Varanasi Breaking: ज्ञानवापी की चौखट पर आज गूँजेगा मां श्रृंगार गौरी का जयकारा, 5 महिला वादी करेंगी विशेष पूजन
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Varanasi Breaking: ज्ञानवापी की चौखट पर आज गूँजेगा मां श्रृंगार गौरी का जयकारा, 5 महिला वादी करेंगी विशेष पूजन
वाराणसी: धर्म की नगरी काशी में आज का दिन बेहद खास और भावुक कर देने वाला है। कड़ी सुरक्षा और मंत्रोच्चार के बीच, ज्ञानवापी परिसर की पश्चिमी दीवार से सटी मां श्रृंगार गौरी के दर्शन के लिए भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा है। साल में मिलने वाले एकमात्र अवसर का लाभ उठाते हुए, ज्ञानवापी मामले की पांच मुख्य महिला वादी आज विधि-विधान से मां की चौखट पर मत्था टेकेंगी।
साल में सिर्फ एक बार: क्यों खास है चैत्र नवरात्रि की चतुर्थी?
काशी की परंपरा के अनुसार, चैत्र नवरात्रि की चतुर्थी ही वह एकमात्र दिन है जब श्रद्धालुओं को ज्ञानवापी मस्जिद की पश्चिमी दीवार के पीछे स्थित मां श्रृंगार गौरी की प्रतिमा के करीब जाकर दर्शन और पूजन की अनुमति मिलती है। शेष 364 दिन यह क्षेत्र प्रतिबंधित रहता है और श्रद्धालु केवल बाहर से ही दर्शन कर पाते हैं।
आज सुबह से ही मैदागिन इलाके में हलचल तेज रही। पांचों महिला वादी—राखी सिंह, सीता साहू, मंजू व्यास, रेखा पाठक और लक्ष्मी देवी—हाथों में पूजा की थाली और आंखों में आस्था के आंसू लिए श्रद्धालुओं के समूह के साथ पैदल मार्च करते हुए काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर की ओर बढ़ीं।
संघर्ष की नींव: इन 5 महिलाओं ने बदली काशी की कानूनी लड़ाई
यह वही पांच महिलाएं हैं जिन्होंने अगस्त 2021 में वाराणसी की अदालत में एक याचिका दायर कर पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा था। उनकी मांग थी कि मां श्रृंगार गौरी का दर्शन-पूजन केवल साल में एक बार न होकर ‘नियमित’ (Daily Rituals) होना चाहिए।
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- इसी याचिका के बाद कोर्ट ने ज्ञानवापी परिसर के सर्वे का आदेश दिया था।
- वर्तमान में यह मामला अदालत में विचाराधीन है, लेकिन इन महिलाओं के लिए आज का दिन केवल पूजा नहीं, बल्कि अपने संकल्प को दोहराने का दिन है।
“हमारा संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक मां श्रृंगार गौरी की चौखट पर हर रोज दीया नहीं जलता।” — मुख्य वादी राखी सिंह।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम: अभेद्य किले में तब्दील हुआ परिसर
संवेदनशील क्षेत्र होने और दर्शनार्थियों की भीड़ को देखते हुए वाराणसी प्रशासन ने सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए हैं।
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- पैदल मार्च पर नजर: मैदागिन से गोदौलिया और विश्वनाथ मंदिर मार्ग पर भारी पुलिस बल तैनात है।
- ड्रोन से निगरानी: संकरी गलियों और ज्ञानवापी के आसपास के छतों पर पुलिस के जवान तैनात किए गए हैं।
- सिमित प्रवेश: केवल निर्धारित मार्ग से ही श्रद्धालुओं को श्रृंगार गौरी की चौखट तक जाने दिया जा रहा है।
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धार्मिक महत्व: आदि शक्ति का स्वरूप हैं मां श्रृंगार गौरी
मान्यता है कि मां श्रृंगार गौरी, महादेव की शक्ति का प्रतीक हैं और उनकी पूजा के बिना काशी की यात्रा अधूरी मानी जाती है। ज्ञानवापी की पश्चिमी दीवार पर मौजूद नक्काशी और प्राचीन अवशेषों के बीच स्थित इस स्थान को हिंदू पक्ष ‘आदि विशेश्वर’ का मूल स्थान मानता है। आज के दिन यहाँ सिंदूर, अक्षत और चुनरी चढ़ाने की विशेष महत्ता है।
कानून के बीच काशी
एक तरफ जहाँ अदालत में साक्ष्यों और दलीलों की लड़ाई चल रही है, वहीं दूसरी तरफ काशी की गलियों में ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे बता रहे हैं कि जनता की आस्था कितनी गहरी है। साल में मिलने वाला यह कुछ घंटों का मौका, इन 5 महिला वादियों और हजारों शिवभक्तों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं है।
