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नारी सम्मान और लोकतंत्र में अधिकार होगा उत्तराखंड विधानसभा के विशेष सत्र का मुद्दा: ऋतु खंडूरी

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नारी सम्मान और लोकतंत्र में अधिकार होगा उत्तराखंड विधानसभा के विशेष सत्र का मुद्दा: ऋतु खंडूरी

देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति में आगामी 28 अप्रैल का दिन बेहद महत्वपूर्ण होने जा रहा है। विधानसभा अध्यक्ष रितु खंडूरी भूषण के आह्वान पर प्रदेश विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र आयोजित किया जा रहा है। इस सत्र का मुख्य केंद्र ‘नारी सम्मान और लोकतंत्र में अधिकार’ जैसे संवेदनशील और गौरवशाली विषय को रखा गया है। जहाँ एक ओर सत्ता पक्ष इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम बता रहा है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष की सक्रियता ने इस सत्र के हंगामेदार होने के संकेत दे दिए हैं।

सत्र की रूपरेखा और विधायी कार्य

​विधानसभा अध्यक्ष रितु खंडूरी के अनुसार, इस विशेष सत्र का उद्देश्य राजनीति और समाज में महिलाओं की भागीदारी और उनके लोकतांत्रिक अधिकारों पर व्यापक चर्चा करना है। सत्र की कार्ययोजना को अंतिम रूप देने के लिए 27 अप्रैल को कार्य मंत्रणा समिति की बैठक बुलाई गई है।​बैठक का समय: दोपहर बाद कार्य मंत्रणा समिति की बैठक होगी।​सर्वदलीय बैठक: इसके तत्काल बाद सर्वदलीय बैठक का आयोजन किया जाएगा ताकि सत्र के सुचारू संचालन पर सहमति बन सके।​विधायी कार्य: इस विशेष सत्र की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें कोई नया विधेयक (Bill) पेश नहीं किया जाएगा और न ही सरकार कोई अन्य विधाई कार्य संपन्न करेगी। यह पूरी तरह से संसदीय परंपराओं के तहत केवल निर्धारित विषय पर चर्चा के लिए समर्पित होगा।

सियासी वार-पलटवार और विपक्ष का रुख

​विधानसभा अध्यक्ष ने हाल ही में लोकसभा में पारित महिला आरक्षण बिल का जिक्र करते हुए विपक्ष की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि चर्चा के दौरान इस बात पर भी मंथन होगा कि महिलाओं से जुड़े गंभीर मुद्दों पर विपक्ष का रुख नकारात्मक क्यों रहता है।

​दूसरी ओर, विपक्ष भी सदन में सत्ता पक्ष को घेरने की पूरी तैयारी में है। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने स्पष्ट किया है कि विपक्ष पूरी मजबूती के साथ सदन में पहुंचेगा। सूत्रों के हवाले से यह भी खबर है कि सदन में निंदा प्रस्ताव भी लाया जा सकता है, जो सत्र की गर्मी को और बढ़ा सकता है। विपक्ष का तर्क है कि नारी सम्मान केवल चर्चा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि धरातल पर उनकी सुरक्षा और अधिकारों के लिए ठोस काम होने चाहिए।

अधिसूचना और राज्यपाल का अनुमोदन

​संसदीय प्रक्रियाओं के अनुसार, सत्र आहूत करने की फाइल राजभवन भेजी जा चुकी है और वर्तमान में राज्यपाल के अनुमोदन की प्रतीक्षा की जा रही है। जैसे ही राजभवन से स्वीकृति प्राप्त होगी, विधानसभा के आहुति की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। प्रशासन और विधानसभा सचिवालय ने सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं।

 चर्चा या सियासी दंगल?

​उत्तराखंड विधानसभा के इतिहास में इस तरह के विशेष सत्र का अपना महत्व है। जहाँ सत्ता पक्ष इस मंच के माध्यम से अपनी ‘महिला हितैषी’ छवि को मजबूत करना चाहता है, वहीं विपक्ष इसे केवल एक राजनीतिक स्टंट करार दे रहा है।​विधानसभा अध्यक्ष रितु खंडूरी का कथन: “लोकतंत्र में अधिकार और नारी का सम्मान सर्वोपरि है। हम चाहते हैं कि पक्ष और विपक्ष दोनों मिलकर इस मुद्दे पर स्वस्थ चर्चा करें और एक सकारात्मक संदेश समाज में जाए।”

 

​अब देखना दिलचस्प होगा कि 28 अप्रैल को सदन की कार्यवाही केवल चर्चा तक सीमित रहती है या फिर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक का नया अध्याय शुरू होता है। नारी शक्ति के सम्मान के नाम पर आयोजित यह सत्र प्रदेश की राजनीति को कौन सी नई दिशा देगा, यह भविष्य के गर्भ में है।

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