South Asia 24×7 का मतलब पक्की खबर, देश और जहान की ताजातरीन खबरें,पत्रकारिता की नई आधारशिला, निष्पक्षता और पारदर्शिता अब, South Asia 24×7 पर खबर ग्राउंड जीरो से, मंझे हुए संवाददाताओं के साथ,हर जन मुद्दे पर, सीधा सवाल सरकार से ,सिर्फ South Asia 24 ×7 पर,पत्रकारिता की मजबूती के लिए जुड़िए हमारे साथ, South Asia 24×7 के यूट्यूब चैनल,फेसबुक और ट्विटर पर क्योंकि हम करते है बात मुद्दे की

South Asia24x7

Hindi News, Breaking News in Hindi, हिंदी न्यूज़ , Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest News in Hindi,South Asia24x7

All is not well in congress Uttrakhand कांग्रेस में ‘ऑल इज नॉट वेल’: प्रीतम के द्वार पहुंचे हरीश रावत, क्या 2027 से पहले बदलेगी सियासत की बिसात?

1 min read

All is not well in congress Uttrakhand कांग्रेस में ‘ऑल इज नॉट वेल’: प्रीतम के द्वार पहुंचे हरीश रावत, क्या 2027 से पहले बदलेगी सियासत की बिसात?

देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति में भूचाल तब आ गया जब पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के कद्दावर नेता हरीश रावत अचानक वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह के यमुना कॉलोनी स्थित सरकारी आवास पहुंचे। लगभग 3 घंटे तक बंद कमरे में चली इस मैराथन बैठक ने सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। एक ओर जहां कार्यकर्ता आवास के बाहर टकटकी लगाए रहे, वहीं भीतर उत्तराखंड कांग्रेस के दो सबसे बड़े दिग्गजों के बीच भविष्य की रणनीति पर मंथन चलता रहा।

चुप्पी में छिपा है बड़ा सियासी संकेत

​हैरानी की बात यह रही कि हमेशा मीडिया के सवालों का बेबाकी से जवाब देने वाले हरीश रावत ने इस मुलाकात के बाद अपने ‘राजनीतिक अवकाश’ को लेकर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। जानकारों का मानना है कि ‘हरदा’ की यह चुप्पी किसी बड़े तूफान का संकेत है। राजनीति के माहिर खिलाड़ी माने जाने वाले रावत अच्छी तरह जानते हैं कि कब चुप रहना है और कब पत्ता फेंकना है।

गुटबाजी और नए चेहरों की एंट्री: विवाद की असली जड़?

​हाल ही में कांग्रेस पार्टी में कई पूर्व विधायकों और वरिष्ठ नेताओं ने सदस्यता ग्रहण की है, जिनमें रुद्रपुर के पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल, सितारगंज से नारायण पाल और लखन सिंह नेगी जैसे बड़े नाम शामिल हैं। सूत्रों की मानें तो इन नेताओं की जॉइनिंग को लेकर पार्टी के भीतर ‘ऑल इज नॉट वेल’ वाली स्थिति पैदा हो गई है।7

​हरीश रावत की नाराजगी की एक बड़ी वजह पार्टी के भीतर बिना उचित राय-मशविरे के लिए जा रहे फैसले और वर्चस्व की लड़ाई बताई जा रही है। यही कारण है कि सोशल मीडिया पर अक्सर सक्रिय रहने वाले रावत आजकल ‘राजनीतिक संन्यास’ और ‘अर्जित अवकाश’ जैसे शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं।

मिशन 2027 और कांग्रेस की राह में कांटे

​कांग्रेस पार्टी के लिए मिशन 2027 की राह आसान नहीं दिख रही है। 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में करारी हार के बाद पार्टी अब भी आपसी तकरार से जूझ रही है। वहीं, लोकसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) में प्रदेश में खाता न खुल पाना कांग्रेस की संगठनात्मक कमजोरी को दर्शाता है। अब जब पार्टी को एकजुट होकर सत्ता विरोधी लहर का फायदा उठाना चाहिए, तब शीर्ष नेताओं की आपसी खींचतान ने कार्यकर्ताओं को असमंजस में डाल दिया है।

क्या होगा बड़ा बदलाव?

​प्रीतम सिंह के साथ हुई इस मुलाकात को कांग्रेस के भीतर एक नए ध्रुवीकरण के रूप में देखा जा रहा है। क्या हरीश रावत अपनी नाराजगी दूर कर पार्टी को लामबंद कर पाएंगे या फिर 2027 से पहले कांग्रेस में कोई बड़ा ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ देखने को मिलेगा? यह सवाल फिलहाल अनुत्तरित है, लेकिन यमुना कॉलोनी की इस बैठक ने यह साफ कर दिया है कि उत्तराखंड कांग्रेस के भीतर अंदरूनी कलह चरम पर है।

रिपोर्ट: राज्य स्तरीय संवाददाता, साउथ एशिया 24*7, देहरादून

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!