UP ATS का बड़ा खुलासा: NEET की तैयारी से लेकर ISIS हैंडलर के जाल तक, हारिश के ‘जिहादी’ नेटवर्क की इनसाइड स्टोरी
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UP ATS का बड़ा खुलासा: NEET की तैयारी से लेकर ISIS हैंडलर के जाल तक, हारिश के ‘जिहादी’ नेटवर्क की इनसाइड स्टोरी
लखनऊ | 21 मार्च 2026
उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधी दस्ते (UP ATS) की जांच में प्रतिबंधित आतंकी संगठन ISIS के मॉड्यूल को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और डरावना खुलासा हुआ है। गिरफ्तार आरोपी हारिश के नेटवर्क की परतों को खंगालते हुए एटीएस ने पाया है कि कैसे एक मेडिकल छात्र (नीट अभ्यर्थी) कट्टरपंथ की राह पर चलकर देश विरोधी गतिविधियों का हिस्सा बन गया।
जांच में यह भी सामने आया है कि आतंकियों का नया पैंतरा अब नाबालिगों (Minors) को ढाल बनाना है, ताकि कानून की पकड़ से बचा जा सके।
नीट की तैयारी और आईएसआईएस हैंडलर का संपर्क
एटीएस की पूछताछ में खुलासा हुआ है कि हारिश कोई पेशेवर अपराधी नहीं था, बल्कि वह NEET (नीट) की परीक्षा की तैयारी कर रहा था। डॉक्टर बनने का सपना देखने वाला यह युवक पढ़ाई के दौरान ही सोशल मीडिया के माध्यम से आईएस के एक विदेशी हैंडलर के संपर्क में आया।
हैंडलर ने हारिश की कट्टरपंथी विचारधारा को भांपा और उसे धीरे-धीरे जिहादी गतिविधियों के लिए उकसाना शुरू किया। हारिश को न केवल खुद को संगठन से जोड़ने के लिए कहा गया, बल्कि उसे नए सदस्यों की भर्ती (Recruitment) का जिम्मा भी सौंपा गया।
नाबालिगों की भर्ती: आतंकियों की नई और खतरनाक चाल
इस पूरे मामले में सबसे चिंताजनक पहलू नाबालिगों का इस्तेमाल है। हैंडलर ने हारिश को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि वह अपने नेटवर्क में खासतौर पर नाबालिगों को शामिल करे। इसके पीछे आतंकियों की दो बड़ी रणनीतियां थीं:
- संदेह से बचाव: कम उम्र के लड़कों पर पुलिस या सुरक्षा एजेंसियों को आसानी से शक नहीं होता।
- कानूनी ढाल: यदि पकड़े भी जाएं, तो जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (JJ Act) के कारण वे कड़े कानूनी शिकंजे से आसानी से बच सकते हैं और उन्हें कड़ी सजा मिलना मुश्किल होता है।
जांच में यह प्रमाणित हुआ है कि हारिश ने कई नाबालिगों का ब्रेनवॉश कर उन्हें अपने गुप्त ग्रुप में शामिल कर लिया था। एटीएस अब उन सभी नाबालिगों की पहचान करने में जुटी है।
7 दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड की मांग: सोमवार को सुनवाई
एटीएस ने हारिश के नेटवर्क, फंडिंग और उसके आकाओं का पता लगाने के लिए अदालत से सात दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड मांगी है।
- अर्जी दाखिल: शुक्रवार को एटीएस ने इसके लिए कोर्ट में औपचारिक अर्जी दी।
- अगला कदम: सोमवार को इस अर्जी पर सुनवाई होने की संभावना है।
एटीएस सूत्रों का कहना है कि रिमांड मिलने के बाद हारिश को सहारनपुर और मुरादाबाद ले जाया जाएगा। इन शहरों में हारिश के कई ठिकानों और संपर्कों की जानकारी मिली है। यहाँ से महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य और अन्य संदिग्धों की गिरफ्तारी संभव है।
सहारनपुर और मुरादाबाद: रडार पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश
एटीएस की जांच अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इन दो प्रमुख जिलों पर केंद्रित है। माना जा रहा है कि हारिश ने इन क्षेत्रों में अपना एक सक्रिय ‘स्लीपर सेल’ (Sleeper Cell) तैयार कर लिया था। रिमांड के दौरान एटीएस यह पता लगाएगी कि:
- हारिश को हैंडलर से कितने पैसे मिल रहे थे?
- क्या उसके पास कोई आत्मघाती हमले या विस्फोट की योजना थी?
- उसके नेटवर्क में और कितने ‘व्हाइट कॉलर’ लोग शामिल हैं?
सतर्कता की आवश्यकता
यह मामला दिखाता है कि कैसे सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को गुमराह किया जा रहा है। अभिभावकों और शैक्षणिक संस्थानों को अपने बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर विशेष नजर रखने की जरूरत है ताकि वे किसी अनजाने जाल का हिस्सा न बनें।
