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Ram Kumar Valia resign from BJPउत्तराखंड भाजपा से इस्तीफा, पूर्व राज्य मंत्री रामकुमार वालिया ने सभी पदों से दिया इस्तीफा

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Ram Kumar Valia resign from BJPउत्तराखंड भाजपा से इस्तीफा, पूर्व राज्य मंत्री रामकुमार वालिया ने सभी पदों से दिया इस्तीफा

देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति और आगामी सांगठनिक फेरबदल के बीच भारतीय जनता पार्टी को एक बड़ा झटका लगा है। वरिष्ठ राजनेता, पूर्व दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री और ‘भारतीय सर्व समाज महासंघ’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामकुमार वालिया ने भाजपा की सक्रिय सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय नेतृत्व और प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट को भेजकर पार्टी के भीतर मचे आंतरिक कलह और उपेक्षा को सार्वजनिक कर दिया है।

35 वर्षों का राजनीतिक अनुभव और उपेक्षा का आरोप

​रामकुमार वालिया, जो लगभग साढ़े तीन दशकों से सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय हैं, ने अपने त्यागपत्र में पार्टी के प्रति गहरी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगस्त 2020 में जब उन्होंने अपने लगभग 500 वरिष्ठ समाजसेवियों और विभिन्न संगठनों के अध्यक्षों के साथ भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी, तब उन्हें एक नई ऊर्जा की उम्मीद थी। लेकिन पिछले चार वर्षों में उन्हें केवल उपेक्षा और भेदभाव ही मिला।

​वालिया ने पत्र में लिखा कि उन्होंने गुजरात, तेलंगाना, त्रिपुरा, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनावों के साथ-साथ लोकसभा चुनावों में भी अपने निजी संसाधनों का उपयोग करते हुए भाजपा के पक्ष में जमकर प्रचार किया। इसके बावजूद, पार्टी के भीतर उन्हें कभी “अपना” नहीं माना गया।

‘समाज की अनदेखी बर्दाश्त नहीं’

​इस्तीफे का सबसे गंभीर पहलू जातीय और सामाजिक उपेक्षा को बनाया गया है। रामकुमार वालिया ने आरोप लगाया कि वे जिस ‘अहलुवालिया, कलाल और कलवार’ समाज से आते हैं, जिसकी देश भर में लगभग 16 करोड़ की आबादी है, उसे भाजपा सरकार और संगठन में पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है।

​उन्होंने तीखे लहजे में कहा:कई बार अवगत कराने के बाद भी चाहे उत्तराखंड हो या दिल्ली, मेरे समाज के एक भी व्यक्ति को न तो संगठन में कोई दायित्व दिया गया और न ही सरकारों में जगह मिली। जिस समाज ने मुझे जन्म दिया, उसकी अनदेखी मैं बर्दाश्त नहीं कर सकता।”

 

कोरोना काल की मेहनत और मानसिक तनाव

​वालिया ने अपने कार्यकाल की उपलब्धियों को याद दिलाते हुए कहा कि कोरोना काल की विषम परिस्थितियों में उन्होंने ‘भारतीय सर्व समाज महासंघ’ के माध्यम से देश भर में लगभग दो लाख लोगों को ‘मोदी कोरोना सेफ्टी किट’ वितरित की थी। उन्होंने प्रधानमंत्री की नीतियों पर भरोसा जताया था, लेकिन स्थानीय स्तर पर पार्टी के नेताओं के व्यवहार ने उन्हें “मानसिक तनाव” की स्थिति में पहुंचा दिया।

सियासी गलियारों में चर्चा तेज

​रामकुमार वालिया का इस्तीफा उत्तराखंड भाजपा के लिए एक बड़ी चेतावनी माना जा रहा है, विशेषकर तब जब पार्टी आगामी चुनावों और सांगठनिक विस्तार की तैयारी में जुटी है। वालिया जैसे कद्दावर नेता, जो उत्तराखंड में दो बार दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री रह चुके हैं और जिनका कई सामाजिक संगठनों पर सीधा नियंत्रण है, उनका पार्टी छोड़ना भाजपा के ‘सर्व समावेशी’ नारे पर सवालिया निशान लगाता है।

​रामकुमार वालिया के इस कदम के बाद अब सबकी निगाहें भाजपा के प्रदेश नेतृत्व पर टिकी हैं। क्या पार्टी उन्हें मनाने की कोशिश करेगी या फिर यह इस्तीफा उत्तराखंड की राजनीति में किसी नए समीकरण की शुरुआत है? फिलहाल, वालिया ने अपनी राहें अलग कर ली हैं, जिसका प्रभाव आने वाले समय में स्पष्ट रूप से देखने को मिलेगा।

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