखंड शासन की बड़ी पहल

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नई दिल्ली में संस्कृत शिक्षा के वैश्विक विस्तार और तकनीकी आधुनिकीकरण पर महामंथन: उत्तराखंड शासन की बड़ी पहल

नई दिल्ली/देहरादून, 6 जून।

उत्तराखंड में संस्कृत शिक्षा को वैश्विक पटल पर स्थापित करने, भारतीय ज्ञान परंपरा का प्रसार करने और इसके डिजिटल आधुनिकीकरण को लेकर नई दिल्ली में तीन दिवसीय उच्च स्तरीय बैठकों का दौर संपन्न हुआ। उत्तराखंड शासन के सचिव (संस्कृत शिक्षा, जनगणना एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन) दीपक कुमार के नेतृत्व में 1 से 3 जून 2026 के मध्य आयोजित इन बैठकों में भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, केंद्रीय संस्थानों और विश्वविद्यालयों के शीर्ष अधिकारियों के साथ कई दूरगामी और महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

​इस उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल में सचिव दीपक कुमार के साथ उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. प्रकाश चंद्र पंत, डॉ. सुमन प्रसाद भट्ट तथा दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. सुनील जोशी भी शामिल रहे।

​वैश्विक स्तर पर खुलेंगे रोजगार के द्वार: ICCR और विदेश मंत्रालय का सहयोग

​भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) की महानिदेशक के साथ हुई बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया कि उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार द्वारा भारतीय संस्कृति, कर्मकांड, ज्योतिष, जन्मपत्रिका निर्माण और भारतीय ज्ञान परंपरा जैसे विषयों पर आधारित विशेष त्रैमासिक (3 महीने) और षाण्मासिक (6 महीने) प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम तैयार किए जाएंगे।​ऑनलाइन संचालन: इन सभी पाठ्यक्रमों को ऑनलाइन माध्यम से संचालित किया जाएगा।​वैश्विक प्रचार-प्रसार: ICCR इन पाठ्यक्रमों के वैश्विक प्रचार-प्रसार और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नामांकन बढ़ाने में पूरा सहयोग करेगा, जिससे देश-विदेश में संस्कृत के क्षेत्र में रोजगार की नई संभावनाओं को बल मिलेगा।​विश्व ध्यान दिवस: विदेश मंत्रालय के ICCR डिवीजन के सहयोग से आगामी 20-21 दिसम्बर 2026 को हरिद्वार संस्कृत विश्वविद्यालय में ‘विश्व ध्यान दिवस’ का भव्य आयोजन किया जाएगा।

​इसके साथ ही विदेश मंत्रालय के साथ हुई बैठक में संस्कृत के विद्वानों और शिक्षकों को विदेशों में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने तथा संस्कृत की वैश्विक महत्व की कालजयी पुस्तकों का विभिन्न विदेशी भाषाओं में अनुवाद करने पर भी विस्तृत सहमति बनी।

​कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डिजिटल शिक्षा पर जोर

​आधुनिक तकनीक के साथ संस्कृत के समन्वय को लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अधिकारियों के साथ गहन विचार-विमर्श हुआ। बैठक में संस्कृत आधारित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) परियोजनाओं को ‘भारत AI मिशन’ के अंतर्गत प्रस्तुत करने का निर्णय लिया गया। साथ ही संस्कृत शिक्षकों और विद्यार्थियों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करने पर चर्चा हुई। उधर, शिक्षा मंत्रालय के साथ हुई बैठक में उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा परिषद, देहरादून के संपूर्ण प्रशासनिक एवं शैक्षणिक ढांचे को पूरी तरह से ‘डिजिटाइज’ करने के विषय पर सकारात्मक बातचीत हुई।

​संस्कृति मंत्रालय को शोध परियोजनाएं और ‘संस्कृत ग्राम’ की परिकल्पना

​केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के समक्ष उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय की ओर से राजमाता अहिल्याबाई होल्कर के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर आधारित एक महत्वपूर्ण शोध-परियोजना आर्थिक सहायता हेतु प्रस्तुत की गई। इसके अतिरिक्त, उत्तराखंड के संस्कृत के मूर्धन्य आचार्य पंडित दिनेश जोशी जी की जन्म शताब्दी के अवसर पर संस्कृति मंत्रालय के वित्तीय सहयोग से हरिद्वार में एक ‘विश्वव्यापी गोष्ठी’ का आयोजन किया जाएगा।

केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी के साथ हुई बैठक में उत्तराखंड में संस्कृत शिक्षा के विस्तार, पुस्तकालयों के आधुनिकीकरण और प्रदेश के विभिन्न जनपदों में नए संस्कृत शिक्षण केंद्र स्थापित करने पर सहमति बनी।​पायलट प्रोजेक्ट: बैठक में ‘संस्कृत ग्राम’ योजना को और सुदृढ़ करने के साथ-साथ राज्य के किसी एक जिले को प्रायोगिक (पायलट) आधार पर पूरी तरह से ‘संस्कृत आच्छादित जनपद’ के रूप में विकसित करने का अनूठा सुझाव दिया गया। इसके अलावा, छात्रों को मिलने वाली छात्रवृत्तियों और शोधवृत्तियों पर भी चर्चा की गई।

 

​दिल्ली विधानसभा उपाध्यक्ष से शिष्टाचार भेंट

​दौरे के दौरान सचिव दीपक कुमार ने दिल्ली विधानसभा के उपाध्यक्ष  मोहन सिंह बिष्ट से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान उत्तराखंड और दिल्ली के मध्य संस्कृत शिक्षा के प्रचार-प्रसार को लेकर विस्तृत विमर्श हुआ। उपाध्यक्ष महोदय ने उत्तराखंड में संस्कृत के विकास के लिए हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया।

​बैठकों के सफल समापन के बाद, सचिव दीपक कुमार ने सभी संबंधित अधिकारियों और उत्तराखंड के संस्कृत संस्थानों को इन बैठकों में लिए गए निर्णयों पर तत्काल प्रभावी कार्यवाही (Action) सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि धरातल पर संस्कृत शिक्षा के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत हो सके।

– ब्यूरो रिपोर्ट, दक्षिण एशिया 24×7 / न्यूज डेस्क

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