सावधान! फोन पर अचानक बजी तेज घंटी: उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन का बड़ा ‘मॉक ड्रिल’, जानें क्या है सरकार का ‘सीवियर अलर्ट’ प्लान
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सावधान! फोन पर अचानक बजी तेज घंटी: उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन का बड़ा ‘मॉक ड्रिल’, जानें क्या है सरकार का ‘सीवियर अलर्ट’ प्लान
देहरादून: उत्तराखंड जैसे आपदा संवेदनशील राज्य में अब तकनीक के जरिए लोगों की जान बचाने की दिशा में सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। शनिवार को प्रदेशभर में हजारों लोगों के मोबाइल फोन अचानक तेज वाइब्रेशन और एक विशेष सायरन जैसी घंटी के साथ गूंज उठे। स्क्रीन पर ‘Extremely Severe Alert’ का पॉप-अप मैसेज फ्लैश हुआ। अगर आपके साथ भी ऐसा हुआ है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। यह उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) और नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDMA) द्वारा किया गया एक ‘मॉक ड्रिल’ परीक्षण है।
क्या है यह ‘सेल ब्रॉडकास्ट’ अलर्ट सिस्टम?
भारत सरकार द्वारा स्वदेशी तकनीक से विकसित यह ‘सेल ब्रॉडकास्ट अलर्ट सिस्टम’ एक ऐसी तकनीक है, जिसके जरिए आपदा की स्थिति में एक साथ एक निश्चित क्षेत्र के सभी मोबाइल उपभोक्ताओं को संदेश भेजा जा सकता है। खास बात यह है कि इस संदेश के लिए आपके फोन में इंटरनेट होना या नेटवर्क का फुल होना अनिवार्य नहीं है। जैसे ही सरकार वहां के टॉवरों से सिग्नल भेजेगी, हर सक्रिय फोन पर तेज अलार्म बजने लगेगा।
क्यों किया जा रहा है यह परीक्षण?
उत्तराखंड में भारी बारिश, भूस्खलन, बाढ़ और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा हमेशा बना रहता है। ऐसे में समय रहते लोगों तक सूचना पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती होती है। आज के मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य यह जांचना था कि:आपदा के वक्त अलर्ट मैसेज लोगों तक कितनी तेजी से पहुंचता है।क्या सायरन की आवाज इतनी प्रभावी है कि सोते हुए व्यक्ति को भी सतर्क कर सके।नेटवर्क की भीड़भाड़ के बावजूद क्या संदेश बिना देरी के डिलीवर हो रहा है।
मैसेज में क्या लिखा है?
लोगों के फोन पर हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में संदेश आ रहा है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि:“यह भारत सरकार के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा कार्यान्वित किए जा रहे सेल ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम का एक नमूना परीक्षण संदेश है। कृपया इस पर ध्यान न दें, क्योंकि वास्तविक आपदा की स्थिति में इसके लिए आपकी ओर से किसी कार्रवाई की आवश्यकता नहीं है।”
बारिश और आपदा के दौरान ‘लाइफ-सेवर’ बनेगा यह सिस्टम
आगामी मॉनसून और चारधाम यात्रा के मद्देनजर यह सिस्टम उत्तराखंड के लिए वरदान साबित हो सकता है। यदि किसी क्षेत्र में बादल फटने या अचानक जलस्तर बढ़ने की आशंका होगी, तो सरकार तुरंत उस रेडियस में मौजूद सभी श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों को अलर्ट भेज देगी। इससे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए कीमती समय मिल सकेगा।
उत्तराखंड आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की तैयारी
प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, इस प्रणाली को और अधिक सटीक बनाने के लिए लगातार डेटा इकट्ठा किया जा रहा है। आज के इस सफल परीक्षण के बाद, भविष्य में इसे जिला स्तर पर और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। प्रशासन ने जनता से अपील की है कि वे इस तरह के संदेशों को देखकर डरे नहीं, बल्कि यह समझें कि यह आपकी सुरक्षा के लिए सरकार की एक डिजिटल ढाल है।
जागरूक बनें, सुरक्षित रहें
आज के दौर में जब हर हाथ में मोबाइल है, तब सूचना तंत्र को इतना मजबूत करना ‘सतर्क नागरिक, सुरक्षित राष्ट्र’ के संकल्प को पूरा करता है। उत्तराखंड आपदा प्रबंधन विभाग की यह प्लानिंग आने वाले समय में आपदा के दौरान होने वाले जान-माल के नुकसान को न्यूनतम करने में मील का पत्थर साबित होगी।
