Iran war : ‘Hormurz’ को लेकर ब्रिटेन की बड़ी पहल, भारत के विदेश सचिव बैठक में होंगे शामिल
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Iran war : ‘Hormurz’ को लेकर ब्रिटेन की बड़ी पहल, भारत के विदेश सचिव बैठक में होंगे शामिल
लंदन/नई दिल्ली: रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराते काले बादलों को देखते हुए ब्रिटेन ने एक बड़ी कूटनीतिक पहल शुरू की है। सामरिक रूप से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ (Hormuz Strait) को बेरोकटोक खुला रखने के लिए ब्रिटेन ने एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई है। इस महत्वपूर्ण चर्चा में शामिल होने के लिए भारत को भी विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है, जिसमें भारत के विदेश सचिव देश का प्रतिनिधित्व करेंगे।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व और ब्रिटेन की चिंता
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया का वह ‘चोक पॉइंट’ है जहाँ से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% से 30% हिस्सा गुजरता है। ब्रिटेन इस बैठक की अगुवाई इसलिए कर रहा है ताकि युद्ध के कारण होने वाले आर्थिक प्रभावों को कम किया जा सके।दक्षिण एशिया पर प्रभाव: भारत जैसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाले देशों के लिए हॉर्मुज का खुला रहना ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से अनिवार्य है। तेल की कीमतों में मामूली बढ़ोत्तरी भी भारत की घरेलू महंगाई पर सीधा असर डालती है।यूरोप का संकट: दूसरी तरफ, ब्रिटेन सहित यूरोप के कई बड़े देश पहले से ही रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण तेल और गैस की किल्लत और आसमान छूती कीमतों से जूझ रहे हैं। हॉर्मुज में किसी भी प्रकार की बाधा यूरोप में ‘एनर्जी ब्लैकआउट’ जैसी स्थिति पैदा कर सकती है।
ब्रिटेन ने कितने देशों को किया आमंत्रित?
ब्रिटेन ने इस बैठक के लिए कुल 12 प्रमुख देशों को आमंत्रित किया है। इसमें जी-7 (G7) के सदस्य देशों के अलावा भारत, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब और कतर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रीय खिलाड़ियों को शामिल किया गया है। ब्रिटेन का लक्ष्य एक ऐसा ‘इंटरनेशनल मैरीटाइम प्रोटोकॉल’ तैयार करना है जो युद्ध की स्थिति में भी वाणिज्यिक जहाजों को सुरक्षित रास्ता प्रदान कर सके।
बैठक का मुख्य ‘एक्शन प्लान’ क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों के अनुसार, हॉर्मुज को खुला रखने के लिए निम्नलिखित योजनाओं पर चर्चा संभव है:नेवल एस्कॉर्ट सेवा: तेल टैंकरों को सुरक्षित निकालने के लिए मित्र देशों की नौसेनाओं का संयुक्त गश्ती दल तैनात करना।डिप्लोमैटिक कॉरिडोर: ईरान और अन्य क्षेत्रीय शक्तियों के साथ बातचीत कर जलमार्ग को ‘नो-वॉर ज़ोन’ घोषित करवाना।आपातकालीन स्टॉक शेयरिंग: यदि हॉर्मुज बाधित होता है, तो आमंत्रित देश एक-दूसरे के रणनीतिक तेल भंडारों का उपयोग कैसे करेंगे।
पुतिन से मिलेंगे सऊदी प्रिंस: शांति की नई उम्मीद
एक तरफ जहाँ लंदन में समुद्र को सुरक्षित करने की बात हो रही है, वहीं दूसरी तरफ युद्ध समाप्त करने के लिए बड़े स्तर पर मध्यस्थता (Mediation) शुरू हो गई है। सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से सीधी बातचीत करने का प्रस्ताव रखा है।
सऊदी अरब का यह कदम वैश्विक कूटनीति में गेम-चेंजर साबित हो सकता है। प्रिंस सलमान के पुतिन और पश्चिमी देशों, दोनों के साथ बेहतर संबंध हैं। उनका लक्ष्य एक ऐसा ‘सीजफायर’ फॉर्मूला तैयार करना है जिससे न केवल यूक्रेन में शांति बहाली हो, बल्कि वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की सप्लाई चेन फिर से सामान्य हो सके।
भारत की भूमिका: संतुलन और समाधान
भारत के विदेश सचिव की इस बैठक में उपस्थिति यह दर्शाती है कि नई दिल्ली अब केवल एक दर्शक नहीं, बल्कि वैश्विक समाधान प्रदाता (Global Solution Provider) है। भारत का रुख हमेशा से ‘डायलॉग और डिप्लोमेसी’ का रहा है। विदेश सचिव इस बैठक में भारत के हितों की रक्षा के साथ-साथ ग्लोबल साउथ (Global South) की आवाज भी उठाएंगे, जो तेल की बढ़ती कीमतों से सबसे ज्यादा प्रभावित है।
ब्रिटेन की यह पहल और सऊदी अरब की सक्रियता दिखाती है कि अब दुनिया युद्ध की थकान (War Fatigue) महसूस कर रही है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य का खुला रहना केवल व्यापार की बात नहीं है, बल्कि यह दुनिया भर के करोड़ों लोगों के किचन और उनकी जेब से जुड़ा मुद्दा है। यदि ब्रिटेन की यह बैठक और सऊदी अरब की मध्यस्थता सफल रहती है, तो यह 2026 की सबसे बड़ी कूटनीतिक जीत मानी जाएगी।
