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Gyanvapi: मां श्रृंगार गौरी की चौखट पर छलके वादी महिलाओं के आंसू, कहा- ‘साल में एक दिन नहीं, 365 दिन चाहिए पूजन का अधिकार’

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Gyanvapi: मां श्रृंगार गौरी की चौखट पर छलके वादी महिलाओं के आंसू, कहा- ‘साल में एक दिन नहीं, 365 दिन चाहिए पूजन का अधिकार’

वाराणसी: काशी की गलियों में आज ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय मां श्रृंगार गौरी’ के जयकारे गूँज रहे हैं। चैत्र नवरात्रि की चतुर्थी के पावन अवसर पर ज्ञानवापी परिसर स्थित मां श्रृंगार गौरी के दर्शन के लिए आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। इस मौके पर ज्ञानवापी मामले की मुख्य महिला वादी—सीता साहू, मंजू व्यास, रेखा पाठक और लक्ष्मी देवी—ने विधि-विधान से पूजन किया। हालांकि, दर्शन के बाद महिलाओं की आँखों में भक्ति के साथ-साथ एक टीस भी दिखी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मां से आशीर्वाद मांगा है कि अब यह दर्शन साल में सिर्फ एक दिन नहीं, बल्कि 365 दिन मिलना चाहिए।

मैदागिन से काशी विश्वनाथ तक ‘धर्म ध्वजा’ यात्रा

​सुबह से ही वाराणसी के मैदागिन क्षेत्र में श्रद्धालुओं का जमावड़ा शुरू हो गया था। महिला वादियों के नेतृत्व में भक्तों का एक बड़ा समूह हाथों में ‘धर्म ध्वजा’ लेकर पैदल मार्च करते हुए काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर की ओर बढ़ा। ढोल-नगाड़ों और मंत्रोच्चार के बीच यह समूह जब श्रृंगार गौरी की चौखट पर पहुँचा, तो माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया। कड़ी सुरक्षा के बीच भक्तों ने मां की प्रतिमा के समक्ष मत्था टेका और सुख-समृद्धि की कामना की।

क्यों खास है आज का दिन?

​ज्ञानवापी मस्जिद की पश्चिमी दीवार के पीछे स्थित मां श्रृंगार गौरी की प्रतिमा हिंदू पक्ष के लिए अत्यंत पूजनीय है।

  • प्रतिबंध और परंपरा: सामान्य दिनों में श्रृंगार गौरी परिसर में प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहता है। श्रद्धालु केवल बाहर से या जाली के पीछे से ही आभासी दर्शन कर पाते हैं।
  • एकमात्र अवसर: साल भर में केवल चैत्र नवरात्रि की चतुर्थी ही वह दिन होता है जब प्रशासन और कोर्ट के आदेशानुसार चौखट के भीतर जाकर पूजन की अनुमति मिलती है।

2021 की वो याचिका और 365 दिन का संकल्प

​पूजन के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए वादी महिला मंजू व्यास और सीता साहू ने कहा, “आज हमने मां से शक्ति मांगी है। यह विडंबना ही है कि अपनी ही आराध्य की पूजा के लिए हमें साल भर इंतजार करना पड़ता है। हमारी लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक हमें 365 दिन और 24 घंटे दर्शन-पूजन का अधिकार नहीं मिल जाता।”

​आपको बता दें कि इन्ही महिलाओं ने साल 2021 में वाराणसी की अदालत में याचिका दाखिल की थी, जिसमें श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन की मांग की गई थी। इसी याचिका के आधार पर ज्ञानवापी के वैज्ञानिक सर्वे और कानूनी प्रक्रियाओं का दौर शुरू हुआ, जो वर्तमान में भी न्यायालय में विचाराधीन है।

धर्मगुरुओं और वकीलों की राय: ‘आस्था की जीत तय’

​मौके पर मौजूद हिंदू पक्ष के पैरोकारों और वकीलों ने भी इस दिन को महत्वपूर्ण बताया।

  • वकीलों का तर्क: कानूनी सलाहकारों का कहना है कि साक्ष्यों से यह स्पष्ट है कि यह एक प्राचीन मंदिर का हिस्सा है, और पूजा का अधिकार मौलिक अधिकार है।
  • धर्मगुरुओं का आह्वान: काशी के विद्वानों और धर्मगुरुओं ने कहा कि श्रृंगार गौरी की पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान की पुनस्थापना का संकल्प है।

सुरक्षा के कड़े पहरे में ‘चौखट’ की पूजा

​चूंकि मामला कोर्ट में है और परिसर संवेदनशील है, इसलिए वाराणसी कमिश्नरेट ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे।

  1. बैरिकेडिंग: मंदिर के चारों ओर अतिरिक्त पुलिस बल और पीएसी (PAC) की तैनाती की गई।
  2. ड्रोन निगरानी: भीड़ को नियंत्रित करने और संकरी गलियों पर नजर रखने के लिए ड्रोन कैमरों का सहारा लिया गया।
  3. सीमित प्रवेश: दर्शनार्थियों को जत्थों में बांटा गया ताकि व्यवस्था बनी रहे।

 आस्था और कानून की जंग

​आज का पूजन केवल एक परंपरा का निर्वहन नहीं था, बल्कि उस कानूनी लड़ाई को धार देने की कोशिश भी थी जो पिछले तीन सालों से अदालत की फाइलों और दलीलों में चल रही है। काशी के आम शिवभक्तों के लिए यह चौखट अब उम्मीद का प्रतीक बन चुकी है।

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