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BHU Campus Fire TODAY: बनारस विश्वविद्यालय परिसर में भीषण आग से मचा हड़कंप, फायर सेफ्टी मानकों पर उठे गंभीर सवाल

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BHU Campus Fire TODAY: बनारस विश्वविद्यालय परिसर में भीषण आग से मचा हड़कंप, फायर सेफ्टी मानकों पर उठे गंभीर सवाल

​बनारस /डेस्क: बनारस हिंदू वश्वविद्यालय  मंदिर में उस वक्त चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई, जब विश्वविद्यालय के प्रशासनिक खंड में अचानक भीषण आग लग गई। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के आईएमएस कैंपस में  आग लगी है। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि देखते ही देखते धुएं के गुबार ने पूरे आसमान को घेर लिया। इस घटना ने न केवल विश्वविद्यालय प्रशासन की सुरक्षा तैयारियों की पोल खोल दी है, बल्कि छात्रों के बीच भी दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।

छात्रों ने दिखाई बहादुरी, निजी टैंकरों से शुरू हुआ बचाव कार्य

​जैसे ही आग लगने की सूचना मिली, परिसर में मौजूद सैकड़ों छात्र-छात्राएं मौके पर जमा हो गए। शुरुआती दौर में जब तक दमकल विभाग की गाड़ियां पहुंचती, छात्रों और विश्वविद्यालय स्टाफ ने सूझबूझ का परिचय दिया। पास में मौजूद निजी पानी के टैंकरों को तुरंत बुलाया गया और आग पर काबू पाने की कोशिश शुरू की गई।

​प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, स्थिति इतनी भयावह थी कि कार्यालयों में रखा कीमती सामान और दस्तावेज जलने की कगार पर थे। कई जांबाज छात्रों ने अपनी परवाह न करते हुए कार्यालय के सामान को सुरक्षित बाहर निकालने में मदद की। इस दौरान अफरा-तफरी के बीच कई छात्र अपने मोबाइल कैमरों में इस मंजर को कैद करते भी नजर आए।

फायर ब्रिगेड की मशक्कत और जांच के आदेश

​सूचना मिलते ही पुलिस बल और फायर ब्रिगेड की गाड़ियां घटना स्थल पर पहुंचीं। घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद दमकल कर्मियों ने आग पर पूरी तरह काबू पाया। हालांकि, तब तक कार्यालय के एक बड़े हिस्से को नुकसान पहुंच चुका था। गनीमत यह रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन संपत्ति का काफी नुकसान होने का अनुमान है।

​विश्वविद्यालय के प्रशासनिक अधिकारी और शिक्षक भी मौके पर डटे रहे। पुलिस प्रशासन ने अब आग लगने के कारणों की तकनीकी जांच शुरू कर दी है। प्राथमिक तौर पर इसे ‘शॉर्ट सर्किट’ का मामला माना जा रहा है, लेकिन किसी अन्य मानवीय चूक या साजिश के पहलू से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।

सवालों के घेरे में ‘फायर सेफ्टी ऑडिट’

​इस घटना ने विश्वविद्यालय प्रबंधन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। मौके पर मौजूद लोगों का आरोप है कि परिसर में लगे ‘फायर एक्सटिंग्विशर’ (अग्निशमन यंत्र) समय पर काम नहीं आए, जिससे आग विकराल होती गई। अब छात्र और अभिभावक मांग कर रहे हैं कि:क्या विश्वविद्यालय का Fire Safety Audit नियमित रूप से किया जा रहा था?​आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त संसाधन मौजूद क्यों नहीं थे?​गर्मी का सीजन (Summer Season) शुरू होने से पहले सुरक्षा इंतजाम पुख्ता क्यों नहीं किए गए?

आगामी चुनौतियां और प्रशासन का रुख

​आने वाले दिनों में बढ़ते तापमान और शुष्क मौसम के कारण आग की घटनाएं बढ़ने की आशंका रहती है। ऐसे में यह अग्निकांड एक ‘वेक-अप कॉल’ की तरह है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि वे सुरक्षा मानकों की समीक्षा करेंगे और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल, पुलिस और फॉरेंसिक टीम साक्ष्य जुटाने में लगी है ताकि आग लगने की असली वजह सामने आ सके।

​इस अग्निकांड ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सार्वजनिक संस्थानों में केवल दिखावे के लिए सुरक्षा उपकरण टांगना काफी नहीं है, बल्कि उनका क्रियाशील होना और समय-समय पर ऑडिट होना अनिवार्य है।

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