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चमोली में डिजिटल क्रांति के साथ जनगणना 2027 का शंखनाद: जिलाधिकारी ने खुद ‘स्वगणना’ कर किया शुभारंभ

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चमोली में डिजिटल क्रांति के साथ जनगणना 2027 का शंखनाद: जिलाधिकारी ने खुद ‘स्वगणना’ कर किया शुभारंभ

चमोली | संवाददाता: सोहन सिंह

​देवभूमि उत्तराखंड के सीमांत जनपद चमोली में जनगणना 2027 की प्रक्रिया ने अपनी आधिकारिक दस्तक दे दी है। शुक्रवार को जिलाधिकारी गौरव कुमार ने स्वयं अपना डिजिटल प्रपत्र भरकर इस महाअभियान का विधिवत शुभारंभ किया। इस बार की जनगणना अपनी विशिष्ट कार्यप्रणाली के कारण चर्चा में है, क्योंकि भारत सरकार के डिजिटल इंडिया विजन के तहत यह पूरी प्रक्रिया पेपरलेस और तकनीक-आधारित होने जा रही है।

डिजिटल जनगणना: अब आपकी जानकारी, आपके मोबाइल पर

​जिलाधिकारी गौरव कुमार ने कलेक्ट्रेट परिसर में अभियान की शुरुआत करते हुए कहा कि जनगणना 2027 देश के विकास की नई इबारत लिखेगी। जनपद में 10 अप्रैल से 24 अप्रैल तक ‘स्वगणना (Self-Enumeration)’ का विशेष पखवाड़ा आयोजित किया जा रहा है।

​इस नई व्यवस्था के तहत अब नागरिकों को गणना कार्मिकों के घर आने का इंतजार करने की आवश्यकता नहीं है। जिलाधिकारी ने बताया कि:

  • ​नागरिक अपने स्मार्टफोन, लैपटॉप या कंप्यूटर के जरिए se.census.gov.in वेबसाइट पर जाकर अपनी और अपने परिवार की जानकारी दर्ज कर सकते हैं।
  • ​यह प्रक्रिया न केवल समय की बचत करेगी, बल्कि आंकड़ों की शुद्धता (Accuracy) को भी सुनिश्चित करेगी।
  • ​स्वगणना अभियान समाप्त होने के बाद, जो लोग किसी कारणवश ऑनलाइन जानकारी नहीं भर पाएंगे, उनके घर जाकर जनगणना कर्मी फील्ड वर्क करेंगे।

कलेक्ट्रेट से शुरू हुआ जागरूकता का संदेश

​अभियान के पहले दिन जिलाधिकारी के साथ ही अपर जिलाधिकारी विवेक प्रकाश ने भी तकनीक का उपयोग करते हुए मोबाइल के माध्यम से अपना ऑनलाइन स्वगणना प्रपत्र भरा। अधिकारियों ने स्वयं उदाहरण पेश कर आम जनता को यह संदेश दिया कि डिजिटल माध्यम से जानकारी साझा करना सुरक्षित और सरल है।

​जिलाधिकारी ने जनपदवासियों से भावुक अपील करते हुए कहा:

​”जनगणना केवल सिरों की गिनती नहीं है, बल्कि यह भविष्य की सरकारी योजनाओं, बुनियादी ढांचों और संसाधनों के वितरण का आधार है। चमोली के प्रत्येक जागरूक नागरिक को इस अभियान में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए।”

 

अभियान की रूपरेखा: 15 दिनों का विशेष अवसर

​चमोली जैसे कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले जनपद में डिजिटल जनगणना एक वरदान साबित हो सकती है। प्रशासन ने इसके लिए पुख्ता तैयारी की है:

  1. समय सीमा: स्वगणना पोर्टल 24 अप्रैल तक सक्रिय रहेगा।
  2. सहयोग: इसके बाद प्रगणक (Enumerators) घर-घर जाकर द्वितीय चरण का कार्य संपन्न करेंगे।
  3. तकनीकी सहायता: यदि किसी नागरिक को पोर्टल पर जानकारी दर्ज करने में समस्या आती है, तो उनके लिए तहसील और ब्लॉक स्तर पर सहायता केंद्र भी सक्रिय किए जा रहे हैं।

क्यों खास है जनगणना 2027?

​यह पहली बार है जब भारत की जनगणना पूरी तरह डिजिटल फॉरमेट में हो रही है। इससे आंकड़ों के विश्लेषण में लगने वाले वर्षों के समय को कम किया जा सकेगा। विशेष रूप से चमोली के सीमावर्ती क्षेत्रों और दुर्गम गांवों के लिए यह डेटा भविष्य में आपदा प्रबंधन और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार में मील का पत्थर साबित होगा।

​आज के कार्यक्रम में जिला प्रशासन के विभिन्न वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। ‘स्वगणना’ के पहले दिन ही जनपद में इसे लेकर काफी उत्साह देखा गया, जो चमोली की डिजिटल साक्षरता की ओर एक सकारात्मक कदम है।

ब्यूरो रिपोर्ट: सोहन सिंह, चमोली

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