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देवभूमि में आत्मनिर्भरता की नई इबारत: भारतीय सेना और नेचर ऑर्गेनिक सोसाइटी के बीच ‘प्रोजेक्ट सद्भावना’ को लेकर ऐतिहासिक समझौता

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देवभूमि में आत्मनिर्भरता की नई इबारत: भारतीय सेना और नेचर ऑर्गेनिक सोसाइटी के बीच ‘प्रोजेक्ट सद्भावना’ को लेकर ऐतिहासिक समझौता

​सोहन सिंह चमोली/जोशीमठ: सीमांत जनपद चमोली के लिए आज का दिन स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा। भारतीय सेना की प्रतिष्ठित इकाई गढ़वाल स्काउट्स और नेचर ऑर्गेनिक सोसाइटी, चमोली के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता सेना की “प्रोजेक्ट सद्भावना” पहल के तहत चमतौली (जोशीमठ) में स्थित हर्बल खेती और प्रसंस्करण इकाई के कायाकल्प और विस्तार के लिए किया गया है।

​इस ऐतिहासिक अवसर पर सेना के अधिकारियों, वैज्ञानिकों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में उत्तराखंड की जड़ी-बूटियों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने और स्थानीय ग्रामीणों के पलायन को रोकने का संकल्प लिया गया।

सेना का भरोसा, विकास का नया रास्ता

​भारतीय सेना ने चमोली जिले में जड़ी-बूटी संरक्षण, वैज्ञानिक खेती और विपणन के क्षेत्र में नेचर ऑर्गेनिक सोसाइटी के पिछले कई वर्षों के उत्कृष्ट कार्यों को देखते हुए इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए उनका चयन किया है। इस MoU के तहत नेचर ऑर्गेनिक सोसाइटी और चमतौली हर्बल प्रोसेसिंग कोऑपरेटिव सोसाइटी अब संयुक्त रूप से इस परियोजना का संचालन करेंगी।

​सेना द्वारा सौंपी गई इस जिम्मेदारी में न केवल वर्तमान प्रसंस्करण इकाई (Processing Unit) का प्रबंधन शामिल है, बल्कि भविष्य में इसके विस्तार और आधुनिकिकरण का नेतृत्व भी नेचर ऑर्गेनिक सोसाइटी ही करेगी।

परियोजना के मुख्य उद्देश्य: सशक्तिकरण की ओर कदम

​इस समझौते का मुख्य उद्देश्य हिमालयी क्षेत्र की दुर्लभ जड़ी-बूटियों को आर्थिक आधार बनाना है। MoU में सात प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है:​वैज्ञानिक पद्धति से खेती: चमतौली और आसपास के क्षेत्रों में पॉलीहाउस और खुले खेतों में औषधीय एवं सुगंधित पौधों (MAPs) की आधुनिक और वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देना।​विश्वस्तरीय प्रसंस्करण: हर्बल प्लांट में ग्रेडिंग, पैकेजिंग और भंडारण की ऐसी प्रणाली विकसित करना जो अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हो।​मार्केट लिंकेज: नेचर ऑर्गेनिक सोसाइटी यह सुनिश्चित करेगी कि किसानों द्वारा तैयार उत्पादों को सीधे बड़े बाजारों और खरीदारों से जोड़ा जाए, ताकि बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो।​कौशल विकास: स्थानीय युवाओं और महिलाओं के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित करना, ताकि वे जड़ी-बूटी उत्पादन में विशेषज्ञ बन सकें।​पारदर्शी व्यापार: किसानों से जड़ी-बूटियों की खरीद पूरी तरह पारदर्शी और लाभकारी मूल्य पर की जाएगी।​वैल्यू चेन का निर्माण: खेती से लेकर पैकेजिंग और अंततः बाजार तक की एक अटूट सप्लाई चेन विकसित करना।​सामुदायिक भागीदारी: पूरे प्रोजेक्ट को एक सामुदायिक मॉडल के रूप में विकसित करना, जिससे चमतौली गांव के हर घर की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके।

महिला सशक्तिकरण और रोजगार पर जोर

​नेचर ऑर्गेनिक सोसाइटी ने इस अवसर पर विश्वास जताया कि ‘प्रोजेक्ट सद्भावना’ के माध्यम से चमतौली हर्बल प्रोसेसिंग कोऑपरेटिव सोसाइटी की महिलाओं को सीधे तौर पर लाभ मिलेगा। चूँकि उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में कृषि की कमान महिलाओं के हाथ में है, इसलिए यह इकाई उन्हें आत्मनिर्भर बनाने और स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार उपलब्ध कराने में मील का पत्थर साबित होगी।

समारोह में उपस्थित गणमान्य अतिथि

​MoU हस्ताक्षर समारोह के दौरान गढ़वाल स्काउट्स के ब्रिगेडियर गौरव वत्रा, कमांडिंग ऑफिसर (CO) मेजर पुष्पेंद्र राठौर और भारतीय सेना के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। साथ ही, जिला भेषज संघ चमोली के सचिव विवेक मिश्रा, जड़ी-बूटी शोध एवं विकास संस्थान (HRDI) के वैज्ञानिक अरविंद भंडारी, और उद्यान विभाग के अधिकारियों ने भी शिरकत की।

​संस्था ने विशेष रूप से HRDI गोपेश्वर और जिला भेषज संघ चमोली का आभार व्यक्त किया, जिनके संदर्भ और तकनीकी सहयोग से यह गठबंधन संभव हो सका।

​भारतीय सेना की यह पहल केवल एक समझौता नहीं, बल्कि देवभूमि के संसाधनों को सहेजने की एक बड़ी कोशिश है। ‘प्रोजेक्ट सद्भावना’ के माध्यम से अब जोशीमठ के सुदूर क्षेत्रों की जड़ी-बूटियाँ सेना के संरक्षण और विशेषज्ञों की देखरेख में दुनिया भर के बाजारों तक पहुँचेंगी।

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