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गाजीपुर पुलिस का ‘मिशन समाधान’: अब थाने के चक्कर काटने से मिलेगी मुक्ति, हर शिकायत की मिलेगी रसीद और 48 घंटे में होगा फैसला

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गाजीपुर पुलिस का ‘मिशन समाधान’: अब थाने के चक्कर काटने से मिलेगी मुक्ति, हर शिकायत की मिलेगी रसीद और 48 घंटे में होगा फैसला

​अकील अहमद गाजीपुर | 1 मई 2026 रिपोर्ट: न्यूज़ डेस्क

​उत्तर प्रदेश की मित्र पुलिस अब सच में डिजिटल और हाईटेक होने जा रही है। गाजीपुर के पुलिस अधीक्षक (SP) ने जनता की शिकायतों को लेकर एक ऐसी व्यवस्था शुरू की है, जिससे न केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी, बल्कि फरियादियों को दर-दर भटकने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। जनपद में अब शिकायतों के निस्तारण को पारदर्शी बनाने के लिए ‘पावती रसीद’ प्रणाली लागू कर दी गई है।

क्या है गाजीपुर पुलिस की नई व्यवस्था?

​अक्सर देखा जाता है कि लोग थानों में अपनी शिकायत तो दे देते हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं पता होता कि उनकी जांच कौन कर रहा है या उनकी फाइल कहाँ दबी है। गाजीपुर पुलिस की इस नई पहल के तहत अब जैसे ही कोई आवेदक अपनी शिकायत थाने में देगा, उसे तुरंत एक पावती रसीद (Acknowledgement Receipt) दी जाएगी।

रसीद की खासियतें:​इसमें शिकायत दर्ज होने का समय और तारीख होगी।​सबसे महत्वपूर्ण, इस पर जांच करने वाले अधिकारी (IO) का नाम और मोबाइल नंबर लिखा होगा।आवेदक सीधे उस अधिकारी को फोन करके अपनी रिपोर्ट की स्थिति जान सकेगा।

48 घंटे का ‘डेडलाइन’ चैलेंज

​पुलिस अधीक्षक ने सख्त निर्देश दिए हैं कि केवल रसीद देना काफी नहीं है। अब पुलिस को हर हाल में 2 दिनों (48 घंटे) के भीतर शिकायत का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण करना होगा। इस व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए सभी थानों को ‘ऑनलाइन फीडिंग’ से जोड़ दिया गया है। अब कोई भी प्रार्थना पत्र थाने के रजिस्टर से गायब नहीं हो पाएगा, क्योंकि उसका रिकॉर्ड सीधे हेडक्वार्टर की निगरानी में रहेगा।

थानों पर 24 घंटे तैनात रहेगी स्पेशल टीम

​जनसुनवाई को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए गाजीपुर के प्रत्येक थाने में एक विशेष डेस्क बनाई गई है। यहाँ 24 घंटे:​एक उपनिरीक्षक (Sub-Inspector)एक पुरुष आरक्षी​एक महिला आरक्षी (महिला फरियादियों की सुविधा के लिए)

​की तैनाती अनिवार्य कर दी गई है। यानी अब रात हो या दिन, आपकी बात सुनने के लिए जिम्मेदार अधिकारी थाने पर मौजूद मिलेगा।

पुलिस लेगी आपका फीडबैक: ‘संतुष्ट हैं या नहीं?’

​इस पूरी प्रक्रिया की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) है ‘फीडबैक सिस्टम’। शिकायत के निस्तारण के बाद जिले के उच्चाधिकारी सीधे आवेदक को फोन करेंगे। अधिकारी पूछेंगे कि क्या पुलिस ने उनकी मदद की? क्या उनसे कोई सुविधा शुल्क तो नहीं मांगा गया? इस फीडबैक के आधार पर ही संबंधित थाना प्रभारी और जांच अधिकारी की रिपोर्ट तैयार होगी।

सुनवाई न होने पर यहाँ करें कॉल

​अगर किसी स्थिति में थाना या चौकी स्तर पर आपकी शिकायत नहीं ली जाती है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। गाजीपुर पुलिस ने इसके लिए सीधे आला अधिकारियों के द्वार खोल दिए हैं। आवेदक संबंधित क्षेत्राधिकारी (CO), अपर पुलिस अधीक्षक (ASP) या फिर प्रभारी जन शिकायत के मोबाइल नंबर 7839864009 पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

आम जनता के लिए बड़ी राहत

​गाजीपुर पुलिस की इस पहल से आम जनता में विश्वास की नई लहर देखने को मिल रही है। जानकारों का मानना है कि रसीद पर अधिकारी का नंबर होने से ‘बिचौलियों’ का धंधा बंद होगा और पुलिस कार्यप्रणाली में जवाबदेही (Accountability) बढ़ेगी।

SP गाजीपुर का संदेश: “हमारा लक्ष्य है कि हर नागरिक सुरक्षित महसूस करे और उसे न्याय के लिए सिफारिश की जरूरत न पड़े। यह व्यवस्था पुलिस और जनता के बीच की दूरी को कम करेगी।”

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