उत्तराखंड में चिकित्सा जगत की बड़ी उपलब्धि: श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में कैंसर पीड़ित महिला का ‘नया स्तन’ बनाया गया
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उत्तराखंड में चिकित्सा जगत की बड़ी उपलब्धि: श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में कैंसर पीड़ित महिला का ‘नया स्तन’ बनाया गया
देहरादून | 23 जनवरी, 2026
राजधानी देहरादून स्थित श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल ने कैंसर उपचार की दिशा में एक ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया है। अस्पताल के विशेषज्ञों ने एक महिला मरीज के शरीर से कैंसर ग्रस्त स्तन को पूरी तरह हटाने के बाद, उसके शरीर की ही मांसपेशियों और त्वचा से नया स्तन (Full Breast Reconstruction) बनाकर उसे नया जीवन और आत्मविश्वास प्रदान किया है।
5 घंटे चली जटिल ‘ऑटोलॉगस’ सर्जरी
वरिष्ठ कैंसर सर्जन डॉ. अजीत तिवारी के नेतृत्व में चली लगभग पाँच घंटे की इस जटिल सर्जरी को चिकित्सा जगत में ‘टोटल मैस्टेक्टमी विद ऑटोलॉगस होल ब्रेस्ट रिकंस्ट्रक्शन’ कहा जाता है। मरीज ‘मल्टी-सेंट्रिक्स ब्रेस्ट कैंसर’ से पीड़ित थी, जिसमें स्तन के अलग-अलग हिस्सों में कई गांठें बन जाती हैं। ऐसी स्थिति में पूरे स्तन को हटाना अनिवार्य होता है।
सिलिकॉन नहीं, शरीर के ऊतकों का हुआ उपयोग
डॉ. अजीत तिवारी ने बताया कि आमतौर पर ऐसी सर्जरी में सिलिकॉन इम्प्लांट का प्रयोग किया जाता है, जिससे संक्रमण या भविष्य में दर्द की समस्या हो सकती है। लेकिन इस सफल केस में:
- मरीज के अपने ही शरीर के टिश्यू (ऊतकों) का उपयोग किया गया।
- इससे स्तन को प्राकृतिक बनावट, सही आकार और संवेदनशीलता मिली।
- भविष्य में दोबारा सर्जरी या इम्प्लांट फेलियर का खतरा समाप्त हो गया।
आत्मसम्मान और जीवन की गुणवत्ता (Quality of Life)
डॉ. तिवारी के अनुसार, “ब्रेस्ट कैंसर की सर्जरी केवल शारीरिक उपचार नहीं है, बल्कि यह महिला के मानसिक स्वास्थ्य और आत्मविश्वास से जुड़ी है।” यह तकनीक विशेष रूप से युवा महिलाओं के लिए उम्मीद की एक नई किरण है, जो कैंसर से जीतने के बाद एक सामान्य और गौरवपूर्ण जीवन जीना चाहती हैं।

उत्तराखंड में पहली बार
देश के गिने-चुने उच्च स्तरीय चिकित्सा केंद्रों में ही इस तरह की माइक्रो-सर्जिकल स्किल्स वाली सर्जरी उपलब्ध है। उत्तराखंड में इस स्तर की पहली सफल सर्जरी कर श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल ने राज्य को कैंसर उपचार के राष्ट्रीय मानचित्र पर अग्रणी स्थान दिलाया है।
