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Big  breaking Varanasi काशी में आज MP के CM डॉ. मोहन यादव, यूपी-एमपी के बीच होगा आर्थिक महामिलन; जानें मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम

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Big  breaking Varanasi काशी में आज MP के CM डॉ. मोहन यादव, यूपी-एमपी के बीच होगा आर्थिक महामिलन; जानें मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम

वाराणसी (उत्तर प्रदेश): धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी कल मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच एक बड़े आर्थिक और औद्योगिक रोडमैप की गवाह बनेगी। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कल वाराणसी पहुंच रहे हैं, जहाँ वे ‘एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन’ में शामिल होंगे। इस दौरे का उद्देश्य दोनों राज्यों के बीच निवेश, पर्यटन और औद्योगिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है।

दौरे का बैकग्राउंड: विकास का नया कॉरिडोर

​इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का विजन है कि दोनों राज्यों की साझा सीमाओं और समान सांस्कृतिक विरासत (जैसे चित्रकूट) का लाभ उठाकर एक सशक्त आर्थिक जोन विकसित किया जाए। विशेष रूप से ‘एक जनपद एक उत्पाद’ (ODOP) और टेक्सटाइल सेक्टर में दोनों राज्यों की जुगलबंदी पर फोकस रहेगा।

मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम और स्थान

​मुख्यमंत्री का कल का शेड्यूल बेहद व्यस्त और महत्वपूर्ण है:​सुबह 10:00 बजे: डॉ. मोहन यादव श्री काशी विश्वनाथ धाम पहुंचेंगे। यहाँ वे बाबा विश्वनाथ के दर्शन के साथ ही कॉरिडोर के क्राउड मैनेजमेंट और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का बारीकी से अध्ययन करेंगे, ताकि उज्जैन के महाकाल लोक में भी इसी तरह के सुधार किए जा सकें।​दोपहर 12:00 बजे: वाराणसी कैंटोनमेंट स्थित एक निजी होटल में यूपी-एमपी औद्योगिक निवेश शिखर सम्मेलन होगा। यहाँ दोनों राज्यों के बीच कई MoU (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर होंगे।​शिल्पकारों का मिलन: चंदेरी-महेश्वरी (MP) और बनारसी (UP) शिल्पकारों के बीच साझा ब्रांडिंग समझौता होगा, जिससे बुनकरों को अंतरराष्ट्रीय बाजार मिलेगा।​दोपहर 03:00 बजे: मुख्यमंत्री BLW (बरेका) मैदान पहुंचेंगे। यहाँ वे 3 से 5 अप्रैल तक होने वाले भव्य ‘विक्रमोत्सव’ महानाट्य की तैयारियों का जायजा लेंगे।

टूरिज्म सर्किट और जनसंपर्क

​दौरे के दौरान उज्जैन, वाराणसी और चित्रकूट को जोड़कर एक नया ‘पवित्र त्रिकोण’ टूरिज्म सर्किट बनाने पर चर्चा होगी। हालांकि मुख्यमंत्री का मुख्य कार्यक्रम आधिकारिक और उद्योगपतियों के साथ है, लेकिन BLW मैदान और मंदिर परिसर में वे स्थानीय लोगों और भाजपा कार्यकर्ताओं से भी सीधा संवाद कर सकते हैं।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम और प्रशासन की तैयारी

​डॉ. मोहन यादव के आगमन को लेकर वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं:​सुरक्षा घेरा: कार्यक्रम स्थलों (कैंटोनमेंट होटल और BLW मैदान) को अभेद्य किले में तब्दील कर दिया गया है। प्रवेश द्वारों पर मल्टी-जोन डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर (DFMD) और हैंडहेल्ड मेटल डिटेक्टर लगाए गए हैं।​ट्रैफिक डायवर्जन: कल सुबह से ही कैंटोनमेंट और गोदौलिया-मैदागिन मार्ग पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू रहेगा।​अतिथि और आमंत्रण: इस सम्मेलन में भाजपा के कई दिग्गज नेता, स्थानीय विधायक और उद्योग जगत के बड़े निवेशक शामिल होंगे। साथ ही, काशी के प्रबुद्ध वर्ग और कुछ साधु-संतों को भी विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है।

महत्वपूर्ण बिंदु: साझा ब्रांडिंग: बनारसी और महेश्वरी शिल्प को एक मंच पर लाना।

औद्योगिक निवेश: दोनों राज्यों के बीच मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने पर सहमति।​सांस्कृतिक आदान-प्रदान: विक्रमोत्सव के जरिए उज्जैन की संस्कृति को काशी में प्रदर्शित करना।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्य प्रदेश को देश के शीर्ष तीन आर्थिक रूप से स्थिर और मजबूत वित्तीय प्रबंधन वाले राज्यों में शामिल करने का लक्ष्य रखा है। इसी दिशा में सरकार ने ‘सशक्त एमएसएमई – विकसित मध्य प्रदेश’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से उद्यमियों को सीधे प्रोत्साहन राशि हस्तांतरित करना शुरू किया है। हाल ही में मुख्यमंत्री ने 257 से अधिक एमएसएमई इकाइयों को लगभग ₹170 करोड़ की सहायता राशि सीधे बैंक खातों में भेजी है। इसके साथ ही, राज्य सरकार ‘क्षेत्रीय उद्योग सम्मेलनों’ (Regional Industry Conclaves) के जरिए प्रदेश के हर कोने में निवेश आकर्षित कर रही है, जिससे अब तक लगभग ₹30 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।

​मध्य प्रदेश में आर्थिक विकास के लिए अधोसंरचना (Infrastructure) पर विशेष जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने ‘150-75-45’ का एक महत्वाकांक्षी कनेक्टिविटी रोडमैप पेश किया है, जिसके तहत हर 150 किमी पर एक कमर्शियल एयरपोर्ट, हर 75 किमी पर एक एयरस्ट्रिप और हर 45 किमी पर एक हेलीपैड बनाने का लक्ष्य है। बड़ी योजनाओं में रीवा सोलर पार्क जैसी अक्षय ऊर्जा परियोजनाएं और पीएम मित्र पार्क (टेक्सटाइल सेक्टर) शामिल हैं। साथ ही, ‘मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना’ के तहत युवाओं को स्वरोजगार के लिए ऋण और सब्सिडी प्रदान की जा रही है, जिससे मध्य प्रदेश तेजी से देश के ‘लॉजिस्टिक हब’ और ‘फूड बास्केट’ के रूप में उभर रहा है।

​एमएसएमई (MSME) सेक्टर की बात करें तो मध्य प्रदेश आज देश के अग्रणी राज्यों में शुमार है। नई ‘एमएसएमई विकास नीति 2025’ के लागू होने के बाद राज्य में स्टार्टअप्स और लघु उद्योगों के लिए पंजीकरण और भूमि आवंटन की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी हो गई है। वर्तमान में मध्य प्रदेश में 7,100 से अधिक स्टार्टअप पंजीकृत हैं, जो इसे देश के प्रमुख स्टार्टअप स्टेट्स की सूची में ऊपर रखते हैं। एमएसएमई इकाइयों को प्रोत्साहन देने और क्लस्टर आधारित विकास (जैसे इंदौर का रेडीमेड गारमेंट क्लस्टर और जबलपुर का फर्नीचर क्लस्टर) के मामले में मध्य प्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना चुका है, जिससे लाखों परिवारों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है।

 

 

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