उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने पुणे के प्रतिष्ठित डेक्कन कॉलेज का किया दौरा, ‘संस्कृत एनसाइक्लोपीडिक डिक्शनरी’ प्रोजेक्ट की बारीकियों को समझा
1 min read



उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने पुणे के प्रतिष्ठित डेक्कन कॉलेज का किया दौरा, ‘संस्कृत एनसाइक्लोपीडिक डिक्शनरी’ प्रोजेक्ट की बारीकियों को समझा
पुणे/देहरादून:
संस्कृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन और शोध को नई दिशा देने के उद्देश्य से उत्तराखंड शासन के संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने पुणे स्थित ऐतिहासिक डेक्कन कॉलेज, स्नातकोत्तर एवं अनुसंधान संस्थान (PGRI) – डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी का विशेष दौरा किया। अपने इस शैक्षणिक भ्रमण के दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय के ‘संस्कृत एवं लेक्सिकोग्राफी’ (संस्कृत एवं कोशशास्त्र) विभाग का गहन अवलोकन किया और संस्थान द्वारा संचालित बहुचर्चित ‘संस्कृत एनसाइक्लोपीडिक डिक्शनरी प्रोजेक्ट’ की प्रगति एवं कार्यप्रणाली का जायजा लिया।
वेदों से 18वीं सदी तक के ग्रंथों का ऐतिहासिक संकलन
विभाग में आयोजित बैठक के दौरान विद्वानों और प्रोफेसरों के साथ इस ऐतिहासिक डिक्शनरी प्रोजेक्ट के स्वरूप और इसकी बारीकियों पर विस्तृत चर्चा हुई। विभाग के वरिष्ठ संकाय सदस्य डॉ. भाव शर्मा ने सचिव दीपक कुमार को संस्कृत एनसाइक्लोपीडिक डिक्शनरी के निर्माण की पूरी प्रक्रिया से अवगत कराया।
डॉ. शर्मा ने बताया कि यह डिक्शनरी परियोजना भारतीय ज्ञान परंपरा का एक अभूतपूर्व दस्तावेज है। इसमें प्राचीन वेदों से लेकर 18वीं शताब्दी तक के लगभग 1,500 अत्यंत महत्वपूर्ण एवं प्रामाणिक संस्कृत ग्रंथों को शामिल किया गया है। इन ग्रंथों के गहन अध्ययन और विश्लेषण के बाद शब्दों को इस महाकोश में स्थान दिया जा रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि इस प्रोजेक्ट के तहत अब तक डिक्शनरी के 35 विशाल वॉल्यूम (खंड) सफलतापूर्वक प्रकाशित किए जा चुके हैं, जबकि अगले तीन वॉल्यूम जल्द ही प्रकाशित होकर पाठकों और शोधार्थियों के सामने होंगे।
संस्कृत शिक्षा और शोध के लिए क्रांतिकारी पहल
इस महाकोश (डिक्शनरी) की सबसे बड़ी खासियत इसका विस्तृत और प्रामाणिक स्वरूप है। लगभग 1.5 लाख संस्कृत शब्दों और उनके विस्तृत अंग्रेजी अर्थों का यह संकलन केवल एक साधारण शब्दकोश नहीं है, बल्कि यह संस्कृत साहित्य का एक संपूर्ण संदर्भ ग्रंथ है। यह डिक्शनरी न केवल किसी शब्द का अर्थ स्पष्ट करती है, बल्कि यह भी सटीक जानकारी देती है कि संबंधित शब्द का प्रयोग किस मूल ग्रंथ में, किस संदर्भ में और कहाँ किया गया है।
यह विशाल शब्दकोश न केवल उच्च स्तरीय शोध करने वाले विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रहा है, बल्कि संस्कृत के प्रकांड विद्वानों और अध्यापकों के लिए भी मार्गदर्शक बना हुआ है। सचिव दीपक कुमार ने इस बात पर विशेष बल दिया कि इस कोष की उपयोगिता उत्तराखंड संस्कृत यूनिवर्सिटी के साथ-साथ राज्य के तमाम संस्कृत विद्यालयों, महाविद्यालयों, सामान्य स्कूलों और डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों व छात्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, जहाँ संस्कृत एक विषय के रूप में पढ़ाई जाती है।
अकादमिक कार्यक्रमों पर भी हुई चर्चा
दीपक कुमार ने विभाग में संचालित अन्य अकादमिक गतिविधियों की भी जानकारी ली। उल्लेखनीय है कि डेक्कन कॉलेज का यह विभाग संस्कृत और लेक्सिकोग्राफी विषय में स्नातकोत्तर (M.A.) पाठ्यक्रम के साथ-साथ डॉक्टरेट (Ph.D.) प्रोग्राम भी संचालित करता है।
इस दौरे के दौरान अकादमिक आदान-प्रदान और संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार को लेकर विश्वविद्यालय के शीर्ष नेतृत्व के साथ एक सकारात्मक बैठक हुई। इस अवसर पर डेक्कन कॉलेज के वाइस-चांसलर प्रो. प्रसाद जोशी, डॉ. शिल्पा सुमंत, डॉ. भाव शर्मा, डॉ. बंसी लहले सहित संस्कृत विभाग के अन्य प्रतिष्ठित फैकल्टी मेंबर्स उपस्थित रहे।
दौरे के अंत में उत्तराखंड के संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने डेक्कन कॉलेज द्वारा संस्कृत भाषा और लेक्सिकोग्राफी के क्षेत्र में किए जा रहे इस ऐतिहासिक कार्य की भूरि-भूरि प्रशंसा की और उम्मीद जताई कि इस ज्ञानकोष का लाभ उत्तराखंड के संस्कृत साधकों और विद्यार्थियों को भी बड़े पैमाने पर मिलेगा।
