स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल से मिला फार्मासिस्टों का प्रतिनिधिमंडल; ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिरों’ में नियुक्ति की उठी मांग
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स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल से मिला फार्मासिस्टों का प्रतिनिधिमंडल; ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिरों’ में नियुक्ति की उठी मांग
विशेष रिपोर्ट: ललित बिष्ट
देहरादून। उत्तराखंड के नवनियुक्त स्वास्थ्य मंत्री माननीय सुबोध उनियाल से आज बेरोजगार डिप्लोमा फार्मासिस्ट एलोपैथिक संघ के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान संघ के पदाधिकारियों ने माननीय मंत्री जी को उनके नए दायित्व के लिए पुष्पगुच्छ भेंट कर बधाई दी और प्रदेश के हजारों बेरोजगार फार्मासिस्टों के भविष्य से जुड़ी ज्वलंत समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की।
फार्मासिस्टों की प्रमुख मांगें और चर्चा
मुलाकात के दौरान संघ के प्रदेश संयोजक अमित जोशी एवं देहरादून प्रभारी शीशपाल कठैत ने स्वास्थ्य मंत्री को अवगत कराया कि प्रदेश का फार्मासिस्ट वर्ग लंबे समय से अपनी जायज मांगों के लिए संघर्षरत है। प्रतिनिधिमंडल ने विशेष रूप से प्रदेश के ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिरों’ (पूर्ववर्ती उपकेंद्रों) में फार्मासिस्टों के पदों के सृजन और उन पर तत्काल नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करने का आग्रह किया।
संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे में फार्मासिस्ट एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं, लेकिन पदों की कमी और विसंगतियों के कारण हजारों प्रशिक्षित युवा बेरोजगार बैठे हैं।
30,000 बेरोजगारों का भविष्य दांव पर
संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुधीर सिंह रावत ने इस मुद्दे पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तराखंड में लगभग 30,000 बेरोजगार एलोपैथिक डिप्लोमा फार्मासिस्ट वर्षों से सरकारी सेवाओं में नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
रावत ने तकनीकी पहलुओं को स्पष्ट करते हुए बताया:
- पदों का विलोपन: पूर्व में प्रदेश के उपकेंद्रों के लिए 539 फार्मासिस्ट पदों को सृजित किया गया था।
- IPHS मानकों का प्रभाव: वर्तमान में प्रदेश में IPHS (Indian Public Health Standards) मानक लागू होने के कारण इन उपकेंद्रों को ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ के रूप में उच्चीकृत किया गया है, लेकिन इसके साथ ही उपकेंद्रों के फार्मासिस्ट पदों को अस्पतालों में समायोजित किया जा रहा है।
- पुनर्जीवित करने की मांग: संघ की स्पष्ट मांग है कि इन 539 पदों को न केवल पुनर्जीवित किया जाए, बल्कि प्रत्येक आयुष्मान आरोग्य मंदिर में कम से कम एक डिप्लोमा फार्मासिस्ट की नियुक्ति अनिवार्य की जाए ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर हो सकें।
मंत्री का आश्वासन: फार्मासिस्टों के हितों की होगी रक्षा
स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने संघ की बातों को अत्यंत धैर्यपूर्वक सुना और फार्मासिस्टों के योगदान की सराहना की। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त करते हुए कहा कि सरकार बेरोजगार युवाओं के हितों के प्रति संवेदनशील है।
”फार्मासिस्ट स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ हैं। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में पदों के सृजन और समायोजन के विषय पर विभाग के उच्च अधिकारियों के साथ समीक्षा की जाएगी। हम सुनिश्चित करेंगे कि फार्मासिस्टों के हितों को ध्यान में रखते हुए उचित और न्यायसंगत निर्णय लिया जाए।” — माननीय सुबोध उनियाल, स्वास्थ्य मंत्री
संघ की भविष्य की रणनीति
मुलाकात के बाद संघ के पदाधिकारियों ने उम्मीद जताई कि नए स्वास्थ्य मंत्री के कुशल नेतृत्व में फार्मासिस्टों की वर्षों पुरानी मांगों पर सकारात्मक कार्यवाही होगी। अमित जोशी ने कहा कि यदि सरकार इन 539 पदों को बहाल कर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करती है, तो इससे न केवल बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा, बल्कि दूरस्थ क्षेत्रों में आम जनता को दवाओं के वितरण और प्राथमिक उपचार में विशेषज्ञ परामर्श मिल सकेगा।
इस अवसर पर संगठन के कई अन्य सदस्य भी उपस्थित रहे और सभी ने एक स्वर में स्वास्थ्य मंत्री से जल्द ठोस कदम उठाने की अपील की।
