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यूपी को मिलेगा नया स्थायी DGP: राजीव कृष्ण का नाम लगभग तय; रेणुका मिश्रा रेस से बाहर, जानें क्या है पूरा समीकरण

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यूपी को मिलेगा नया स्थायी DGP: राजीव कृष्ण का नाम लगभग तय; रेणुका मिश्रा रेस से बाहर, जानें क्या है पूरा समीकरण

लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस के शीर्ष नेतृत्व को लेकर चल रही लंबी जद्दोजहद अब खत्म होती नजर आ रही है। शासन के गलियारों से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, आईपीएस राजीव कृष्ण (IPS Rajiv Krishna) का उत्तर प्रदेश का अगला स्थायी डीजीपी (DGP) बनना लगभग तय माना जा रहा है। वहीं, सबसे सीनियर आईपीएस अधिकारी रेणुका मिश्रा इस रेस से बाहर हो गई हैं। यूपी सरकार द्वारा संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को भेजे गए पैनल और हालिया घटनाक्रमों ने राजीव कृष्ण के नाम पर मुहर लगा दी है।

रेणुका मिश्रा क्यों हुईं रेस से बाहर? पेपर लीक मामले ने बिगाड़ा खेल

​डीजीपी पद की सबसे वरिष्ठ दावेदार होने के बावजूद रेणुका मिश्रा का पत्ता कटने के पीछे 2024 का सिपाही भर्ती पेपर लीक मामला मुख्य कारण माना जा रहा है।

  • सरकार का रुख: योगी सरकार ने पेपर लीक मामले में तत्कालीन डीजी भर्ती बोर्ड रेणुका मिश्रा को सीधे तौर पर जिम्मेदार माना था।
  • UPSC को रिपोर्ट: सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार ने यूपीएससी को भेजे गए प्रस्ताव में स्पष्ट रूप से पेपर लीक की घटना और उसमें भर्ती बोर्ड की लापरवाही का जिक्र किया है। इस प्रतिकूल रिपोर्ट के बाद रेणुका मिश्रा की दावेदारी तकनीकी और नैतिक आधार पर कमजोर हो गई है।

राजीव कृष्ण के पक्ष में बने समीकरण

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​यूपी के अगले पुलिस मुखिया के रूप में राजीव कृष्ण का नाम तय होने के पीछे कई प्रशासनिक और तकनीकी कारण हैं:

  1. वरिष्ठता और बेदाग छवि: राजीव कृष्ण वर्तमान में सबसे वरिष्ठ अधिकारियों में से एक हैं और उनकी छवि एक कुशल रणनीतिकार के रूप में रही है।
  2. प्रतिद्वंदियों की स्थिति: * आलोक शर्मा: वरिष्ठ आईपीएस आलोक शर्मा की सेवा अवधि (Tenure) अब 6 महीने से भी कम बची है। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार, स्थायी डीजीपी के लिए कम से कम 6 महीने का कार्यकाल शेष होना अनिवार्य है।
    • पीयूष आनंद: एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी पीयूष आनंद वर्तमान में केंद्र में प्रतिनियुक्ति (Deputation) पर तैनात हैं, जिससे राज्य में उनकी तत्काल नियुक्ति की संभावना कम है।

योगी सरकार का ‘जीरो टॉलरेंस’ संदेश

​रेणुका मिश्रा के नाम पर विचार न करना योगी सरकार के ‘जीरो टॉलरेंस’ विजन को दर्शाता है। पेपर लीक जैसे संवेदनशील मामले में किसी भी स्तर की लापरवाही को सरकार ने बर्दाश्त नहीं किया है। राजीव कृष्ण को कमान सौंपकर सरकार यह संदेश देना चाहती है कि कानून व्यवस्था और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

UPSC पैनल और अंतिम घोषणा

​नियमों के मुताबिक, राज्य सरकार द्वारा भेजे गए नामों के पैनल पर यूपीएससी की बैठक होती है, जिसमें तीन नाम शॉर्टलिस्ट किए जाते हैं। इन तीन नामों में से मुख्यमंत्री किसी एक को डीजीपी चुनते हैं। वर्तमान परिस्थितियों में राजीव कृष्ण का नाम इस पैनल में सबसे मजबूत स्थिति में है। माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में उनके नाम की आधिकारिक घोषणा कर दी जाएगी।

 पुलिस को मिलेगी नई दिशा

​राजीव कृष्ण की नियुक्ति से यूपी पुलिस में स्थिरता आने की उम्मीद है। पिछले काफी समय से कार्यवाहक डीजीपी के भरोसे चल रहे विभाग को अब एक स्थायी और पूर्णकालिक मुखिया मिलेगा, जिससे पुलिसिंग और अपराध नियंत्रण के कार्यों में और अधिक तेजी आएगी।

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