South Asia 24×7 का मतलब पक्की खबर, देश और जहान की ताजातरीन खबरें,पत्रकारिता की नई आधारशिला, निष्पक्षता और पारदर्शिता अब, South Asia 24×7 पर खबर ग्राउंड जीरो से, मंझे हुए संवाददाताओं के साथ,हर जन मुद्दे पर, सीधा सवाल सरकार से ,सिर्फ South Asia 24 ×7 पर,पत्रकारिता की मजबूती के लिए जुड़िए हमारे साथ, South Asia 24×7 के यूट्यूब चैनल,फेसबुक और ट्विटर पर क्योंकि हम करते है बात मुद्दे की

South Asia24x7

Hindi News, Breaking News in Hindi, हिंदी न्यूज़ , Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest News in Hindi,South Asia24x7

UP Politics: Dupty CM केशव मौर्य ने, गृह मंत्री अमित शाह से की मुलाकात क्या हैं सियासी मायने? भाजपा का’मिशन 2027′ 

1 min read

UP Politics: Dupty CM केशव मौर्य ने, गृह मंत्री अमित शाह से की मुलाकात क्या हैं सियासी मायने? भाजपा का’मिशन 2027′ 

नई दिल्ली/लखनऊ: उत्तर प्रदेश की सियासत में हलचल तेज हो गई है। यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने आज देश के गृह मंत्री अमित शाह से नई दिल्ली में शिष्टाचार भेंट की। हालांकि, इस मुलाकात को ‘शिष्टाचार भेंट’ का नाम दिया गया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसके गहरे मायने निकाले जा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो इस हाई-प्रोफाइल बैठक में आगामी ‘मिशन 2027’ और उत्तर प्रदेश की मौजूदा प्रशासनिक व सांगठनिक स्थिति पर विस्तृत चर्चा हुई है।

मुलाकात के बाद क्या बोले केशव मौर्य?

​मुलाकात के बाद उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी साझा की। उन्होंने कहा:”माननीय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह  से आज नई दिल्ली में शिष्टाचार भेंट कर उनका मार्गदर्शन प्राप्त किया। विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर उनके साथ सार्थक चर्चा हुई। अपना बहुमूल्य समय प्रदान करने के लिए मैं उनका हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ।”

मिशन 2027: चुनौतियों और रणनीति पर मंथन

​सूत्रों के अनुसार, करीब आधे घंटे तक चली इस मुलाकात में उत्तर प्रदेश सरकार के कामकाज और जनता के बीच योजनाओं के फीडबैक पर चर्चा हुई।​संगठन और सरकार का तालमेल: भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती संगठन और सरकार के बीच सटीक समन्वय बनाए रखना है। केशव मौर्य और अमित शाह के बीच इस मुद्दे पर भी बात हुई कि कैसे कार्यकर्ताओं के उत्साह को 2027 तक बरकरार रखा जाए।​9 साल का रिपोर्ट कार्ड: केंद्र और राज्य सरकार के पिछले 9 वर्षों के कामकाज को जनता तक पहुँचाने और ‘प्रो-इंकम्बेंसी’ (Pro-incumbency) को वोट में तब्दील करने की रणनीति पर विमर्श हुआ।​कानून-व्यवस्था का मुद्दा: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति और प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर जनता के बीच बने सकारात्मक माहौल को आगामी चुनावों में मुख्य हथियार बनाने पर सहमति बनी।

विपक्ष की घेराबंदी और भाजपा की ‘हैट्रिक’ का प्लान

​उत्तर प्रदेश में इस बार मुकाबला त्रिकोणीय होता दिख रहा है। एक तरफ समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के फॉर्मूले के साथ मैदान में डटे हैं, तो दूसरी तरफ बसपा सुप्रीमो मायावती भी चुनाव से पहले अपनी हुंकार भर रही हैं।

​भाजपा इन दोनों चुनौतियों से निपटने के लिए अपनी ‘सोशल इंजीनियरिंग’ को और मजबूत करने में जुटी है। केशव प्रसाद मौर्य, जो भाजपा के एक प्रमुख पिछड़े चेहरे हैं, उनका अमित शाह से मिलना इस बात का संकेत है कि पार्टी ओबीसी (OBC) वोट बैंक को साधने के लिए किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरतना चाहती।

योगी की कार्यशैली और जनता का आशीर्वाद

​चर्चा इस बात पर भी केंद्रित रही कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली और विकास के एजेंडे ने प्रदेश की तस्वीर बदली है। भाजपा को भरोसा है कि प्रधानमंत्री मोदी के विजन और योगी के क्रियान्वयन की जोड़ी 2027 में ‘जीत की हैट्रिक’ लगाएगी। कनेक्टिविटी (रोड और रेल), शिक्षा, स्वास्थ्य और राम मंदिर जैसे सांस्कृतिक मुद्दों के बल पर भाजपा चुनावी मैदान में उतरने को तैयार है।

सियासी गलियारों में चर्चाएं गर्म

​राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केशव मौर्य का गृह मंत्री से मिलना केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि पूरी तरह राजनीतिक है। आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश भाजपा संगठन में कुछ बड़े बदलाव या नई जिम्मेदारियों का ऐलान हो सकता है। यह मुलाकात दर्शाती है कि दिल्ली का केंद्रीय नेतृत्व उत्तर प्रदेश के एक-एक सियासी घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए है।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में ‘मिशन 2027’ को लेकर बिसात बिछ चुकी है और राज्य के तीनों प्रमुख दल अपनी-अपनी रणनीतियों के साथ मैदान में उतर चुके हैं। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव इस बार ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के नारे के साथ सामाजिक न्याय की राजनीति को धार दे रहे हैं। उनका पूरा ध्यान जमीनी स्तर पर जातियों के इस त्रिकोणीय गठजोड़ को मजबूत करने पर है, ताकि वे भाजपा के अभेद्य माने जाने वाले किले में सेंध लगा सकें। अखिलेश यादव लगातार जनसभाओं और सोशल मीडिया के जरिए सरकार को बेरोजगारी और महंगाई के मुद्दे पर घेर रहे हैं।

​दूसरी ओर, बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती एक बार फिर अपनी पुरानी और सफल रही ‘सोशल इंजीनियरिंग’ की राह पर लौटती दिख रही हैं। वे दलित-ब्राह्मण गठजोड़ के साथ-साथ अन्य वर्गों को साथ लाने के लिए शांत लेकिन ठोस रणनीतिक तैयारी में जुटी हैं। मायावती का जोर अपने कोर वोट बैंक को एकजुट रखने के साथ-साथ सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय के नारे को पुनर्जीवित करने पर है। बसपा इस बार टिकट वितरण और सांगठनिक नियुक्तियों में भी व्यापक सामाजिक संतुलन बनाने का प्रयास कर रही है, ताकि 2007 जैसे चौंकाने वाले परिणाम दोहराए जा सकें।

​इन सबके बीच, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार की उपलब्धियों और सुशासन के ‘ट्रैक रिकॉर्ड’ को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाकर जनता के बीच जा रहे हैं। उनका प्लान विकास की बड़ी परियोजनाओं जैसे कि जेवर एयरपोर्ट, एक्सप्रेस-वे और ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ODOP) के सफल क्रियान्वयन को सामने रखकर जीत की हैट्रिक लगाने का है। योगी सरकार कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को मुख्य चुनावी मुद्दा बना रही है, जिसे वे ‘सुरक्षित उत्तराखंड-सुरक्षित उत्तर प्रदेश’ के विजन के साथ जोड़कर पेश कर रहे हैं।

​वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य को देखें तो भाजपा जहाँ अपने ‘हिंदुत्व और विकास’ के समावेशी मॉडल पर भरोसा कर रही है, वहीं विपक्ष जातिगत समीकरणों के सहारे सत्ता की वापसी की राह देख रहा है। 2027 का यह मुकाबला केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि विचारधाराओं और कार्यशैलियों का भी होगा। जहाँ अखिलेश का ‘पीडीए’ युवा और पिछड़ों को जोड़ने की कोशिश है, वहीं मायावती का अनुभव और योगी आदित्यनाथ का प्रशासनिक रसूख इस लड़ाई को बेहद दिलचस्प और चुनौतीपूर्ण बना रहा है। हर दल की नजर प्रदेश की जनता के उस ‘आशीर्वाद’ पर है, जो भविष्य की राजनीतिक दिशा तय करेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!