उत्तराखंड: धामी सरकार के चार साल और २०२७ का शंखनाद; राजनाथ की हल्द्वानी जनसभा में होगा दावेदारों का ‘शक्ति परीक्षण’
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उत्तराखंड: धामी सरकार के चार साल और २०२७ का शंखनाद; राजनाथ की हल्द्वानी जनसभा में होगा दावेदारों का ‘शक्ति परीक्षण’
देहरादून/हल्द्वानी। उत्तराखंड की राजनीति में इस समय जबरदस्त हलचल है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार आगामी २३ मार्च को अपने कार्यकाल के सफल चार वर्ष पूरे करने जा रही है। इस अवसर को यादगार बनाने और २०२७ के विधानसभा चुनावों की जमीन तैयार करने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सफल हरिद्वार दौरे के बाद अब सबकी नजरें २१ मार्च को हल्द्वानी में होने वाली रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की विशाल जनसभा पर टिकी हैं।
मुख्यमंत्री धामी: मिथक तोड़ने वाले जननायक
पुष्कर सिंह धामी ने २३ मार्च २०२२ को दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर इतिहास रचा था। वे नारायण दत्त तिवारी के बाद देवभूमि के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्यमंत्री बन चुके हैं। धामी की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि उनके नेतृत्व में भाजपा ने उत्तराखंड का वह ‘मिथक’ तोड़ा, जिसमें माना जाता था कि कोई भी पार्टी दोबारा सत्ता में वापसी नहीं कर पाती। हार के बावजूद संगठन का उन पर भरोसा जताना और फिर उनके नेतृत्व में मिली प्रचंड जीत ने उन्हें प्रदेश का निर्विवाद नेता बना दिया है।
हल्द्वानी: कुमाऊं का द्वार और शक्ति प्रदर्शन का केंद्र
२१ मार्च को हल्द्वानी के ऐतिहासिक मोतीराम बाबू राम इंटर कॉलेज के मैदान में होने वाली जनसभा को रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हल्द्वानी को ‘कुमाऊं का प्रवेश द्वार’ कहा जाता है और यहाँ से उठने वाली राजनीतिक गूँज पूरे पहाड़ और तराई में सुनाई देती है। इसी मैदान पर पूर्व में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राजनाथ सिंह की बड़ी रैलियां हो चुकी हैं।
संगठन ने इस बार ५०,००० लोगों की भीड़ जुटाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। कार्यक्रम की कमान प्रदेश महामंत्री तरुण बंसल को सौंपी गई है, जो बतौर संयोजक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दे रहे हैं।
टिकट के दावेदारों का ‘लिटमस टेस्ट’
यह जनसभा केवल सरकार की उपलब्धियां गिनाने का मंच नहीं है, बल्कि यह २०२७ के टिकट के दावेदारों के लिए एक ‘शक्ति परीक्षण’ भी है। संगठन ने आसपास के १५ विधानसभा क्षेत्रों के विधायकों, दायित्वधारियों और टिकट की आस लगाए बैठे नेताओं को स्पष्ट टारगेट दिए हैं।
सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और केंद्रीय नेतृत्व की पैनी नजर इस बात पर है कि कौन सा नेता अपने क्षेत्र से कितनी भीड़ और कार्यकर्ताओं को लाने में सक्षम है। यह देखा जा रहा है कि किस दावेदार की जनता और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच वास्तव में पकड़ है। २०२७ के चुनाव में महज एक साल का समय शेष है, ऐसे में यह रैली कई मौजूदा विधायकों के भविष्य का फैसला कर सकती है। चर्चा तेज है कि पिछले चुनाव की तर्ज पर इस बार भी कई ‘नॉन-परफॉर्मिंग’ विधायकों के टिकट कट सकते हैं और युवा चेहरों को मौका दिया जा सकता है।
चुनावी मोड में संगठन और सरकार
भाजपा अब पूरी तरह से ‘इलेक्शन मोड’ में है। मैदानी क्षेत्रों (हरिद्वार और हल्द्वानी) में दो बड़ी रैलियों के बाद पार्टी का अगला पड़ाव पहाड़ की ऊंचाइयां होंगी। प्रस्तावित योजनाओं के अनुसार, आगामी जनसभाएं श्रीनगर गढ़वाल, उत्तरकाशी, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ में आयोजित की जाएंगी। इन रैलियों का मुख्य उद्देश्य धामी सरकार की बड़ी उपलब्धियों—जैसे समान नागरिक संहिता (UCC), सख्त नकल विरोधी कानून और धर्मांतरण कानून—को जन-जन तक पहुँचाना है।
रक्षा मंत्री का कार्यक्रम
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह २१ मार्च की सुबह पहले बरेली पहुंचेंगे, जहाँ से वे नैनीताल के घोड़ाखाल सैनिक स्कूल के कार्यक्रम में शिरकत करेंगे। इसके बाद दोपहर १:३० बजे से ३:१५ बजे तक वे हल्द्वानी की जनसभा को संबोधित करेंगे।
कुल मिलाकर, धामी सरकार के चार साल का यह जश्न २०२७ की सत्ता वापसी के संकल्प का एक बड़ा ट्रेलर साबित होने वाला है। राजनाथ सिंह की यह रैली न केवल विपक्ष को चुनौती देगी, बल्कि पार्टी के भीतर भी नेतृत्व की क्षमता और दावेदारों की लोकप्रियता का स्पष्ट खाका खींच देगी।
