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UP Cabinet Decision: यूपी में अब ‘ओला-उबर’ की मनमानी खत्म! रजिस्ट्रेशन और फिटनेस अनिवार्य; एग्रीगेटर कंपनियों के लिए बदले नियम

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UP Cabinet Decision: यूपी में अब ‘ओला-उबर’ की मनमानी खत्म! रजिस्ट्रेशन और फिटनेस अनिवार्य; एग्रीगेटर कंपनियों के लिए बदले नियम

लखनऊ | 10 मार्च, 2026

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने यात्री सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ‘एग्रीगेटर कंपनियों’ (Ola, Uber आदि) के लिए कड़े नियम लागू करने का फैसला किया है। कैबिनेट की बैठक में परिवहन विभाग के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है, जिसके तहत अब इन कंपनियों और उनके वाहनों को पंजीयन विभाग में पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।

लाइसेंस के लिए देना होगा 5 लाख शुल्क

​कैबिनेट के नए प्रावधानों के अनुसार, अब ओला, उबर या इसी तरह की अन्य किसी भी एग्रीगेटर कंपनी को उत्तर प्रदेश में संचालन के लिए 5 लाख रुपये का शुल्क देकर आधिकारिक लाइसेंस लेना होगा। बिना वैध लाइसेंस के कोई भी कंपनी अपनी सेवाएं प्रदेश में नहीं दे सकेगी।

सुरक्षा के लिए ‘4 पिलर’ टेस्ट अनिवार्य

​अब कोई भी टैक्सी सड़क पर तब तक नहीं उतरेगी जब तक वह इन चार प्रमुख मानकों को पूरा नहीं कर लेती:

  1. रजिस्ट्रेशन: वाहन का पंजीयन विभाग में विधिवत पंजीकरण होना चाहिए।
  2. फिटनेस: वाहन की मैकेनिकल कंडीशन और फिटनेस जांच अनिवार्य होगी।
  3. मेडिकल: ड्राइवर का समय-समय पर मेडिकल चेकअप कराना होगा।
  4. वेरिफिकेशन: सुरक्षा के लिहाज से ड्राइवर का पुलिस वेरिफिकेशन होना आवश्यक है।

टू-व्हीलर और ऑटो को मिली राहत

​सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह नया नियम केवल फोर-व्हीलर टैक्सियों (कैब) पर लागू होगा। तिपहिया ऑटो (Auto Rickshaw) और टू-व्हीलर (Bike Taxi) को फिलहाल इस नियम के दायरे से बाहर रखा गया है, ताकि छोटे स्वरोजगार करने वालों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ न पड़े।

क्यों पड़ी इस नियम की जरूरत?

​पिछले कुछ समय से यात्रियों द्वारा एग्रीगेटर कंपनियों की टैक्सियों में सुरक्षा और वेरिफिकेशन को लेकर शिकायतें मिल रही थीं। सरकार का उद्देश्य इन सेवाओं को संगठित करना और यात्रियों की यात्रा को सुरक्षित बनाना है।

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