लखनऊ: उद्घाटन के 48 घंटे बाद ही ‘ग्रीन कॉरिडोर’ की खुली पोल, खाटू श्याम मंदिर के पास 5 फीट गहरा गड्ढा, निजी कंपनियों के भरोसे ‘सिस्टम’
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लखनऊ: उद्घाटन के 48 घंटे बाद ही ‘ग्रीन कॉरिडोर’ की खुली पोल, खाटू श्याम मंदिर के पास 5 फीट गहरा गड्ढा, निजी कंपनियों के भरोसे ‘सिस्टम’
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी में करोड़ों की लागत से तैयार ‘ग्रीन कॉरिडोर’ प्रोजेक्ट अपनी शुरुआत के साथ ही विवादों के घेरे में आ गया है। जिस सड़क के जरिए लखनऊ की ट्रैफिक व्यवस्था को रफ्तार देने का दावा किया गया था, वह उद्घाटन के महज दो दिन बाद ही जवाब दे गई। खाटू श्याम मंदिर के पास सड़क किनारे एक बड़ा सीवर होल धंसने से करीब 5 फीट गहरा गड्ढा हो गया है, जो किसी बड़े हादसे को न्योता दे रहा है।
उद्घाटन की खुशी पर लापरवाही का साया
दो दिन पहले ही जिस ग्रीन कॉरिडोर का धूमधाम से उद्घाटन हुआ था, उसकी सड़क धंसने की खबर ने शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खाटू श्याम मंदिर जैसे व्यस्त इलाके के पास सड़क का इस तरह धंसना निर्माण कार्य की गुणवत्ता और जलकल विभाग की लापरवाही की पोल खोल रहा है। घटना की जानकारी मिलते ही जलकल और जल निगम के अधिकारी आनन-फानन में मौके पर पहुँचे और गड्ढे को भरने की कवायद शुरू की गई।
निजी कंपनियों के हाथ में ‘कमान’, जलकल ने झाड़ा पल्ला
हैरानी की बात यह है कि लखनऊ का जलकल विभाग सीवेज ट्रीटमेंट और मेंटेनेंस (रखरखाव) का काम एक निजी कंपनी को सौंपकर अपनी जिम्मेदारियों से पूरी तरह किनारा कर चुका है। सूत्रों की मानें तो सीवेज मेंटेनेंस का काम देख रही यह निजी कंपनी धरातल पर सुधार करने के बजाय केवल दिखावे में माहिर है।
लखनऊ के 6 ज़ोन में इस निजी कंपनी की सक्रियता का आलम यह है कि इसने पुराने ढक्कन बदलकर उन पर अपना नाम तो चिपका दिया है, लेकिन ज़मीन के भीतर सीवर लाइन की जर्जर स्थिति वैसी ही बनी हुई है। ग्रीन कॉरिडोर के पास हुआ यह हादसा इसी ‘ढक्कन बदलने वाली राजनीति’ का परिणाम माना जा रहा है।
महज ‘ढक्कन’ बदलने से नहीं सुधरेगा सिस्टम
राजधानी के विभिन्न वार्डों और ज़ोन में यह कंपनी सीवर के ढक्कनों पर अपनी ब्रांडिंग करने में जुटी है, लेकिन तकनीकी रख-रखाव के अभाव में मुख्य सड़कें धंस रही हैं। सवाल यह उठता है कि क्या केवल ढक्कन पर नाम लिख देने से सीवर लाइन की मजबूती सुनिश्चित हो जाएगी? ग्रीन कॉरिडोर जैसी महत्वपूर्ण सड़क पर हुआ गड्ढा यह बताने के लिए काफी है कि मेंटेनेंस के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है।
जिम्मेदारों पर कार्रवाई का इंतज़ार
ग्रीन कॉरिडोर के निर्माण में लगी निर्माण एजेंसी और सीवेज का जिम्मा देख रही निजी कंपनी की इस बड़ी लापरवाही ने जनता के पैसे की बर्बादी को उजागर किया है।
- पहला सवाल: उद्घाटन के 48 घंटे के भीतर सड़क कैसे धंस गई?
- दूसरा सवाल: क्या निर्माण से पहले सॉइल टेस्टिंग और सीवर लाइनों की मजबूती की जांच नहीं की गई थी?
- तीसरा सवाल: क्या जलकल विभाग केवल निजी कंपनियों को ठेका देकर अपनी जवाबदेही से मुक्त हो सकता है?
लखनऊ की जनता अब यह पूछ रही है कि विकास के दावों के बीच इस तरह की जानलेवा लापरवाही के जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी? क्या केवल गड्ढा भर देने से भविष्य में होने वाले हादसों को रोका जा सकेगा?
