द्वाराहाट: ‘स्वदेशी ज्ञान प्रणाली’ से ही प्रशस्त होगा ‘विकसित भारत’ का मार्ग; राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का भव्य आगाज
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द्वाराहाट: ‘स्वदेशी ज्ञान प्रणाली’ से ही प्रशस्त होगा ‘विकसित भारत’ का मार्ग; राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का भव्य आगाज
ब्यूरो रिपोर्ट: ललित बिष्ट | द्वाराहाट (अल्मोड़ा) दिनांक: 27 मार्च, 2026
द्वाराहाट। कुमाऊं की ऐतिहासिक नगरी द्वाराहाट स्थित राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आज बौद्धिक विमर्श और सांस्कृतिक गौरव का अनूठा संगम देखने को मिला। महाविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग द्वारा भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR), नई दिल्ली के सौजन्य से “स्वदेशी ज्ञान प्रणाली और विकसित भारत” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का भव्य शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि प्रो. एस.एन. चौधरी, विशिष्ट अतिथि डॉ. हरप्रीत कौर, प्रो. साकेत बिहारी और प्राचार्य डॉ. डी.सी. पंत ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
वैदिक ज्ञान और आधुनिक भारत का समन्वय
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि प्रो. एस.एन. चौधरी ने भारतीय ज्ञान परंपरा की प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत को ‘विकसित भारत’ बनाने का लक्ष्य केवल तकनीकी प्रगति से नहीं, बल्कि अपनी जड़ों से जुड़कर ही प्राप्त किया जा सकता है। प्रो. चौधरी ने जोर देकर कहा, “हमारी वैदिक और परंपरागत ज्ञान प्रणाली ही वह आधारशिला है, जिस पर आधुनिक और समृद्ध भारत की इमारत खड़ी होगी। नई शिक्षा नीति (NEP) में स्वदेशी पाठ्यक्रम का समावेश इस दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।”
सांस्कृतिक अस्मिता और भाषाई गौरव
दिल्ली विश्वविद्यालय से आईं विशिष्ट अतिथि डॉ. हरप्रीत कौर ने उत्तराखंड की पावन धरा और यहाँ की समृद्ध संस्कृति को राष्ट्र की गरिमा का अटूट स्रोत बताया। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे पाश्चात्य अज्ञानता के अंधकार को मिटाकर अपने भीतर ज्ञान का वह दीपक जलाएं, जो पूरी दुनिया को राह दिखाए।
वहीं, मगध विश्वविद्यालय के डॉ. दीपक कुमार ने ‘भाषाई स्वतंत्रता’ का मुद्दा पुरजोर तरीके से उठाया। उन्होंने कहा कि जब तक हम औपनिवेशिक मानसिकता की बेड़ियों को तोड़कर अपनी राष्ट्रभाषा और मौलिक संस्कृति का सम्मान करना नहीं सीखेंगे, तब तक बौद्धिक स्वतंत्रता अधूरी है। उन्होंने अपनी संस्कृति के प्रति आत्मगौरव जगाने पर विशेष बल दिया।
सामाजिक उत्थान में वेदों की भूमिका
प्रसिद्ध शिक्षाविद प्रो. साकेत बिहारी ने वेदों की ऋचाओं और प्राचीन मंत्रों के वैज्ञानिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक उत्थान का एक अनिवार्य सूत्र है, जो वसुधैव कुटुंबकम की भावना को साकार करता है।
शिक्षा जगत के लिए मील का पत्थर
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. डी.सी. पंत ने सभी आगंतुक अतिथियों का स्वागत करते हुए इस आयोजन को विद्यार्थियों के लिए एक स्वर्णिम अवसर बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे उच्च स्तरीय सेमिनार छात्रों के मार्गदर्शन में मील का पत्थर साबित होते हैं। सेमिनार के संयोजक डॉ. अंचलेश कुमार ने अपनी प्रस्तावना में भारतीय ज्ञान परंपरा को भारत के पुनः ‘विश्व गुरु’ बनने का सबसे बड़ा आधार बताया।
सत्र का सफल संचालन और उपस्थिति
उद्घाटन सत्र का कुशल संचालन डॉ. निर्दोषिता बिष्ट एवं डॉ. शर्मिष्ठा द्वारा किया गया। सत्र के अंत में प्रो. नाजिश खान ने सभी विद्वानों और शोधार्थियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। इस ऐतिहासिक बौद्धिक समागम में महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक, दूर-दराज से आए शोध छात्र, छात्रसंघ प्रतिनिधि और भारी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
यह सेमिनार अगले दो दिनों तक विभिन्न तकनीकी सत्रों के माध्यम से स्वदेशी ज्ञान के विविध आयामों पर चर्चा करेगा, जिसके निष्कर्ष शासन और नीति निर्धारकों के लिए महत्वपूर्ण साबित होंगे।
