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तपोवन: एनटीपीसी के खिलाफ ग्रामीणों का हुंकार, विधायक लखपत बुटोला ने दिया समर्थन; मांगों पर 5 दिन का अल्टीमेटम

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तपोवन: एनटीपीसी के खिलाफ ग्रामीणों का हुंकार, विधायक लखपत बुटोला ने दिया समर्थन; मांगों पर 5 दिन का अल्टीमेटम

​सोहन सिंह गोपेश्वर/जोशीमठ: चमोली जनपद के ज्योतिर्मठ (जोशीमठ) ब्लॉक अंतर्गत तपोवन क्षेत्र में निर्माणाधीन तपोवन-विष्णुगाड जल विद्युत परियोजना के प्रभावित ग्रामीणों का आक्रोश गहराता जा रहा है। अपनी पांच सूत्रीय मांगों को लेकर पिछले पांच दिनों से धरने पर बैठे ग्रामीणों को अब राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है। रविवार को बदरीनाथ विधानसभा क्षेत्र के विधायक लखपत बुटोला ने धरना स्थल पहुंचकर ग्रामीणों की मांगों को जायज ठहराया और एनटीपीसी प्रबंधन को इनके त्वरित निस्तारण की चेतावनी दी।

विधायक और जनप्रतिनिधियों का मिला साथ

​आंदोलन को मजबूती देने पहुंचे विधायक लखपत बुटोला ने कहा कि विकास की परियोजनाओं में स्थानीय लोगों के हितों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि एनटीपीसी को ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर करना चाहिए। विधायक के साथ ही ज्योतिर्मठ के ब्लॉक प्रमुख अनूप नेगी और पालिकाध्यक्ष देवेश्वरी शाह ने भी धरना स्थल पर पहुंचकर ग्रामीणों के संघर्ष में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होने का आश्वासन दिया।

ग्रामीणों की पांच सूत्रीय मांगें: क्या है मुख्य विवाद?

​परियोजना प्रभावित ग्रामीण लंबे समय से उपेक्षा का आरोप लगा रहे हैं। उनके आंदोलन के केंद्र में निम्नलिखित पांच प्रमुख मांगें हैं:​रोजगार की गारंटी: प्रभावित क्षेत्र के शिक्षित बेरोजगार युवाओं को एनटीपीसी में स्थायी नौकरी दी जाए।​छंटनी किए गए कर्मियों की बहाली: एनटीपीसी की कार्यदायी संस्था (HCC) से बाहर किए गए 59 स्थानीय युवाओं को तत्काल काम पर वापस लिया जाए।चारा-पत्ति का लाभ: परियोजना के कारण प्रभावित हुए चारागाहों और वनाधिकारों के बदले प्रभावित परिवारों को चारा-पत्ति भत्ता या उचित मुआवजा दिया जाए।​पुल का निर्माण: भंग्यूल गांव को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण पुल का निर्माण कार्य जल्द से जल्द पूरा किया जाए, जिससे आवाजाही सुलभ हो सके।​स्थानीय विकास: परियोजना क्षेत्र के बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

“कोरे आश्वासनों से अब काम नहीं चलेगा”

​आंदोलन का नेतृत्व कर रहे ज्योतिर्मठ प्रधान संघ के अध्यक्ष मोहन बजवाल ने एनटीपीसी प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इससे पूर्व भी ग्रामीणों ने आंदोलन किया था, लेकिन तब कंपनी ने झूठे आश्वासन देकर धरना समाप्त करवा दिया था। बजवाल ने साफ किया कि इस बार ग्रामीण पीछे नहीं हटेंगे।”जब तक हमारी मांगें लिखित रूप में स्वीकार कर धरातल पर नहीं उतरतीं, यह आंदोलन जारी रहेगा। हमने एनटीपीसी के धोखे को पहले भी देखा है, अब आर-पार की लड़ाई होगी।” – मोहन बजवाल, अध्यक्ष, प्रधान संघ।

 

प्रशासन को अल्टीमेटम: तालाबंदी और घेराव की तैयारी

​आंदोलनकारियों ने अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। सोमवार को प्रभावितों द्वारा उपजिलाधिकारी (SDM) के माध्यम से जिलाधिकारी और एनटीपीसी प्रबंधन को एक ज्ञापन सौंपा जाएगा। ग्रामीणों ने कंपनी को अपनी मांगें पूरी करने के लिए 5 दिनों का समय दिया है।

​यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती है, तो ग्रामीणों ने निम्नलिखित कड़े कदम उठाने की घोषणा की है:​एनटीपीसी कार्यालय की तालाबंदी।​परियोजना से जुड़ी आवश्यक सेवाओं को ठप करना।तहसील प्रशासन का पूर्ण घेराव।

क्षेत्र में तनाव की स्थिति

​धरना स्थल पर रविवार को पूर्व ब्लॉक प्रमुख हरीश परमार, कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष विक्रम फरस्वाण, सचिन गडिया सहित भारी संख्या में मातृशक्ति और युवा मौजूद रहे। ग्रामीणों के इस कड़े रुख से परियोजना स्थल पर कार्य प्रभावित होने की संभावना बढ़ गई है। अब सबकी नजरें प्रशासन और एनटीपीसी प्रबंधन के अगले कदम पर टिकी हैं कि वे इस गतिरोध को सुलझाने के लिए क्या वार्ता करते हैं।

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