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गाजीपुर सपा प्रतिनिधिमंडल पर जानलेवा हमला, अखिलेश यादव ने कहा- ‘यूपी में अराजकता का सबसे काला दौर’

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गाजीपुर सपा प्रतिनिधिमंडल पर जानलेवा हमला, अखिलेश यादव ने कहा- ‘यूपी में अराजकता का सबसे काला दौर’

गाजीपुर/लखनऊ: उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में उस वक्त हड़कंप मच गया जब एक पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे समाजवादी पार्टी (सपा) के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल पर भीड़ ने अचानक हमला बोल दिया। इस हिंसक झड़प में पूर्व मंत्री राम आश्रय विश्वकर्मा सहित सपा के कई नेता और कार्यकर्ता घायल हुए हैं। इस घटना ने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसे लेकर सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर तीखा हमला बोला है।

घटनाक्रम: सांत्वना देने जा रहे नेताओं पर बरसाए पत्थर

​जानकारी के मुताबिक, गाजीपुर के एक गांव में पिछले दिनों एक लड़की की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई थी। इसी मामले में पीड़ित परिजनों से मिलने और संवेदना व्यक्त करने के लिए अखिलेश यादव के निर्देश पर सपा का एक प्रतिनिधिमंडल गांव की ओर कूच कर रहा था। इस डेलिगेशन में पूर्व मंत्री राम आश्रय विश्वकर्मा के साथ पार्टी के कई विधायक और वरिष्ठ नेता शामिल थे।

​जैसे ही नेताओं का काफिला गांव की सीमा में दाखिल हुआ, वहां मौजूद ग्रामीणों और कुछ ‘वर्चस्ववादी’ तत्वों ने उनका रास्ता रोक लिया। देखते ही देखते विरोध प्रदर्शन हिंसा में बदल गया।

जमकर हुआ पथराव: विरोध कर रहे लोगों ने सपा नेताओं के वाहनों पर पत्थरबाजी शुरू कर दी।​नेताओं की एंट्री पर रोक: ग्रामीणों का कहना था कि वे इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं होने देंगे और गांव में सपा नेताओं की एंट्री नहीं होने दी जाएगी।​आमने-सामने हुए दो पक्ष: विरोध के बाद दोनों पक्षों में तीखी नोकझोंक हुई, जिसके बाद हुई मारपीट में पूर्व मंत्री राम आश्रय विश्वकर्मा और कई अन्य प्रतिनिधि घायल हो गए।

अखिलेश यादव का आक्रोश: “कानून व्यवस्था पूरी तरह चौपट”

​इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गहरी नाराजगी जताई है। उन्होंने इस हमले को ‘लोकतंत्र की हत्या’ करार दिया है।​अखिलेश यादव का बयान: “उत्तर प्रदेश में अराजकता अपने चरम पर है। जब प्रदेश के पूर्व मंत्री और विधायक ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता का क्या होगा? भाजपा के राज में कानून व्यवस्था पूरी तरह चौपट हो चुकी है। हमारे नेताओं पर हमला यह दर्शाता है कि अपराधियों को सत्ता का संरक्षण प्राप्त है।”

​अखिलेश यादव ने आगे कहा कि भाजपा सरकार में कोई भी सुरक्षित नहीं है और यह ‘अराजकता का सबसे खराब दौर’ है। उन्होंने मांग की है कि हमलावरों और उपद्रवियों को तत्काल गिरफ्तार कर उन पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए।

सियासी सरगर्मी और पुलिस की भूमिका

​घटना की सूचना मिलते ही भारी पुलिस बल मौके पर तैनात कर दिया गया है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, स्थिति को नियंत्रण में करने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, सपा का आरोप है कि पुलिस की मौजूदगी में ही नेताओं पर हमला किया गया और प्रशासन मूकदर्शक बना रहा।

​समाजवादी पार्टी के नेताओं का आरोप है कि यह हमला सोची-समझी साजिश का हिस्सा है ताकि विपक्ष को पीड़ितों की आवाज उठाने से रोका जा सके। वहीं, स्थानीय स्तर पर इसे ग्रामीणों का आक्रोश बताया जा रहा है।

 सुलगते सवाल

​गाजीपुर की इस घटना ने प्रदेश की राजनीति में नया उबाल ला दिया है। एक तरफ जहां सरकार ‘राम राज्य’ और ‘अपराध मुक्त प्रदेश’ का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर एक राष्ट्रीय स्तर की पार्टी के डेलिगेशन पर दिनदहाड़े हमला होना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।

​क्या यह केवल ग्रामीणों का स्वतः स्फूर्त विरोध था या फिर इसके पीछे कोई राजनीतिक साजिश? फिलहाल, घायल राम आश्रय विश्वकर्मा का उपचार जारी है और सपा ने ऐलान किया है कि वे इस ‘अन्याय’ के खिलाफ सड़क से सदन तक अपनी आवाज बुलंद करेंगे। उत्तर प्रदेश में आदिवासियों और पिछड़ों के अधिकारों की बात करने वाले नेताओं पर हुआ यह हमला आने वाले दिनों में सियासी संग्राम को और तेज करने वाला है।

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