चिकित्सा जगत का चमकता सितारा: प्रो. भानु दुग्गल ने योग और कार्डियोलॉजी के संगम से रची नई इबारत
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चिकित्सा जगत का चमकता सितारा: प्रो. भानु दुग्गल ने योग और कार्डियोलॉजी के संगम से रची नई इबारत
ऋषिकेश: चिकित्सा विज्ञान और जनसेवा के क्षेत्र में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जिनकी योग्यता और अनुभव न केवल संस्थान, बल्कि पूरे देश के लिए गौरव का विषय बन जाते हैं। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), ऋषिकेश के कार्डियोलॉजी विभाग की अध्यक्ष प्रो. भानु दुग्गल आज एक ऐसा ही नाम बन चुकी हैं।
शिक्षा की मजबूत बुनियाद
प्रो. दुग्गल का शैक्षणिक सफर देश के प्रतिष्ठित संस्थानों की सफलता की कहानी कहता है। उन्होंने देश के सर्वश्रेष्ठ मेडिकल कॉलेज AIIMS, नई दिल्ली से अपनी MBBS और MD की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद, उन्होंने आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज (AFMC), पुणे से कार्डियोलॉजी में DM की विशेषज्ञता हासिल की, जो उनकी चिकित्सा क्षेत्र में गहरी पकड़ को दर्शाता है।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान
प्रो. भानु दुग्गल की विशेषज्ञता केवल अस्पताल की चारदीवारी तक सीमित नहीं है। वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हार्वर्ड (T.H. Chan School of Public Health) में ‘लोन स्कॉलर’ (Lown’s Scholar) के रूप में भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।
योग और आधुनिक चिकित्सा का अनूठा मेल
प्रो. दुग्गल की सबसे बड़ी विशेषता आधुनिक कार्डियोलॉजी को भारतीय पारंपरिक ज्ञान (योग) के साथ जोड़ना है। वे वर्तमान में:
- SVYASA यूनिवर्सिटी, बैंगलोर में प्रोफेसर एमेरिटस हैं।
- AYUSH नेशनल रिसर्च कंसोर्टियम की रिसर्च कमेटी की अध्यक्षा हैं।
- हृदय रोगों के उपचार में ‘योग आधारित कार्डियक रिहैबिलिटेशन’ जैसे महत्वपूर्ण क्लीनिकल ट्रायल्स का नेतृत्व कर रही हैं।
नीति निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका
भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के साथ मिलकर वे STEMI (हार्ट अटैक) और बच्चों में होने वाले गैर-संचारी रोगों (NCDs) के लिए गाइडलाइंस तैयार करने वाली तकनीकी विशेषज्ञ टीम (TEG) की सक्रिय सदस्य हैं। साथ ही, ICMR की प्रोजेक्ट सिलेक्शन कमेटी में उनकी भूमिका देश के भविष्य के स्वास्थ्य अनुसंधान को दिशा दे रही है।
”प्रो. भानु दुग्गल का अनुभव और उनकी दूरदर्शिता यह सिद्ध करती है कि जब आधुनिक विज्ञान और प्राचीन योग पद्धति हाथ मिलाते हैं, तो मानवता के लिए कल्याण के नए द्वार खुलते हैं।”
