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No  ceasefire in Lebanon हिजबुल्लाह पर ‘full force’ प्रहार जारी रहेगा: PM नेतन्याहू Netanyahu 

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No  ceasefire in Lebanon हिजबुल्लाह पर ‘full force’ प्रहार जारी रहेगा: PM नेतन्याहू Netanyahu 

यरूशलेम/वॉशिंगटन। मध्य पूर्व (Middle East) में तनाव अपने चरम पर है। इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट कर दिया है कि लेबनान में फिलहाल किसी भी तरह का युद्धविराम (Ceasefire) नहीं होने जा रहा है। उत्तरी इज़राइल के निवासियों को संबोधित करते हुए नेतन्याहू ने दोहराया कि जब तक सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा पूरी तरह बहाल नहीं हो जाती, इज़राइली रक्षा बल (IDF) हिजबुल्लाह के ठिकानों पर पूरी ताकत से हमला जारी रखेंगे।

नेतन्याहू का कड़ा संदेश: “हम नहीं रुकेंगे”

​प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने एक आधिकारिक बयान जारी कर उन अटकलों पर विराम लगा दिया, जिनमें अमेरिका और फ्रांस द्वारा प्रस्तावित 21 दिनों के युद्धविराम की संभावना जताई जा रही थी। नेतन्याहू ने कहा:​“उत्तर के प्रिय निवासियों, मुझे आप पर गर्व है। मैं आपको सूचित करना चाहता हूँ: लेबनान में कोई युद्धविराम नहीं है। हम हिजबुल्लाह पर पूरी ताकत से प्रहार करना जारी रख रहे हैं, और हम तब तक नहीं रुकेंगे जब तक आपकी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती।”

 

इज़राइल की ‘एयर स्ट्राइक’ और जमीनी रणनीति

​पिछले कुछ दिनों में इज़राइल ने लेबनान पर दशकों का सबसे भीषण हवाई हमला किया है। अंतरराष्ट्रीय पोर्टल्स की रिपोर्ट के अनुसार, इज़राइली वायुसेना ने दक्षिणी लेबनान और बेरुत के उपनगरीय इलाकों में हिजबुल्लाह के सैकड़ों ठिकानों को निशाना बनाया है।​टारगेटेड किलिंग: इज़राइल ने हिजबुल्लाह के शीर्ष कमांडरों और मिसाइल यूनिट्स को ध्वस्त करने का दावा किया है।​विस्थापन का संकट: इन हमलों के कारण लेबनान में अब तक हज़ारों लोग विस्थापित हो चुके हैं, जबकि इज़राइल का कहना है कि वह अपने नागरिकों को सुरक्षित घर वापस भेजने के लिए प्रतिबद्ध है।​रणनीतिक उद्देश्य: इज़राइल का मुख्य लक्ष्य हिजबुल्लाह की सैन्य क्षमता को इतना कमजोर करना है कि वह भविष्य में 7 अक्टूबर जैसे किसी हमले का साहस न कर सके।

वॉशिंगटन में अगले हफ्ते होगी अहम बैठक

​एक तरफ जहाँ युद्ध के मैदान में बारूद बरस रहा है, वहीं दूसरी ओर कूटनीतिक गलियारों में शांति की छटपटाहट भी दिखाई दे रही है। समाचार एजेंसी AFP के अनुसार, अमेरिकी विदेश विभाग के एक अधिकारी ने पुष्टि की है कि अगले सप्ताह वॉशिंगटन में इज़राइल और लेबनान के बीच बातचीत हो सकती है।

​अधिकारी ने कहा, “हम पुष्टि कर सकते हैं कि विभाग अगले सप्ताह इज़राइल और लेबनान के साथ चल रही युद्धविराम वार्ताओं पर चर्चा करने के लिए एक बैठक की मेजबानी करेगा।”

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और कूटनीतिक दबाव

​दुनिया भर के नेता इस संघर्ष के एक पूर्ण क्षेत्रीय युद्ध (Regional War) में बदलने की आशंका से डरे हुए हैं।​अमेरिका की भूमिका: जो बाइडन प्रशासन लगातार इज़राइल पर दबाव बना रहा है कि वह सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ कूटनीतिक रास्ता भी खुला रखे। वॉशिंगटन में होने वाली बैठक इसी प्रयास का हिस्सा मानी जा रही है।​फ्रांस और यूरोपीय संघ: फ्रांस ने भी तत्काल युद्धविराम की अपील की है ताकि मानवीय सहायता लेबनान तक पहुँच सके।​ईरान का रुख: हिजबुल्लाह के सबसे बड़े समर्थक ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि इज़राइल ने जमीनी हमला (Ground Offensive) शुरू किया, तो इसके परिणाम गंभीर होंगे।

आगे क्या?

​फिलहाल स्थिति ‘वेट एंड वॉच’ (Wait and Watch) की है। एक ओर इज़राइली टैंक लेबनान सीमा पर जमा हो रहे हैं और हवाई हमले जारी हैं, तो दूसरी ओर वॉशिंगटन में होने वाली संभावित बातचीत शांति की एक क्षीण उम्मीद जगाती है।

​विश्लेषकों का मानना है कि नेतन्याहू का कड़ा रुख उनकी घरेलू राजनीति और सुरक्षा प्राथमिकताओं का हिस्सा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव उन्हें बातचीत की मेज पर आने के लिए मजबूर कर सकता है। अब पूरी दुनिया की नज़रें अगले हफ्ते वॉशिंगटन में होने वाली इस हाई-प्रोफाइल बैठक पर टिकी हैं।

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