MP CM In Varanasi: बनारस की गलियों में दिखा मुख्यमंत्री मोहन यादव का ‘खांटी अंदाज’, पत्नी संग चखा कचौड़ी-जलेबी का स्वाद
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MP CM In Varanasi: बनारस की गलियों में दिखा मुख्यमंत्री मोहन यादव का ‘खांटी अंदाज’, पत्नी संग चखा कचौड़ी-जलेबी का स्वाद
वाराणसी: धर्म और आध्यात्म की नगरी काशी में इन दिनों मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का एक अलग ही रूप देखने को मिल रहा है। अपने दो दिवसीय वाराणसी प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री पूरी तरह से बनारसी रंग में रंगे नजर आए। शनिवार को उन्होंने अपनी धर्मपत्नी के साथ मिंट हाउस स्थित प्रसिद्ध ‘श्रीराम भंडार’ पहुंचकर काशी के पारंपरिक नाश्ते—कचौड़ी और जलेबी का लुत्फ उठाया।
सादगी ने जीता दिल: खुद पर्स से निकालकर चुकाए पैसे
आमतौर पर वीआईपी दौरों में प्रोटोकॉल और सुरक्षा का सख्त घेरा होता है, लेकिन डॉ. मोहन यादव ने अपनी सादगी से वहां मौजूद लोगों का दिल जीत लिया। ताज होटल के पास स्थित दुकान पर उन्होंने आम नागरिक की तरह कचौड़ी-जलेबी खाई और उसके बाद खुद अपने पर्स से पैसे निकालकर दुकानदार को भुगतान किया। मुख्यमंत्री का यह ‘खांटी’ अंदाज सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा का विषय बना हुआ है।
काशी और उज्जैन के बीच सांस्कृतिक सेतु
मीडिया से एक्सक्लूसिव बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के रिश्तों में अब एक नया आयाम जुड़ रहा है। उन्होंने कहा:
”बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी और बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन के बीच एक नई शुरुआत हुई है। बनारस दुनिया की सबसे अनोखी नगरी है और यहाँ का स्वाद भी उतना ही अद्भुत है।”
उन्होंने ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय महाकाल’ के उद्घोष के साथ दोनों राज्यों की सांस्कृतिक एकता पर बल दिया।
सम्राट विक्रमादित्य के जीवन दर्शन का मंचन
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पिछले दो दिनों से बनारस में हैं। इस प्रवास का मुख्य उद्देश्य मध्य प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित सम्राट विक्रमादित्य के जीवन पर आधारित नाटक का मंचन है। मध्य प्रदेश सरकार विक्रमादित्य के गौरवशाली इतिहास और उनके न्यायप्रिय शासन के दर्शन को जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास कर रही है। इस आयोजन में मध्य प्रदेश के कई दिग्गज कलाकार अपनी प्रस्तुति दे रहे हैं।
महाकाल से विश्वनाथ तक: एक नया अध्याय
मुख्यमंत्री ने बताया कि उज्जैन के महाकाल मंदिर और काशी विश्वनाथ मंदिर के बीच एक गहरा आध्यात्मिक संबंध है। सम्राट विक्रमादित्य का इतिहास इन दोनों ही शहरों से जुड़ा रहा है। उन्होंने कहा कि जिस तरह विक्रमादित्य ने धर्म और न्याय की स्थापना की थी, उसी गौरव को आज की पीढ़ी के सामने लाना सरकार की प्राथमिकता है।
मुख्य आकर्षण:स्थान: श्रीराम भंडार, मिंट हाउस (ताज होटल के पास), वाराणसी।मेन्यू: बनारसी कचौड़ी, जलेबी और कुल्हड़ वाली लस्सी।संदेश: काशी और उज्जैन के बीच सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों की मजबूती।
