चमोली: तपोवन-विष्णुगाड परियोजना प्रभावितों का धरना स्थगित, जिलाधिकारी की मध्यस्थता से बनी सहमति
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चमोली: तपोवन-विष्णुगाड परियोजना प्रभावितों का धरना स्थगित, जिलाधिकारी की मध्यस्थता से बनी सहमति
सोहन सिंह चमोली (उत्तराखंड)। 08 अप्रैल 2026 उत्तराखंड के चमोली जिले में पिछले कुछ समय से तपोवन-विष्णुगाड जल विद्युत परियोजना के खिलाफ चल रहा प्रभावित ग्रामीणों का आंदोलन अब विराम की ओर है। जिलाधिकारी गौरव कुमार की अध्यक्षता में आयोजित एक महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय बैठक के बाद, ग्रामीणों ने अपने धरने को स्थगित करने पर सहमति जता दी है। इस बैठक में तहसील प्रशासन, एनटीपीसी (NTPC) के अधिकारी और परियोजना प्रभावित गांवों के जनप्रतिनिधि शामिल हुए।
जिलाधिकारी की अध्यक्षता में निर्णायक बैठक
बुधवार को जोशीमठ तहसील सभागार में आयोजित इस बैठक का मुख्य उद्देश्य परियोजना प्रभावितों और एनटीपीसी प्रबंधन के बीच व्याप्त गतिरोध को समाप्त करना था। बैठक के दौरान जिलाधिकारी गौरव कुमार ने ग्रामीणों की समस्याओं को बेहद संजीदगी से सुना। उन्होंने एनटीपीसी के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि स्थानीय युवाओं की भावनाओं और उनकी आजीविका का सम्मान किया जाए।
जिलाधिकारी ने कहा कि परियोजना के सुचारू संचालन के लिए स्थानीय जनता का विश्वास जीतना अनिवार्य है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रभावित क्षेत्रों के विकास और वहां के निवासियों के हितों की रक्षा करना प्रशासन की प्राथमिकता है।
रोजगार और मुआवजे पर बनी बात
बैठक में मुख्य रूप से दो बिंदुओं पर चर्चा केंद्रित रही:स्थानीय रोजगार: जिलाधिकारी ने एनटीपीसी प्रबंधन को निर्देशित किया कि परियोजना कार्य में स्थानीय युवाओं को उनकी क्षमता और योग्यता के अनुरूप नियमों के तहत रोजगार दिया जाए।चारापत्ती मुआवजा: ग्रामीणों की एक बड़ी मांग चारापत्ती के मुआवजे को लेकर थी। इस पर जिलाधिकारी ने आश्वासन दिया कि वे शासन और भारत सरकार के स्तर पर वार्ता कर इस मुद्दे का स्थाई निस्तारण करेंगे।
एनटीपीसी के परियोजना प्रमुख एके शुक्ला ने भी सकारात्मक रुख अपनाते हुए कहा कि कंपनी प्रबंधन ग्रामीणों की मांगों के प्रति गंभीर है और रोजगार व अन्य मुद्दों पर उच्चाधिकारियों से वार्ता कर त्वरित कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
परियोजना प्रभावितों की प्रमुख मांगें और आश्वासन
ग्रामीण लंबे समय से मांग कर रहे थे कि एनटीपीसी परियोजना के कारण उनकी कृषि और दैनिक चर्या पर जो प्रभाव पड़ा है, उसकी भरपाई की जाए। बैठक में जनप्रतिनिधियों ने निम्नलिखित बिंदुओं को प्रमुखता से उठाया:क्षमता आधारित रोजगार: स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर कंपनी में रिक्त पदों पर समायोजित करना।मुआवजा वितरण: चारापत्ती और अन्य भूमि संबंधित मुआवजे की रुकी हुई प्रक्रिया को तेज करना।सीएसआर गतिविधियां: प्रभावित गांवों में बुनियादी सुविधाओं (शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क) के लिए एनटीपीसी के सीएसआर फंड का पारदर्शी उपयोग।
जिलाधिकारी के आश्वासन और एनटीपीसी के सकारात्मक रुख के बाद, प्रधान संघ के ब्लॉक अध्यक्ष मोहन लाल बजवाल सहित अन्य प्रतिनिधियों ने धरना स्थगित करने का निर्णय लिया।
बैठक में उपस्थित महत्वपूर्ण व्यक्तित्व
इस महत्वपूर्ण बैठक में शासन, प्रशासन और जनशक्ति का समन्वय देखने को मिला। बैठक में निम्नलिखित गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे:ऋषि प्रसाद सती: उपाध्यक्ष, बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC)गजपाल बर्तवाल: भाजपा जिलाध्यक्षचंद्रशेखर वशिष्ठ: उप जिलाधिकारी (SDM)एके शुक्ला: परियोजना प्रमुख, एनटीपीसीसुगाता दास गुप्ता: एजीएम (एचआर), एनटीपीसीजनप्रतिनिधि: सभासद प्रवेश डिमरी, ग्राम प्रधान रोशना देवी, विनीता देवी, लक्ष्मी देवी, मिथलेश फर्स्वाण और क्षेत्र पंचायत सदस्य वर्षा देवी आदि।
विकास और विश्वास का संतुलन
तपोवन-विष्णुगाड जल विद्युत परियोजना उत्तराखंड की ऊर्जा जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका सफल क्रियान्वयन तभी संभव है जब स्थानीय समुदाय इसमें भागीदार बने। जिलाधिकारी गौरव कुमार की इस पहल ने न केवल एक प्रशासनिक गतिरोध को तोड़ा है, बल्कि ग्रामीणों के मन में सरकार के प्रति विश्वास भी जगाया है।
अब सबकी नजरें एनटीपीसी के अगले कदमों और शासन स्तर पर होने वाली वार्ता पर टिकी हैं। यदि आश्वासन समय पर पूरे होते हैं, तो यह क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए एक नया अध्याय साबित होगा
