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प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु ने युवाओं को दिया ‘जीत’ का मंत्र; कहा— विकसित भारत @2047 के असली नायक हैं छात्र

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प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु ने युवाओं को दिया ‘जीत’ का मंत्र; कहा— विकसित भारत @2047 के असली नायक हैं छात्र

देहरादून। उत्तराखंड के प्रमुख सचिव (मुख्यमंत्री, वित्त, वन एवं पर्यावरण) आर.के. सुधांशु ने युवाओं और छात्रों को जीवन में सफल होने के लिए अनुशासन, समय की पाबंदी और स्पष्ट लक्ष्य का महत्व समझाया है। शनिवार को देहरादून में आयोजित ‘हिन्दुस्तान ओलंपियाड’ के सम्मान समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए सुधांशु ने अपने जीवन के व्यक्तिगत अनुभवों को साझा करते हुए छात्रों में जोश भरा।

“ग्रेजुएशन तक मेरा भी कोई लक्ष्य नहीं था”

​समारोह में अपने छात्र जीवन के संघर्षों का जिक्र करते हुए आर.के. सुधांशु ने एक बेहद ईमानदारी भरी बात साझा की। उन्होंने बताया कि ग्रेजुएशन तक उन्होंने कोई बड़ा लक्ष्य निर्धारित नहीं किया था। लेकिन एक घटना ने उनका नजरिया बदल दिया और उन्होंने सिविल सेवा (IAS) में जाने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा, “लगभग साढ़े चार वर्षों तक मैंने पूरी तरह अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित किया। इस दौरान मैं दो बार असफल भी हुआ, लेकिन मैंने हार नहीं मानी और अंततः सफलता प्राप्त की।” उन्होंने छात्रों को समझाया कि असफलता वास्तव में सफलता का एक मजबूत स्तंभ है, बशर्ते आप उससे सीखें।

विकसित भारत के संकल्प में युवाओं की भूमिका

​प्रमुख सचिव ने बच्चों को भविष्य का दृष्टिकोण देते हुए कहा कि साल 2047 तक जब भारत अपनी स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा और एक ‘विकसित राष्ट्र’ बनेगा, तब आज के ये छात्र ही उस भारत का नेतृत्व करेंगे। उन्होंने आगाह किया कि सफलता के लिए अंत में की जाने वाली मेहनत के बजाय पूरे वर्ष का निरंतर प्रयास और अनुशासन जरूरी है।

शिक्षा केवल ज्ञान अर्जन के लिए नहीं

​संस्कृत के प्रसिद्ध श्लोक ‘विद्या ददाति विनयं’ का उल्लेख करते हुए सुधांशु ने बच्चों और अभिभावकों को शिक्षा के वास्तविक उद्देश्य से परिचित कराया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का मतलब केवल सूचनाओं को इकट्ठा करना या ज्ञान प्राप्त करना नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति को विनम्र और व्यवहारिक बनाती है। उन्होंने जोर दिया कि आज के प्रतिस्पर्धी दौर में केवल किताबी पढ़ाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि व्यवहारिक ज्ञान और व्यक्तित्व विकास भी अनिवार्य है।

प्रेरक उदाहरणों से भरा संबोधन

​संबोधन के दौरान उन्होंने छात्रों को प्रेरित करने के लिए महान व्यक्तित्वों के उदाहरण दिए:

  • डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम: कैसे एक साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले व्यक्ति ने अपनी कड़ी मेहनत से देश का सर्वोच्च पद प्राप्त किया।
  • माइकल फेल्प्स: महान तैराक के वर्षों के कठिन अभ्यास और अटूट अनुशासन की कहानी।
  • राजकुमार सिंह व किशोर कुणाल: उन्होंने बताया कि कैसे उनके गृह जिले पटना के अधिकारियों के विचारों ने उनके जीवन को नई दिशा दी।

 सफलता के तीन सूत्र

​प्रमुख सचिव ने अपने भाषण का समापन तीन मुख्य सूत्रों के साथ किया— समय, अनुशासन और लक्ष्य। उन्होंने कहा कि यदि छात्र इन तीनों को अपने जीवन में उतार लें, तो वे किसी भी ऊँचाई तक पहुँच सकते हैं। समारोह में देवभूमि उत्तराखंड विवि की कुलपति प्रो. रितिका मेहरा और दून डिफेंस एकेडमी के निदेशक संदीप गुप्ता समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

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