आम जनता पर महंगाई की चौतरफा मार: आज से ₹29 महंगा हुआ घरेलू एलपीजी सिलिंडर, दिल्ली में दाम ₹942 के पार
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आम जनता पर महंगाई की चौतरफा मार: आज से ₹29 महंगा हुआ घरेलू एलपीजी सिलिंडर, दिल्ली में दाम ₹942 के पार
नई दिल्ली।
लगातार बढ़ती महंगाई की मार झेल रही आम जनता की जेब पर एक बार फिर बड़ा बोझ आ पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच, घरेलू तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने आम उपभोक्ताओं को एक और तगड़ा झटका दिया है। आज से बिना सबसिडी वाले घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) सिलिंडर की कीमतों में ₹29 की भारी बढ़ोतरी कर दी गई है। इस ताजा बढ़ोतरी के बाद देश की राजधानी दिल्ली समेत तमाम राज्यों में रसोई गैस के दाम अब आसमान छूने लगे हैं, जिससे आम आदमी के घर का बजट पूरी तरह से डगमगा गया है।
दिल्ली और अन्य महानगरों में नए दाम
कीमतों में हुए इस नए इजाफे के बाद देश की राजधानी दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलिंडर की कीमत ₹913 से बढ़कर अब ₹942 हो गई है। केवल दिल्ली ही नहीं, बल्कि देश के अन्य प्रमुख महानगरों और राज्यों में भी मालभाड़े (लोकल ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट) और स्थानीय टैक्स के आधार पर कीमतों में इसी अनुपात में वृद्धि देखी गई
|
महानगर |
पुराना दाम (₹) |
नया दाम (₹) |
कुल बढ़ोतरी (₹) |
|---|---|---|---|
|
दिल्ली |
913 |
942 |
29 |
|
मुंबई |
889.50 |
918.50 |
29 |
|
कोलकाता |
939 |
968 |
29 |
|
चेन्नई |
929 |
958 |
29 |
तीन महीने में दूसरा बड़ा झटका
यह पहली बार नहीं है जब उपभोक्ताओं को इस तरह का झटका लगा है। इससे पहले भी 7 मार्च को तेल कंपनियों ने घरेलू सिलिंडर की कीमतों में एकमुश्त ₹60 की भारी बढ़ोतरी की थी। मात्र कुछ ही महीनों के भीतर घरेलू गैस सिलिंडर के दामों में लगभग ₹89 का कुल इजाफा हो चुका है। साल की दूसरी छमाही की शुरुआत में ही रसोई गैस का इस कदर महंगा होना मध्यम और निम्न-मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए किसी बड़े वित्तीय संकट से कम नहीं है। लगातार होती इस बढ़ोतरी ने देश में एक बार फिर ‘महंगे ईंधन’ की बहस को हवा दे दी है।
आम जनता के बजट पर चौतरफा असर
एक तरफ जहाँ दैनिक उपभोग की वस्तुएं, दालें, सब्जियां और दूध पहले से ही महंगे चल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ रसोई गैस के दामों में बढ़ोतरी ने आग में घी डालने का काम किया है।गृहणियों का दर्द:
दिल्ली की रहने वाली एक गृहणी ने अपनी चिंता साझा करते हुए कहा, “कमाई का एक बड़ा हिस्सा अब सिर्फ रसोई चलाने और बिलों का भुगतान करने में ही चला जाता है। हर महीने सिलिंडर के दाम बढ़ जाते हैं, लेकिन हमारी आय उस अनुपात में नहीं बढ़ रही है। समझ नहीं आता कि महीने का बजट कैसे संतुलित करें।”
विशेषज्ञों का मानना है कि एलपीजी सिलिंडर महंगा होने का सीधा असर केवल रसोई तक ही सीमित नहीं रहता। यह बाजार में एक मनोवैज्ञानिक दबाव बनाता है, जिससे लॉजिस्टिक्स, होटल, रेस्तरां और टिफिन सेवाओं की लागत भी बढ़ जाती है। अंततः इसका पूरा बोझ घूम-फिरकर आम उपभोक्ता की जेब पर ही पड़ता है।
कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे के मुख्य कारण
पेट्रोलियम उद्योग से जुड़े जानकारों के अनुसार, इस बढ़ोतरी के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण काम कर रहे हैं:अंतरराष्ट्रीय इनपुट कॉस्ट (International Input Cost): वैश्विक स्तर पर एलपीजी का बेंचमार्क प्राइस (सऊदी अरामको कॉन्ट्रैक्ट प्राइस) लगातार बढ़ रहा है। भारत अपनी जरूरत का 50 फीसदी से अधिक एलपीजी आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों का सीधा असर घरेलू दामों पर पड़ता है।रुपये का अवमूल्यन: डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की स्थिति में होने वाले उतार-चढ़ाव के कारण भी आयात की लागत बढ़ जाती है, जिसे कंपनियां अंततः उपभोक्ताओं पर पास-ऑन कर देती हैं।
व्यावसायिक सिलिंडर के दामों में भी बदलाव की आशंका
घरेलू एलपीजी सिलिंडर (14.2 किग्रा) के दाम बढ़ने के साथ ही कमर्शियल सिलिंडर (19 किग्रा) के दामों में भी उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी हुई है। हालांकि, सरकार और तेल कंपनियों का कहना है कि वे वैश्विक संकट के बीच भी घरेलू उपभोक्ताओं को न्यूनतम मार झेलने देने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन धरातल पर आम जनता को इससे कोई राहत मिलती नहीं दिख रही है।
विपक्ष ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। विभिन्न राजनैतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने इस मूल्य वृद्धि को तुरंत वापस लेने की मांग की है। अब देखना यह होगा कि चारों तरफ से उठती विरोध की आवाजों के बीच क्या सरकार उपभोक्ताओं को सबसिडी या टैक्स कटौती के माध्यम से कोई राहत देती है या जनता को इसी तरह महंगाई की आग में झुलसना पड़ेगा।
