आपदा प्रबंधन का ‘उत्तराखंड मॉडल’ सीखेंगे श्रीलंकाई अधिकारी: USDMA में तकनीकी नवाचारों का लिया जायजा
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आपदा प्रबंधन का ‘उत्तराखंड मॉडल’ सीखेंगे श्रीलंकाई अधिकारी: USDMA में तकनीकी नवाचारों का लिया जायजा
देहरादून, 17 मार्च 2026: सुशासन और नीतिगत सुधारों के क्षेत्र में कार्यरत भारत सरकार की प्रमुख संस्था ‘नेशनल सेंटर फॉर गुड गवर्नेंस’ (NCGG) के तत्वावधान में श्रीलंका के 40 सिविल सेवा अधिकारियों के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने आज उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) का भ्रमण किया। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य उत्तराखंड द्वारा आपदा प्रबंधन, विशेषकर भूस्खलन और मौसम पूर्वानुमान के क्षेत्र में अपनाई जा रही अत्याधुनिक तकनीकों और नवाचारों को समझना था।
त्वरित राहत और तकनीक का संगम
भ्रमण के दौरान अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (क्रियान्वयन) एवं डीआईजी श्री राजकुमार नेगी ने प्रतिनिधिमंडल को राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) की कार्यप्रणाली से रूबरू कराया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार आपदा के समय ‘इंसिडेंट रिस्पॉन्स सिस्टम’ (IRS) के माध्यम से त्वरित राहत और बचाव कार्यों को धरातल पर उतारा जाता है। अधिकारियों को चेतावनी प्रसारण प्रणाली और अंतिम छोर तक सूचना पहुँचाने की प्रक्रिया के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई।
मौसम पूर्वानुमान और भूस्खलन प्रबंधन पर विशेष चर्चा
चूंकि श्रीलंका भी अत्यधिक वर्षा और भूस्खलन जैसी चुनौतियों से जूझता है, इसलिए वहां के प्रतिनिधियों ने उत्तराखंड के तकनीकी मॉडलों में विशेष रुचि दिखाई:
- सटीक मौसम पूर्वानुमान: मौसम विज्ञान विभाग के वैज्ञानिक डॉ. रोहित थपलियाल ने उपग्रह आधारित अवलोकन, डॉप्लर वेदर रडार और स्वचालित मौसम केंद्रों के माध्यम से प्राप्त रियल-टाइम डेटा के महत्व को समझाया। उन्होंने पर्वतीय क्षेत्रों के लिए ‘लोकेशन-स्पेसिफिक’ पूर्वानुमान की उपयोगिता पर प्रकाश डाला।
- भूस्खलन न्यूनीकरण: ULMMC के निदेशक डॉ. शांतनु सरकार ने बताया कि राज्य में ड्रोन सर्वेक्षण, लिडार तकनीक और रिमोट सेंसिंग के माध्यम से संवेदनशील क्षेत्रों का मानचित्रण किया जा रहा है। चयनित स्थलों पर वर्षा और मिट्टी की नमी को मापने वाले ‘अर्ली वार्निंग सिस्टम’ स्थापित किए जा रहे हैं, जो संभावित खतरों का पूर्व संकेत देते हैं।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग और क्षमता निर्माण
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास, श्री विनोद कुमार सुमन ने इस भ्रमण को अंतरराष्ट्रीय संवाद के लिए मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की सर्वोत्तम प्रथाएं (Best Practices) न केवल अन्य राज्यों, बल्कि अन्य देशों के लिए भी आपदा जोखिम न्यूनीकरण में प्रेरणादायक साबित हो सकती हैं।
एनसीजीजी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. एपी सिंह ने जानकारी दी कि संस्थान अब तक 52 देशों के 5500 से अधिक अधिकारियों को प्रशिक्षित कर चुका है। श्रीलंका सरकार के साथ हुए समझौते के तहत यह विशेष क्षमता निर्माण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है, ताकि पड़ोसी देशों में भी आपदा प्रबंधन के सुदृढ़ ढांचे को विकसित किया जा सके।
दृष्टिकोण की आवश्यकता
इस अध्ययन भ्रमण से श्रीलंका के अधिकारियों को आपदा पूर्व तैयारी, त्वरित प्रतिक्रिया और पुनर्वास की बारीकियों को समझने का अवसर मिला। प्रतिनिधियों ने उत्तराखंड के तकनीकी मॉडल और समुदाय आधारित दृष्टिकोण की सराहना की और इसे अपने देश की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप लागू करने की संभावनाओं पर चर्चा की।
इस अवसर पर संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मो. ओबैदुल्लाह अंसारी, डॉ. पीडी माथुर, डॉ. पूजा राणा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
