यूपी कैबिनेट विस्तार की आहट: उत्तराखंड के बाद अब उत्तर प्रदेश में मंत्रिमंडल फेरबदल की तैयारी; मिशन 2027 के लिए योगी सरकार का ‘मास्टर प्लान’
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यूपी कैबिनेट विस्तार की आहट: उत्तराखंड के बाद अब उत्तर प्रदेश में मंत्रिमंडल फेरबदल की तैयारी; मिशन 2027 के लिए योगी सरकार का ‘मास्टर प्लान’
लखनऊ। उत्तराखंड में धामी सरकार के कैबिनेट विस्तार के बाद अब देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के सत्ता के गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के बीच बैठकों का दौर शुरू हो चुका है। सूत्रों की मानें तो ‘मिशन 2027’ को साधने के लिए अगले सप्ताह की शुरुआत में ही यूपी मंत्रिमंडल का विस्तार और फेरबदल किया जा सकता है।
संगठन और सरकार के बीच ‘अदला-बदली’ की रणनीति
इस बार का कैबिनेट विस्तार केवल नए चेहरों को शामिल करने तक सीमित नहीं रहेगा। चर्चा है कि भाजपा संगठन के कुछ कद्दावर नेताओं को सरकार में जिम्मेदारी दी जा सकती है, जबकि वर्तमान मंत्रिमंडल के कुछ मंत्रियों को संगठन के कार्यों के लिए वापस बुलाया जा सकता है। यह कदम आगामी विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी की जमीनी पकड़ को और अधिक मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।
इन चेहरों पर टिकी हैं सबकी निगाहें (संभावित नाम):
सूत्रों के हवाले से मंत्रिमंडल में शामिल होने या प्रमोट होने वाले प्रमुख नामों की सूची इस प्रकार है:
- भूपेंद्र सिंह चौधरी: भाजपा के वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष को सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिल सकती है। उनके संगठनात्मक अनुभव का लाभ कैबिनेट स्तर पर लेने की योजना है।
- अशोक कटारिया: पश्चिम यूपी के मजबूत नेता और पूर्व मंत्री को एक बार फिर मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है।
- पूजा पाल: समाजवादी पार्टी छोड़कर भाजपा के करीब आईं पूजा पाल को कैबिनेट में शामिल कर पिछड़ा वर्ग और महिला प्रतिनिधित्व को साधने की कोशिश हो सकती है।
- असीम अरुण (प्रमोशन): पूर्व आईपीएस और वर्तमान राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण के शानदार ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए उन्हें कैबिनेट मंत्री के रूप में प्रमोट किया जा सकता है।
- बलदेव सिंह औलख (प्रमोशन): वर्तमान राज्यमंत्री बलदेव औलख को भी उनके क्षेत्र में बेहतर पकड़ के कारण कैबिनेट रैंक मिल सकती है।
- गोविंद नारायण शुक्ला: एमएलसी और प्रदेश महामंत्री को उनकी सक्रियता और सांगठनिक अनुभव के आधार पर मंत्री पद से नवाजा जा सकता है।
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सोशल इंजीनियरिंग और क्षेत्रीय संतुलन पर जोर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की इस नई टीम में ‘सोशल इंजीनियरिंग’ का विशेष ध्यान रखा जाएगा। 2027 के चुनाव को देखते हुए ब्राह्मण, दलित, पिछड़ा वर्ग और जाट समुदाय के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की जा रही है। साथ ही, पश्चिम यूपी से लेकर पूर्वांचल तक के क्षेत्रीय समीकरणों को भी इस विस्तार के जरिए साधा जाएगा।
अगले सप्ताह की शुरुआत में हो सकता है शपथ ग्रहण
सूत्रों का कहना है कि दिल्ली दरबार से हरी झंडी मिलने के बाद अब केवल औपचारिक घोषणा बाकी है। राजभवन में शपथ ग्रहण की तैयारियां आंतरिक रूप से शुरू हो चुकी हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और संगठन के बड़े नेताओं की हालिया बैठकों ने इन अटकलों को और अधिक हवा दी है कि सोमवार या मंगलवार तक नई टीम योगी के चेहरे साफ हो जाएंगे।
