लखनऊ: प्रतिभा सिनेमा में नियमों की धज्जियां, ‘A’ सर्टिफिकेट फिल्म ‘धुरंधर’ देख रहे नाबालिग; सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
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लखनऊ: प्रतिभा सिनेमा में नियमों की धज्जियां, ‘A’ सर्टिफिकेट फिल्म ‘धुरंधर’ देख रहे नाबालिग; सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के हृदय स्थल हजरतगंज में स्थित प्रतिभा सिनेमा (Pratibha Cinema) एक बड़े विवाद के घेरे में आ गया है। सेंसर बोर्ड के नियमों को ताक पर रखते हुए सिनेमाघर प्रबंधन द्वारा ‘A’ (Adult Only) सर्टिफिकेट प्राप्त फिल्म ‘धुरंधर’ को दिखाने के लिए नाबालिग बच्चों को धड़ल्ले से प्रवेश दिया जा रहा है। मनोरंजन जगत के कड़े कानूनों और सुरक्षा मानकों की यह खुली अनदेखी न केवल प्रशासन को चुनौती दे रही है, बल्कि नई पीढ़ी के नैतिक मूल्यों के लिए भी खतरा पैदा कर रही है।
प्रतिभा सिनेमा की बड़ी लापरवाही उजागर
जानकारी के अनुसार, फिल्म ‘धुरंधर’ अपनी हिंसा और वयस्क सामग्री (Adult Content) के कारण केवल 18 वर्ष से ऊपर के दर्शकों के लिए प्रमाणित की गई है। इसके बावजूद, प्रतिभा सिनेमा के गेट पर तैनात सुरक्षाकर्मी और टिकट खिड़की पर बैठे कर्मचारी बच्चों की उम्र की जांच करना तो दूर, उन्हें सिनेमा हॉल के भीतर प्रवेश करने से रोक भी नहीं रहे हैं।
- प्रमाणन का उल्लंघन: नियमानुसार, ‘A’ सर्टिफिकेट फिल्म के शो के दौरान किसी भी नाबालिग को हॉल के भीतर प्रवेश देना कानूनी अपराध है।
- सुरक्षा में चूक: गेट पर तैनात सुरक्षाकर्मी बच्चों को ग्रुप में भीतर जाते देख मूकदर्शक बने हुए हैं, जो सीधे तौर पर प्रबंधन की लापरवाही को दर्शाता है।
सिनेमैटोग्राफ एक्ट की सरेआम अवहेलना
भारत में सिनेमैटोग्राफ एक्ट, 1952 के तहत यह स्पष्ट प्रावधान है कि यदि कोई फिल्म केवल वयस्कों के लिए प्रमाणित है, तो सिनेमाघर संचालक की यह जिम्मेदारी है कि वह दर्शकों की पहचान और उम्र सुनिश्चित करे। लखनऊ के इस प्रतिष्ठित सिनेमाघर में जिस प्रकार नाबालिग बच्चे ‘धुरंधर’ जैसी फिल्म देखते पाए गए हैं, वह प्रशासनिक व्यवस्था और मनोरंजन कर विभाग (Entertainment Tax Department) की कार्यशैली पर भी सवालिया निशान लगाता है।
अभिभावकों और जागरूक नागरिकों में रोष
इस लापरवाही के उजागर होने के बाद शहर के जागरूक नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई है। लोगों का कहना है कि व्यावसायिक लाभ के चक्कर में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। 18+ श्रेणी की फिल्मों में अक्सर ऐसी सामग्री होती है जो बच्चों के कोमल मन पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।
प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
मामला संज्ञान में आने के बाद अब जिला प्रशासन और लखनऊ पुलिस से इस पर तत्काल संज्ञान लेने की मांग की जा रही है। जानकारों का मानना है कि यदि इस मामले में प्रतिभा सिनेमा का लाइसेंस रद्द करने या भारी जुर्माना लगाने जैसी कार्रवाई नहीं की गई, तो अन्य सिनेमाघर भी नियमों का इसी प्रकार उल्लंघन करेंगे।
केवल मुनाफे की दौड़ या सिस्टम की नाकामी?
प्रतिभा सिनेमा में नियमों का यह उल्लंघन बताता है कि राजधानी के बीचों-बीच स्थित संस्थानों में भी कानून का डर खत्म होता जा रहा है। अब देखना यह होगा कि लखनऊ का जिला प्रशासन इस बड़ी लापरवाही पर क्या रुख अपनाता है और क्या दोषियों के खिलाफ कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई की जाती है।
