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UP Cabinet Decision: अब नहीं हो सकेगी ज़मीनों की हेराफेरी! रजिस्ट्री से पहले विभाग चेक करेगा ‘खतौनी’, मालिकाना हक की जांच अनिवार्य

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UP Cabinet Decision: अब नहीं हो सकेगी ज़मीनों की हेराफेरी! रजिस्ट्री से पहले विभाग चेक करेगा ‘खतौनी’, मालिकाना हक की जांच अनिवार्य

लखनऊ | 10 मार्च, 2026 उत्तर प्रदेश में योगी कैबिनेट ने रजिस्ट्री प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और भू-माफियाओं पर नकेल कसने के लिए एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। अब प्रदेश में किसी भी प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री केवल कागजों के आधार पर नहीं होगी, बल्कि स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग को रजिस्ट्री से पहले बेचने वाले का मालिकाना हक और पहचान ‘खतौनी’ के जरिए पुख्ता करनी होगी।

धोखाधड़ी पर लगेगा ‘डिजिटल’ ब्रेक कैबिनेट में पारित प्रस्ताव के अनुसार, अब रजिस्ट्री के समय निम्नलिखित बदलाव लागू होंगे:

  • खतौनी से मिलान: प्रॉपर्टी बेचने वाले व्यक्ति की पहचान को राजस्व विभाग की ‘खतौनी’ (Land Records) से ऑनलाइन मैच किया जाएगा।
  • मालिकाना हक की जांच: स्टाम्प निबंधन विभाग अब केवल गवाहों के भरोसे नहीं रहेगा, बल्कि यह सुनिश्चित करेगा कि जो व्यक्ति प्रॉपर्टी बेच रहा है, वही उसका असली मालिक है।
  • बिना जांच के रजिस्ट्रेशन नहीं: यदि मालिकाना हक (Ownership) में थोड़ा भी संदेह पाया गया या खतौनी में डेटा मैच नहीं हुआ, तो विभाग उस संपत्ति का पंजीकरण (Registration) नहीं करेगा।

आम जनता को क्या होगा फायदा? इस फैसले का सबसे बड़ा लाभ उन खरीदारों को होगा जो अक्सर ‘फर्जी मालिकों’ के चक्कर में पड़कर अपनी जमा-पूँजी गँवा देते हैं। अब सरकारी स्तर पर ही मालिकाना हक की जांच हो जाने से विवादित संपत्तियों की खरीद-बिक्री पर पूरी तरह रोक लग जाएगी। इससे अदालतों में लंबित जमीन से जुड़े दीवानी मुकदमों में भी कमी आएगी।

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